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    Homeसाहित्‍यकविताहिन्दुत्व को समझो जिसमें सत्य अहिंसा दया है

    हिन्दुत्व को समझो जिसमें सत्य अहिंसा दया है

    —विनय कुमार विनायक
    वो हिन्दुत्व को क्या जाने व समझेंगे,
    जो पूर्वाग्रह में जीते और दुराग्रही होते,
    जो आक्रांताओं की हमेशा तारीफ करते,
    यह जानकर भी कि उन आक्रांताओं ने
    उनके हिन्दू पूर्वजों को घोर यातना देकर
    उनकी मां-बहन-बेटियों को बलात्कृत कर
    तलवार की जोर पे उन्हें गुलाम किए थे!

    वे अब भी विदेशी धार्मिक गुलाम बने हैं,
    अनबूझ विदेशी धर्म मजहब के नाम पर,
    शिक्षा, व्यापार, नफा व नुकसान भूलकर,
    उनके कशीदे करते अष्टयाम पांचों पहर!

    जो दुनियाभर के अपरिचित जेहादियों के
    शुभचिंतक,मजहबी आतंक के पोषक होते
    जिन्हें मातृभूमि से प्रेम नहीं हिकारत हो,
    जो इस माटी से बने इस माटी में मिलेंगे,
    मगर आस्था जिनकी विदेशों में बसती हो,
    वो हिन्दू और हिन्दुत्व को क्या समझेंगे!

    हिन्दू और हिन्दुत्व क्या है इसे जान लो,
    हिन्दू एकमात्र सत्पात्र हैं जो धारण करते
    हिन्दुत्व व मानवता के सारे सद्गुणों को,
    क्षमा दया तप त्याग अहिंसा और करुणा!

    हिन्दुत्व एक गुण धर्म है उन सारे प्राणी के
    जो आसेतु हिमालय से हिन्द महासागर तक
    सनातन काल से अद्यतन तक घर वास करे,
    ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ की बात करे!

    हिन्दू वही जो हिंसा को दूषित भावना समझे,
    हिन्दू वो जो मानते सभी पूजा पद्धतियों को,
    हिन्दू वही जो अपने धार्मिक रीति रिवाज का,
    हमेशा आकलन कर लगातार भूल सुधार करे!

    वो वैदिक हिन्दुओं की सुधार प्रवृत्ति ही थी,
    जिससे जैन-बौद्ध-सिख मत-परम्परा चली,
    हिन्दू ही हैं जो जीव-जंतुओं की रक्षा करते,
    गौ-हाथी-बंदर-मोर-गिद्ध-मीन-बक आदि को
    पवित्र और टोटमी जीव-जंतु मानकर पूजते!

    वे हिन्दू औ हिन्दुत्व हैं जिनके ॐ कार महामंत्र हो,
    जिनके वेद-पुराण-गीता-रामायण-पंचमवेद धर्मग्रंथ हो,
    जो मृत्यु के बाद जिंदगी और पुनर्जन्म विश्वासी हो,
    जो सब जीवों को मनुष्य का पुनर्जन्म समझते हों!

    राम कथा में ऋक्ष बंदर को देव अंशी कहे गए,
    बुद्ध ने स्वीकार किया वे पूर्व जन्म में पशु थे,
    राम कृष्ण बुद्ध महावीर सभी जीवों के रक्षी थे,
    कृष्ण गौ मोर कबूतर खरगोश गिलहरी प्रेमी थे,
    गुरु गोबिंदसिंह बाज तिराते कलगी बाजांवाले थे,
    हिन्दुत्व को समझो जिसमें सत्य-अहिंसा-दया है!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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