संघ के मोदी पर हाथ रखने से मचेगा भाजपा में घमासान

तेजवानी गिरधर

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिल्ली की ओर कूच करने का इशारा करने से भाजपा में पहले से चल रहे घमासान के बढऩे की आशंका तेज हो गई है। हालांकि प्रधानमंत्री पद के अन्य दावेदारों ने फिलवक्त चुप्पी साध रखी है, मगर समझा जाता है कि वे भी नया गणित बैठाने की जुगत करेंगे। पूर्व में पीएम इन वेटिंग रह चुके लाल कृष्ण आडवाणी के खासमखास पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने तो आडवाणी की खुल कर पैरवी कर दी है। उनका यह कहना कि वरिष्ठतम आडवाणी जी के रहते किसी और की दावेदारी का तो कोई मतलब ही नहीं है, यूं ही उड़ाने लायक नहीं है। जिन्ना के बारे में विवादित पुस्तक लिखने के कारण पूर्व में पार्टी से बाहर किए जा चुके जसवंत की हैसियत भले ही संघ के सामने कुछ नहीं हो, मगर उनका ठीक इसी मौके पर बोलना यह साबित करता है कि पार्टी का एक धड़ा अब भी निपटाए जा चुके आडवाणी में फिर जान फूंकने की कोशिश कर रहा है। समझा जाता है कि संघ की ओर से मोदी को प्रोजेक्ट करने को अन्य दावेदार भी आसानी से पचाने वाले नहीं हैं।

असल में कांग्रेस सरकार की लगभग तय सी विदाई से उत्साहित भाजपा में पहले से ही पीएम वेटिंग को लेकर खींचतान चल रही थी। लोकसभा में विपक्ष की नेता श्रीमती सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली तो अपनी मौजूदा भूमिका के कारण प्रबल दावेदार माने ही जा रहे थे। उधर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी गुजरात दंगों से जुड़े एक मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देश को अपनी जीत के रूप में प्रचारित कर तीन दिवसीय उपवास किया, जिसे इस रूप में लिया गया कि वे भी दावेदारी कर रहे हैं। रहा सवाल पूर्व में पीएम इन वेटिंग रह चुके आडवाणी का तो उन्होंने भी रथयात्रा के जरिए जता दिया था कि उन्हें खारिज बम न माने जाए। उनके दावे को बल इस कारण भी मिला कि रथ यात्रा के पूरी तरह से निजी फैसले पर भी पार्टी ने मोहर लगा दी थी। हालांकि औपचारिक बयान देते हुए पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने स्पष्ट करने की कोशिश की थी कि इसका मकसद उन्हें दावेदार के रूप में स्थापित करना नहीं है। गाहे बगाहे पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह का नाम भी उछलता रहता है। कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि पार्टी अध्यक्ष गडकरी भी गुपचुप तैयारी कर रहे हैं। वे लोकसभा चुनाव नागपुर से लडऩा चाहते हैं और मौका पडऩे पर खुल कर दावा पेश कर देंगे। कुल मिला कर यह स्पष्ट है कि भाजपा में एकाधिक दावेदार हैं। इस स्थिति को भले ही पार्टी अपनी संपन्नता करार दे कर विवाद को ढंकने का प्रयास करे, लेकिन यही उसके लिए सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है

ताजा प्रकरण की विवेचना करें तो मोदी को दावेदार बताने की पहल खुद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने ही की। हालांकि साथ ही वे यह भी कहते रहे कि सुषमा व जेतली भी प्रधानमंत्री पद के योग्य हैं। उनकी इस प्रकार की बयानबाजी से पार्टी में भारी असमंजस पैदा हो रहा था। मगर अब जब कि पार्टी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम साफ तौर पर उछाल दिया है। दरअसल पहले टाइम पत्रिका में नरेन्द्र मोदी को विकास पुरुष बताने और अब गुलबर्गा सोसायटी में एसआईटी द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के बाद संघ कुछ ज्यादा ही उत्साहित है। पांचजन्य ने तो साफ तौर पर कहा है कि नरेन्द्र मोदी को प्रदेश के नहीं बल्कि देश के नेतृत्व पर सोचना चाहिए। यूं पिछले दिनों नागपुर में हुई संघ की महाबैठक में भी मोदी का नाम आया था, मगर बात सिरे तक नहीं पहुंची। मगर जैसे ही एसआईटी ने मोदी को बेदाग घोषित कर दिया, संघ के मुखपत्र ने तुरंत मौका लपक लिया। यानि कि संघ पार्टी को कठपुतली की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। मगर धरातल के राजनीतिक समीकरणों व मजबूरियों को समझने वाली पार्टी इससे बड़े भारी पशोपेश में पड़ जाएगी कि वह अपना चेहरा पूरी तरह से हिंदूवादी कैसे कर दे? विशेष रूप से प्रधानमंत्री पद के अन्य दावेदार, जो कि यही चाहते रहे कि मोदी पर कट्टर हिंदूवादी लेबल लगा रहे, मगर एसआईटी की ओर से मोदी को क्लीन चिट दिए जाने पर संघ के नए दाव के बाद उनको सांप सूंघ गया है।

पार्टी से अलग हट कर विचार करें तो भी यह लगता है कि मोदी दिल्ली के कुछ और नजदीक पहुंच गए हैं। वजह ये है कि पहले जहां कांग्रेस मोदी को कसाई बता कर उनके खिलाफ अभियान छेड़े हुई थी, अब उसकी बोलती बंद हो गई है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी को अब मोदी को मौत का सौदागर कहने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा।

जहां तक मीडिया का सवाल है, वह भी भाजपा की ओर से मोदी को दावेदार मानने लगा है। टाइम पत्रिका की ओर से आगामी भिडंत राहुल व मोदी के बीच होने की संभावना जताए जाने के बाद हुए एक सर्वे में यह रुझान आया कि प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी को 24 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को केवल 17 प्रतिशत लोग ही चाहते हैं। उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद तो राहुल का ग्राफ और भी गिरा है। ऐसे में मोदी को क्लीन चिट मिलने पर संघ ने तुरंत उनको दौड़ में सबसे आगे ला खड़ा करने की कोशिश की है। उनको राष्ट्रीय स्तर पर मान्य बनाने के लिए गुजरात में हुए विकास को गिना कर उन्हें विकास पुरुष स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि धरातल का एक सच ये भी है कि भले ही टाइम पत्रिका उनको अपने मुख पत्र पर छापे और एसआईटी उन्हें क्लीन चिट दे दे, पार्टी का एक धड़ा यह जानता है कि आम जनता में उनकी छवि इतनी सुधर नहीं पाई है, जितनी कि जताई जा रही है। आज भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस कथन को गिनाया जाता है, जिसमें मोदी के राजधर्म पर चलने को कहा गया था। बहरहाल देखते हैं कि संघ के इस नए पैंतरे के क्या परिणमा निकलते हैं।

18 thoughts on “संघ के मोदी पर हाथ रखने से मचेगा भाजपा में घमासान

  1. मोदी जी भाजपा और संघ से उपर एक एसे नेता है जो की प्रधान मंत्री बनकर देश को सही दिशा दे सकते है |यह उन्होने गुजरात में साबित कर दिया है|

  2. गिरधर जी–
    (१)
    आपके पास जो प्रमाणित हो चुके हो, ऐसे जो भी तथ्य है, गुजरात (नरेन्द्र मोदी) की अवनति के विषय में, क्या आप उन्हें प्रकाशित करेंगे?
    सन्देह पर्याप्त नहीं।
    कुछ भ्रष्टाचार, कुछ चारित्रीक न्यूनता, कुछ अक्षमता, इत्यादि। ऐसा करने से, सभी पाठक लाभान्वित होंगे, और देश गलत दिशा में आगे बढने से बच जाएगा।
    और, यह आपका एक लेखक के नाते परम कर्तव्य (बौन्डेन ड्युटी) भी है।
    (२)
    लेखक से लेख लिखते समय तटस्थता की अपेक्षा होती है।वयक्तिक मत को (लॉजिकलि) प्रमाणित करना आवश्यक होता है। लॉजीक (तर्क) दीजिए, ऑपिनियन नहीं।
    वयक्तिक मत आप, अपने जनतान्त्रिक अधिकार से, अपने पास रख सकते हैं।
    पर आप लेखक है, इस लिए दूसरों को लॉजीक दीजिए।
    (३)
    और, कुछ आचार संहिता तो होगी, ना?
    या लेखक की कोई आचार संहिता नहीं है?
    अन्तमें,
    क्या बिन्दुवार उत्तर की अपेक्षा कर सकते हैं?

    1. मैं आपका सम्मान करता हूं, आपकी भाषा शैली से प्रतीत होता है कि आप वाकई बुद्धिजीवी हैं, मगर शब्दों की सुंदरता मेरे आलेख की समालोचना करने को पर्याप्त नहीं है, यदि आपको ये मेरे निजी विचार प्रतीत होते हैं तो उसका कोई उपचार नहीं है

  3. आ.गिरधरजी, आपका यह कहना कि संघ भाजपा को कठपुतली कि तरह नचाता है..ठीक नहीं है | पुत्र हो या मानसपुत्र….परिवार की विरासत को हर हाल में….सही मायनों सम्भाल कर चले, ऐसी अपेक्षा रखना…ऐसी सीख देना…क्या गलत बात है ?

    1. बेशक आप ठीक ही कह रहे हैं, मगर इसी वजह से भाजपा को राजनीति के क्षेत्र में दिक्कतों का सामना करना पडता है

  4. अभी अभी बाजपायी जी ने नरेंद्र भाई ने राज धर्म निर्वाह किया था, इस अर्थका विधान किया है| उसका सत्यापन किया जाना चाहिए|
    और यदि सच हो, तो लेखक से अनुरोध कि उस प्रकार का सुधार टिपण्णी द्वारा दर्शाएँ|

  5. जो चढ़ता है… उसे ही… खींचने की कोशिश होती है.. जो पहले ही ज़मीं पर है… उसे कौन खींचेगा….

    नरेन्द्र मोदी जी उंचाईया छू रहे हैं.. उनका काम इसका गवाह है..

    1. बेशक मोदी ने काम तो किया है, मगर जितनी ख्याति हो रही है, वह केवल और केवल मीडिया मैनेजमेंट है, धरातल पर जा कर देखिए कि मोदी के बारे में क्या धारण है, आप मुझे तब तक याद रखना, जब कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के लोग ही उन्हें हरवा देंगे, ताकि उनका ग्राफ नीचा आ जाए, मेरी बात को याद रखिएगा

  6. श्री तेजवानी जी डॉ. मनमोहन सिंह तो सिर्फ 2 व्यक्ती से गठीत परिवार द्वारा मनोनित प्रधानमंत्री है. उनके बारे मे क्या जनतांत्रिक राय है. देश मे कुछ भी हो केन्द्रीय मंत्री कितना भी घोटाला करे प्र.मंत्री कोई जवाब नहीं देते ना ही कोई जिम्मेदारी लेते.मनमोहन सिंह जी कि जिम्मेदारी यही है की वो जवाब देते है तो सिर्फ सोनिया माता और राहुल बाबा को. ये क्या है?

  7. यह जनतान्त्रिक प्रक्रिया है.
    होनी भी चाहिए.
    परिवारवादी संस्था थोड़े ही है?

    1. आदरणीय डाक्टर मधुसूदन जी, संघ भाजपा को कठपुतली की तरह नचाता है और आप उसे जनतांत्रिक कारार दे रहे है, अफसोस

      1. गिरधर जी, जहाँ तक मेरा मानना है भाजपा संघ के सद्कर्मो की वजह से ही ऐश काट रही है..

      2. बंधू गिरिधर जी,
        संघ संस्था है, सोनिया की भांति व्यक्ति नहीं|
        फिर मोहन भागवत जी का कोई स्वार्थ मुझे दिखाई नहीं देता|
        (१) जैसे चाणक्य ने राष्ट्र हित में, चन्द्रगुप्त को प्रोत्साहित किया,
        (२) जैसे गुरु रामदास ने भी देश हित में, शिवाजी को दिग्दर्शन दिया,
        (३) जैसे कृष्ण ने पांडवों को न्याय्य अधिकार प्रप्ति हेतु मार्गदर्शन दिया,
        ====>बस वैसे ही संघ राष्ट्रहित में भाजपा को संकेत ही तो दे रहा है|
        कृष्ण का, गुरु रामदास का, या चाणक्य का कोई स्वार्थ नहीं था|
        संघ के लिए, राष्ट्र हित सर्वोपरि है, नरेंद्र मोदी गौण है| संघ का कर्तव्य है, की ऐसा संकेत देश हित में देता रहे, निस्वार्थ होकर|
        वास्तव में कथित घमासान ऐसी उक्ति से ठंडा भी तो हो सकता है|
        संघ ऋषि सत्ता की भूमिका निर्वाह कर रहा है| इस प्रकार का ढांचा जिसमे भागवत जी का कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं, राष्ट्र हित में आवश्यक मानता हूँ|
        आप समय लेकर दीनदयाल उपाध्याय जी का एकात्म मानव वाद अवलोकन करें, अधिक स्पष्टता के लिए|
        संक्षेप में इतना ही|

        1. आपकी प्रतिक्रिया पढ कर बहुत अच्छा लगा, आप वाकई अच्चे विचाराक हैं, संघ बहुत अच्छा संगठन है, देश हित की बात ही सोचता है, मगर इसका अर्थ ये नहीं कि बाकी सभी देश हित के खिलाफ हैं, दूसरा ये कि संघ का वास्तविक लक्ष्य देश को हिंदू देश के रूप में स्थापित करना है, वह हमारे संविधान के तहत संभव है नहीं, दुर्भाग्य से

  8. कोन PM बनेगा अभी से कुछ कह पाना बहुत ही मुश्किल है … भाजपा में नेतृत्व की कमी है, अगर समय रहते ये लोग सुलह नही करते है तो कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकार नही बना पाएंगे और तीसरे मोर्चे को मौका मिल सकता है

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