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    Homeसाहित्‍यकवितासत्याग्रह का अस्त्र

    सत्याग्रह का अस्त्र

    uttrakandमौसम प्रतिकूल

    टूट गयी सड़कें

    बह गया पुल

    आम जनता है पस्त

    अधिकांश नेता – अधिकारी

    अपने में मस्त

    दिखने में सब भद्र

    पर सवाल वही

    कहाँ है पीड़ितों – गरीबों का

    सही हमदर्द

    बड़ा हादसा हो जाता है जब

    आते है अपनी सुविधा से

    सफेदपोश सारे

    जहाज और गाड़ियों में

    लदकर , लकदक

    सहानुभूति जताने

    घड़ियाली आंसू बहाने

    अखबार और टीवी के लिए

    फोटो खिचवाने

    समाचार छपवाने

    गहराता जा रहा है

    राजनीति व प्रशासन में यह चलन

    जनता का निरंतर

    हो रहा दोहन व दमन

    जागृत समाज सत्याग्रह का अस्त्र

    फिर उठाएगा जब

    आम जन की हालत

    अच्छी होगी तब !

     

    मिलन सिन्हा
    मिलन सिन्हाhttps://editor@pravakta
    स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

    2 COMMENTS

    1. कौन करे,यहाँ तो पूरे कुँए में ही भंग पड गयी है.गाँधी भी बेचारे बार बार क्यों आयेंगे,एक बार आ कर उन्होंने भी देख लिया,उनका भी राजनितिक व्यापार होने लगा,टेस्ट के लिए उन्होंने जॆ पी,अन्ना को भेज कर देखा ,उनकी दुर्गति होते देख वे भी आने से कतराते हैं सत्याग्रह कौन करेगा.

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