महान क्रांतिकारी अनाथ बालक ऊधम सिंह

—विनय कुमार विनायक
वो तिथि तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस ईस्वी,
गोरों के गुलाम भारत की एक मनहूस घड़ी थी!

जब कायर अंग्रेज जनरल रेजीनॉल्ड ए डायर ने
पंजाब गवर्नर माइकल ओ ड्वायर के आर्डर पर,

रालेट एक्ट में गिरफ्तार नेताओं के समर्थन हेतु
जलियांवालाबाग में बैठक करती निहत्थी भीड़ पे,

अंधाधुंध सोलह सौ पचास राउंड गोलियां फायर
करके तीन सौ पचास भारतीयों का किया संहार!

जो अंग्रेजों के ताबूत में आखिरी कील बन ठुकी,
जिससे सशस्त्र युवा क्रांतिवीरों का हुआ अवतार!

बारह वर्षीय भगतसिंह,तेरह के चन्द्रशेखर आजाद,
उन्नीस के ऊधमसिंह,बाईस के बिस्मिल रामप्रसाद

कूद पड़े आजादी के महासागर में कफन बांधकर,
जलियांवाला बाग की खून सनी मिट्टी को छूकर!

अनाथालय में पल रहे एक अनाथ शिशु शेरसिंह,
जो एक वर्ष में हुए मातृहीन, सात में पितृविहीन!

कोई सम्बन्धी नहीं अनाथ बालकों के मददगार,
मुक्ता सिंह,शेर सिंह दो भाई चले गए अनाथघर,

अनाथालय ने बड़े को साधु, छोटे को ऊधमसिंह,
पिता तेहाल सिंह लिखा पता पंजाब सुनाम,संगरुर!

जन्मतिथि छब्बीस दिसंबर अठारह सौ निन्यानबे,
इकत्तीस जुलाई उन्नीस सौ चालीस में शहीद हुए!

सत्तरह वर्ष में अग्रज साधुसिंह भी साथ छोड़ गए,
अठारह में अनाथालय छोड़ा मैट्रिक उत्तीर्ण होकर!

अब ऊधम सिंह चले मिट्टी का प्रण पूरा करने,
जलियांवाला बाग के हत्यारे दो डायर को मारने!

जनरल डायर तो ईश्वरीय कहर से खुद मर गए,
दूजा गवर्नर माइकल ओ ड्वायर ब्रिटेन चले गए!

भारत मां का लाल ऊधम सिंह प्रण के पक्के थे,
चंदा ले डायर ढूंढने अमेरिका ब्राजील, ब्रिटेन गए!

विदेश में गदर पार्टी से जुड़के ऊधम ने क्रांति की,
एक कार और पिस्तौल ऊधम सिंह ने खरीद ली!

एक मोटी सी पुस्तक के बीच में पिस्तौल रखके
लंदन के 9 एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड़ में रहते!

तेरह मार्च उन्नीस सौ चालीस थी बदले की घड़ी,
लंदन के काक्सटन हाल में ऊधम ने फायर की!

मौके पर ड्वायर को मार,ऊधमसिंह हुए गिरफ्तार,
इकत्तीस जुलाई चालीस को पेंटोविले में हुई फांसी!.

ऊधमसिंह ने मांद में घुसकर दुश्मन को मारा था,
ऊधम ने राम मो. सिंह आजाद नाम स्वीकारा था!

पता नही इतिहासकार क्यों उन्हें नास्तिक लिखते?
वे पंच ककार मंडित सिख राम नामधारी सिंह थे!

उनकी आस्था सर्वधर्म समन्वयवादी भारतीयता में,
राम-कृष्ण-बुद्ध-महावीर-नानक-गोविंद की रीति में!

जब विलायत में जज ने पूछा ड्वायर के बगलगीर
नारियों को तुमने क्यों नहीं ऊधमसिंह गोली मारी?

भारत के अद्भुत उद्भट योद्धा का सटीक उत्तर था,
भारतीय संस्कृति में अवध्य, पूजनीय होती है नारी!

कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, विषय परिस्थितियों में,
विशिष्ट वीर संतति को जन्म देती धरती मां हमारी!

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