विकास का दीपक जलता रहे,मेरे इस देश में |

1
168

विकास का दीपक जलता रहे,मेरे इस देश में |
घर घर दीवाली मने,हर क्षेत्र और हर वेश में ||

न की ज्योति जलते रहे,कोई भी अछूता न रहे |
हर बालक को शिक्षा मिले,कोई भी अनपढ़ ने रहे ||

स्वच्छ भारत हम बनाये,कही भी हम गंदगी न करे |
स्वच्छ हवा स्वच्छ जल,सबको मिले ऐसा प्रयत्न करे ||

इस दिवाली पर प्रण करे,कही भी प्रदुषण न फैलाये |
जो रूठ गये है हमसे,उनको दिवाली पर गले लगाये ||

पोलिथीन से मुक्त हो देश,इसका हम सब बायकाट करे |
खाये कसम इस दिवाली पर,कोई इसका उपयोग न करे ||

करे विदेशी सामान का बायकाट,इसकी खरीदारी न करे |
हर हाथ को रोजगार मिले,हम ऐसी देश में व्यस्था करे ||

कोई भी भूखा न सोये,गरीबी का उन्मूलन करे देश में |
विकास का दीपक जलता रहे,इस हमारे भारत देश में ||

आर के रस्तोगी

Previous articleकरवा चौथ
Next article“बढ़ती जनसंख्या” एक अभिशाप
आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here