सत्य का ठीक वक्त पर वार

     इ. राजेश पाठक 

२०१९ के लोकसभा के चुनाव परिणाम को लेकर अपनी एक रिपोर्ट  में इंडिया टीवी की महिला संवाददाता बताती हैं कि यदि हम उत्तर प्रदेश के  ग्रामीण इलाके में जाएं तो हम देख सकते हैं कि वहां की  महिलाओं नें किस प्रकार अपने घरों में नव-निर्मित्त शौचालयों को लीपकर-पोतकर और उस पर अपने हांथों से चित्रकारी करके सजाकर -सवारकर रखा है. वो आगे बताती हैं कि कई घरों में तो मकान के बाकी हिस्सों से भी ज्यादा उनमें स्थित शौचालय आपको आकर्षित कर सकते है.[२५ मई, २०१९] शौच-निवृति के लिए कभी रात के अँधेरे का इंतज़ार करने की पीढ़ा बर्दाश्त करने को विवश होने वाली उन महिलाओं के लिए शौचालयों का क्या महत्त्व रहा है वह इस प्रसंग से बेहतर हमें कुछ और नहीं बता सकता .मोदी के पक्ष में आश्चर्य में डालने वाले परिणामों के पीछे क्या-क्या वजह रहीं उसकी ये एक झलक है.
               विपक्षी और तमाम रूढ़िवादी अर्थशास्त्री बेरोजगारी को लेकर चीख-पुकार मचाते रहे, और उनका ध्यान इस और गया ही नहीं कि नौकरी की १० से ५ बजे वाली संस्कृति के दिन अब लदते जा रहे  हैं.  अब उनकी जगह ऐसे विविध और नव विकसित रोजगारों ने ले ली है जिनका न तो समय से न समय अवधि से कोई वास्ता है, जैसे- ऑनलाइन डेलिवरी बॉयज़ एंड गर्ल्स; उबर या ओला ड्राइवर्स; फ़ूड हाकर्स जैसी अन्य नौकरियों. दूसरी और मुद्रा योजना और स्टार्टअप जैसी योजनाओं ने नई पीड़ी के युवक-युवतीयों  में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की प्रेरणा निर्मित्त की है सो अलग. इस संद्धर्व में नवभारत टाइम्स  समाचार पत्र की रिपोर्ट क्या कहती है देखें-‘ प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत ८ अप्रैल, २०१५ को हुई थी. इस योजना के तहत बैंक छोटे उद्धामियों को १० लाख रूपए  तक का लोन दे सकते हैं . लोन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. ‘शिशु’ श्रेणी में ५०००० रूपए, ‘किशोर’ श्रेणी में ५०००१ से लेकर ५ लाख रूपए और ‘तरुण’श्रेणी में ५००००१ रूपए से १० लाख रूपए तक का लोन दिया जाता है.  केन्द्रीय बजट २०१९-२० को पेश करते हुए फाइनेंस  मिनिस्टर ने कहा था कि सरकार नें १५.५६ करोड़ लोगों को ७.२३ लाख करोड़ रूपए लोन के रूप में दिए हैं, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी महिला लाभार्थियों की है.’[३ मार्च,२०१९] स्वभाविक है कि आज के युवाओं का बड़ा वर्ग अब सरकारी नौकरी के इन्तजार में समय गवांते हुए बैठे रहना नहीं चाहता है.  और रही बात अंडर-एम्प्लॉयमेंट  की तो उसकी वजह से होने वाली दिक्कतों को मोदी सरकार के कार्यकाल में उल्लेखनीय महंगाई  की बहुत नीची दर ने उसे बेअसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का काम किया. कहना होगा कि विरोधी दोहरा-दोहराकर अपनी बात साबित करने की कोशिश में लगे रहे, पर सत्य ने चुपचाप वक्त आने पर अपना असर दिखाया और परिणाम सबके सामने है.

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