लेखक परिचय

दिवस दिनेश गौड़

दिवस दिनेश गौड़

पेशे से अभियंता दिनेशजी देश व समाज की समस्‍याओं पर महत्‍वपूर्ण टिप्‍पणी करते रहते हैं।

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 दिवस दिनेश गौड़

मित्रों हिना रब्बानी अब अपनी भारत यात्रा पूरी कर फिर से अपने देश पापी पाकिस्तान चली गयी है| अब तक इस विषय में कई जगह बहुत कुछ लिखा भी जा चूका है|

जिस तरह से उसे मीडिया में दिखाया जा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे हिना रब्बानी न हुई स्वर्ग की कोई अप्सरा हो गयी| कोई उसके पर्स पर कैमरा फोकस कर रहा है, तो कोई सैंडल पर| और तो और बैकग्राउंड में गाना चल रहा था ”एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा”

यहाँ तक कि हमारे माननीय(?) नेतागण भी ऐसे दीवाने हुए मानों पाकिस्तानी दूत न होकर कोई देवदूत स्वर्ग से उतर कर आया हो| हाथ मिलाने लगे तो हाथ छोड़ने का मन ही नहीं हुआ|

समझ नहीं आता किस देश से दोस्ती की वार्ता की जा रही है| उस देश से जो नफरत के कारण हमसे टूट कर अलग हुआ है? उस देश से जो अपने जन्म के समय से आतंकवाद के ज़रिये हमे परेशान करता रहा है? उस देश से जो हमारे हज़ारों लाखों भाई बहनों के हत्यारा है? उस देश से जो हमारी एकता को खंड खंड कर देने के सपने देखता है? उस देश से जितने वर्षों से हमारे सुन्दर कश्मीर को खून से लाल कर रहा है?

अभी १३ जुलाई को मुंबई में हुए आतंकी हमले को दो हफ्ते भी नहीं बीते थे कि हमारे नेता व मीडिया पाकिस्तानी विदेश मंत्री की चाटुकारी में लग गए| अब इस बात से ही इनकार हो कि वह आतंकी हमला पाकिस्तानी आतंकवाद ने करवाया हो तो बात अलग है| इसमें भी शायद इन सेक्युलरों को आर एस एस या हिन्दू आतंकवाद (?) का हाथ नज़र आए| वैसे दिग्गी ने तो इसकी भी संभावना दे ही दी थी|

भाई ऐसा भी क्या प्यार इस पापी पाकिस्तान से कि ठीक कारगिल विजय की वर्षगाँठ वाले दिन ही यह नंगा नाच शुरू कर दिया? ये तो सीधा सीधा सोच पर वार है| सीधा सीधा कारगिल विजय का अपमान है|

जिस समय हमारे नपुंसक नेता हिना रब्बानी की आवभगत में लगे थे ठीक उसी समय पाकिस्तानी आतंकियों ने दो भारतीय सैनिकों की निर्मम हत्या कर उनके सर धड से अलग कर अपने साथ पाकिस्तान ले गए, मानों जीत की ट्रॉफी ले कर गए हों| भांड मीडिया को हिना रब्बानी से फुर्सत मिलती तब तो इस खबर के बारे में चार पंक्तियाँ कहता| यहाँ तक कि हमारी आतंकी सरकार को भी फुर्सत के कुछ क्षण मिले होते तब तो इस घृणित कार्à �¯ के लिए आतंकियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही करती| किन्तु हाय रे हिना रब्बानी, तेरी सुन्दरता ने इन्हें ऐसा मोह लिया कि तेरे आने का षड्यंत्र भी न समझ पाए|

ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने विदेश मंत्री न भेज कर कोई आइटम गर्ल भेज दी, और हमारे नेता व मीडिया उसके जलवों में खो कर रह गए| पीछे से पाकिस्तान ने अपनी गंदी चालें चलनी शुरू कर दीं| हिना रब्बानी के भारत आने का जो कुचक्र था वह उसने सिद्ध कर दिया| पाकिस्तान पहुँच कर उसने तो भारत के लिए वही पुराना जहर उगलना शुरू कर दिया जो इसका पापी देश पिछले ६४ वर्षों से उगलता आया है|

काहे की दोस्ती???

ऐसी शान्ति से हमें तो कोई प्रेम नहीं है|

कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा के समीप भारतीय सेना व पाकिस्तानी आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में आतंकियों ने यह घटिया काम किया| मरने वाले दोनों जवान कुमाऊं रेजिमेंट के थे| शहीदों की पहचान हवालदार जयपाल सिंह अधिकारी व लांस नायक देवेन्द्र सिंह के रूप में की गयी है| इसके साथ ही पैट्रोलिंग पार्टी का 19 राजपूत रेजिमेंट का एक अन्य जवान भी शहीद हुआ है|

शहीद हुए जवानों के शव इतने बुरी हालत में थे कि परिज़नों को उनके शवों को देखने की आज्ञा भी नहीं दी गयी|

ऐसी घटनाओं से सेना के जवानों का मनोबल टूट रहा है जो कश्मीर घाटी में आतंकियों से लोहा लेने के लिए प्रतिक्षण मुस्तैद हैं| ऊपर से सरकार का किसी प्रकार का कोई सहयोग न मिलना आग में घी का काम कर रहा है| क्या इन वीरों को वहाँ कुत्ते की मौत मरने के लिए ही छोड़ रखा है?

ऐसी परिस्थिति में यदि सेना भी बगावत कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं| इसकी जिम्मेदार सेना नहीं, यही भ्रष्ट सरकार होगी जो आतंकियों के साथ मिलकर हमारे जवानों की बलि चढ़ा रही है|

फिर भी पता नहीं देश में यह कैसी शान्ति छाई है? मानों जो कुछ भी हो रहा है, इससे किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा| आज सुबह से ही पता नहीं कितने ही मुर्ख मुझे यहाँ वहां Friendship Day की बधाइयां दे रहे हैं| अब ऐसे लोगों से मित्रता करने के निर्णय पर भी विचार करना पड़ रहा है|

2 Responses to “किसका महत्व अधिक है, हिना रब्बानी का या भारतीय सेना के जवानों का???”

  1. santosh kumar

    दिनेश जी .सत्ता लोलुपता क्या कराती है ,.यह मार्मिक घटना ज्वलंत उदहारण है ,…जिसको चमाचम मीडिया ने दिखने की हिम्मत नहीं की ,…देश को अपने वीर जवानों पर गर्व है ,…वन्देमातरम

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  2. BK Sinha

    दिनेश जी! परेशान मत होइये! अभी एक सेना ही बची है, जिसका मनोबल यथावत है और रहेगा भी। अभी उसमें राजनैतिक घुसपैठ उतनी नहीं हुई है! पाकिस्तान चाहे एक नहीं सैकड़ों हिना रब्बानी भेजे, मौका मिलने पर सेना सबक सीखा ही देगी। इस देश में अभी ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिन्हें अपने भारत और अपनी सेना से बेपनाह मुहब्बत है। हमें अपनी महान सेना पर गर्व है।

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