तीन तलाक विधयेक : निहितार्थ ‘कसक के!

शिव शरण त्रिपाठी
लोकसभा में तीन तलाक विधयेक पास होने के बाद कानून बनने की राह पर ज्यों-ज्यों अग्रसर है त्यों-त्यों मुस्लिम वोटों के सौदागरों की चिंतायें बढ़ती जा रही है। सर्वाधिक बुरी स्थिति में तो कांग्रेस फसती नजर आ रही है। जिसके ही एक प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक भूल से आज यह स्थिति पैदा हुई है। काश! तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व० राजीव गांधी ने १९८६ में शाहबानो के मामले में आये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदलने का खेल न खेला होता। यकीनन उनका यह हैरान करने वाला निर्णय महज मौलानाओं के दबाव में मुस्लिम जमात के वोट खिसकने के भय से लिया गया था।
यकीनन स्व० गांधी के इस निर्णय से पूरा देश अवाक रह गया था। पर शाहबानो ने मानो मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से छुटकारा पाने की नींव रख दी थी उनके नाम से मिलती जुलती उत्तराखंड की सायराबानो एवं चार अन्य महिलाओं ने  तीन तलाक को खत्म करने को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जिसके फ लस्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक को गैर कानून करार दिया। साथ ही केन्द्र सरकार को इस पर कानून बनाने का भी निर्देश जारी कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद मोदी सरकार ने इस दिशा में प्रयास तेज कर दिया। सरकार के हरकत में आते ही मुस्लिम जमात की कई संस्थाओं ने भारी विरोध शुरू कर दिया। आखिर उन्हे शिकस्त ही झेलनी पड़ी और २८ दिसम्बर को तीन तलाक पर रोक का विधेयक लोकसभा में पारित हो गया। अब मंगलवार यानी २ जनवरी को इसे राज्य सभा में पेश किया जाना है।
लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित होने से खासकर पीडि़त मुस्लिम महिलाओं में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए सभी ने एक स्वर में कहा कि आज तो उनके लिए ईद से भी बड़ा पर्व है। पीडि़ताओं ने इस बिल को ऐतिहासिक बताया है।
इसी कड़ी में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध करते हुए कहा कि एक साथ तीन तलाक को धार्मिक कानून की आड़ में सही ठहराया जाना उचित नहीं है। शिया वक्फ बोर्ड ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी भेजा है। इस पत्र में वसीम रिजवी ने लिखा है कि एक साथ तीन तलाक महिलाओं के शोषण की श्रेणी में आता है। इससे पीडि़त महिला जिंदगी भर अपने बचे हुए जीवन में संघर्ष करती रहती है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक बार में एक साथ तीन तलाक को सही मानते हुए इसका विरोध कर रहा है। यह बेहद निंदनीय है। यह शरई का मामला नहीं है।
जबकि दारुल उलूम ने मोदी सरकार द्वारा एक साथ तीन तलाक का बिल संसद में पेश किए जाने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। इस बिल को मुस्लिम विरोधी करार देते हुए किसी भी सूरत में मंजूर न किए जाने की बात कही है। दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि 2019 के चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार ने इस बिल को बिना उलमा की राय-मशविरा के आनन-फानन में संसद में पेश कर दिया। कहा कि तीन दिन पहले मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष ने इसकी कमियों को गिनाते हुए इसे दुरुस्त करने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा था, लेकिन सरकार ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मुस्लिम संगठनों से विचार विमर्श किए बगैर ही बिल पेश कर दिया है। नोमानी ने सवाल किया कि पति के तीन साल के लिए जेल जाने की सूरत में पूरे परिवार का खर्च कौन उठाएगा? कहा कि अगर बिल में ये शामिल हो कि एक साथ तीन तलाक देने पर, तलाक हो गया है तो फिर ये मसला पैदा नहीं होता, लेकिन शादी बनी रहने की सूरत में महिला को समाज में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
यही नहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपना विरोध जताते हुए एक साथ तीन तलाक बिल को वापस लेने की मांग की है। बोर्ड के सेक्रेटरी जफरयाब जिलानी ने कहा कि हमें जो कहना था वह कह दिया। अब सरकार जो कर रही है, करने दो। हम आखिरी दिन तक बिल का विरोध करेंगे। बिल का पेश होना या पास होना आखिरी रास्ता नहीं है। इस देश में जम्हूरियत नाम की चीज भी है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित हो जाने पर अब इसका कानून बनना तय हो जाने से जहां मुस्लिम जमात की पैरोकार संस्थाओं की दुकानदारी छिन जाने का खतरा पैदा हो गया है वहीं अल्पसंख्यक वोटों का दोहन करने वाले राजनीतिक दलों खासकर कांग्रेस, सपा व उन जैसी पार्टियों का यह बड़ा वोट बैंक खिसकने के प्रबल आसार बनने लगे है।
सूत्रों के अनुसार इनका दर्द पूरे देश के सामने तब आ गया जब कांग्रेस के नेताओं ने इस पर किन्तु परन्तु लगाने में चूक नहीं की। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि विधेयक की धारा-5 सिर्फ  यह बताती है कि मुस्लिम महिलाएं गुजारें भत्ते की हकदार होगी। लेकिन इसमें गुजारे भत्ते को परिभाषित नहीं किया गया है। न ही इसकी गणना का तरीका बताया गया है। यह भी साफ नहीं है कि मुस्लिम वूमैन (प्रोटेक्शन ऑफ  राइट्स ऑन डिवोर्स) एक्ट-1986 की धारा 3 और 4 के तहत मुस्लिम महिला की प्रदान किया गया गुजारा भत्ता प्रस्तावित गुजारे भत्ते से घटा दिया जाएगा या वो उसके अतिरिक्त होगा। उन्होने सवाल किया कि एक बार में तीन तलाक को साबित करने की जिम्मेदारी महिला पर ही क्यों हो? क्यों नहीं यह जिम्मेदारी पति पर डाली जाए कि उसने एक बार में तीन तलाक नहीं दिया है। सुरजेवाला ने कहा कि पति को अगर तीन साल की जेल होती है तो ऐसी स्थिति में महिलाओं और बच्चों को गुजारे भत्ते का भुगतान सुनिश्चित होना चाहिए।  मुस्लिम महिला संगठनों ने भी यह स्वाभाविक सवाल पूछा है कि अगर पति जेल में होगा तो भरण-पोषण या गुजार भत्ते का भुगतान कौन करेंगा।
इसी कड़ी में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने अलग सुर में बोलते हुए कहा कि यह विधेयक लोगो के निजी जीवन का अतिक्रमण करेगा और तलाक जैसे दीवानी मसले को अपराधिक कानून के दायरे में ले आएगा। इसलिए इस बारे में बेहद सचेत रहने की जरूरत है।
लगभग ऐसी ही कसक माकपा नेता वृंदाकरात, एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन औवेसी आदि ने बयानों से भी दिखती है। सपा तो मुस्लिम वोटों के लिये कुछ भी करती रही है। इसके पूर्व अध्यक्ष मुलामय सिंह यादव तो अपने को मौलाना मुलायम कहलाना पसंद करते थे। बसपा भी मुस्लिम मतों को रिझाने में पीछे नहीं रहती है।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में घोषणा कर की अब मुस्लिम महिलायें बिना मेहरम के हज पर जा सकेगी। उन्होने कहा ऐसी जितनी महिलायें आयेगी सभी को बिना लाटरी के हज पर भेजा जायेगा। अभी तक १५०० महिलायें बिना मेहरम के जाने के लिये आवेदन कर चुकी है। उन्होने कहा कि दुनिया के कई देशों में मेहरम की पाबंदी नहीं है। लेकिन भेदभाव व अन्याय की इस पाबंदी को हम आजादी के ७० साल में भी नहीं सोच पाये।
तीन तलाक विधेयक कानून बनने व बिना मेहरम के हज पर जाने की सरकार की अनुमति से बेहद उत्साहित मुस्लिम महिलाओं ने अब मुस्लिम धर्म में जारी बहुविवाह (चार शादी का प्रावधान) और निकाह हलाला के खिलाफ  मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है।
तीन तलाक के खिलाफ  लड़ाई को सर्वोच्च अदालत तक ले जाने वाली उत्तराखंड की सायरा बानो ने बुधवार को कहा कि अब उनकी अगली लड़ाई बहुविवाह और निकाह हलाला के खिलाफ  होगी हमारे समाज में इसके लिये कोई जगह नहीं होनी चाहिये।
मुस्लिम महिलाओं को और उत्साहित करते हुये प्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीम ने मुस्लिम महिलाओं से बुर्का उतार       फ ेकने की बात कही है। उन्होने कहा कि यह तीन तलाक से भी कहीं अधिक घातक है।
भारतीय मुस्लिम महिलाओं के लिये तीन तलाक का कानून अमली जामा पहनने से कोई रोक नहीं पायेगा पर कांग्रेस, सपा सहित कई दल अल्पसंख्यक वोटो के खिसकने से चिंतित जरूर है।
शरियत के नाम पर अपनी दुकानें चलाने वाली शरियत की झंडाम्बरदार संस्थायें व मौलानाओं को इस कानून के अमलीजामा पहनने से उनकी दुकानों का भी बंद हो जाना तय है।
तीन तलाक कानून की कड़ी में केन्द्र सरकार द्वारा बिना मेहरम के हज करने की इजाजत देने से उत्साहित मुस्लिम महिलायें अब चार शादियों के खिलाफ  हल्ला बोलने को तैयार है। प्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीन ने तो मुस्लिम महिलाओं को बुर्का उतार फ ेकने की सलाह दी है।

आरिफ  ने की तारीफ
तीन तलाक के कानून बनने पर केन्द्र सरकार के पूर्व मंत्री आरिफ  मोहम्मद खान ने मोदी सरकार की पीठ थपथपाई है।
शाहबानो मामले में अपनी सरकार का विरोध कर पार्टी छोडऩे वाले श्री खान ने रविवार को एक बयान में कहा कि तीन तलाक विरोधी कानून अमल में आने के बाद भारत की कोई भी मुस्लिम लड़की खौफ  में नहीं जियेगी। उन्होने तलाक कानून का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया और कहा कि अगर १९८६ में भी देश में ऐसा नेतृत्व होता तो आज देश की सियासत और मुसलमानों की स्थिति कुछ और होती।
इसरत ने थामा भाजपा का झंडा
मुस्लिम महिलाओं के बढ़ते समर्थन की कड़ी में नव वर्ष के पहले ही दिन एक साथ तीन तलाक के खिलाफ  जंग लडऩे वाली इसरत जहां ने भाजपा का झंडा थाम कर भाजपा की स्थिति और भी मजबूत कर दी है।
उन्होने केन्द्र सरकार द्वारा इस प्रथा के खिलाफ  बिल लाने पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ  की है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की वजह से ही एक साथ तीन तलाक के खिलाफ  बिल लाया जा सका है। उन्होने कहा कि मोदी जी पीडि़तों के हक में क्रांतिकारी बिल लाये मै बहुत खुश हूँ। मंै पार्टी की महिला शाखा में काम करूंगी और भविष्य में महिलाओं के अधिकार की रक्षा के लिये लड़ाई लरूंगी। उन्होने पश्चिम बंगाल सरकार पर तंज कसा कि वहां की मुख्यमंत्री से उन्हे कोई मदद नहीं मिली।

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