लेखक परिचय

डा. अरविन्द कुमार सिंह

डा. अरविन्द कुमार सिंह

उदय प्रताप कालेज, वाराणसी में , 1991 से भूगोल प्रवक्ता के पद पर अद्यतन कार्यरत। 1995 में नेशनल कैडेट कोर में कमीशन। मेजर रैंक से 2012 में अवकाशप्राप्त। 2002 एवं 2003 में एनसीसी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित। 2006 में उत्तर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ एनसीसी अधिकारी के रूप में पुरस्कृत। विभिन्न प्रत्रपत्रिकाओं में समसामयिक लेखन। आकाशवाणी वाराणसी में रेडियोवार्ताकार।

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-डॉ. अरविंद कुमार सिंह-  new_media_723112687

प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का एक सच। चलिये एक छोटे से सवाल से लेख की शुरूआत करता हूं। यदि सम्पूर्ण प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का प्रसारण एवं प्रकाशन बन्द कर दिया जाय तो हम राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की घटनाओं तथा राजनेताओं के बारे में कितना जान पाते ? राहुल गांधी, अरविन्द केजरीवाल तथा नरेन्द्र मोदी के बारे में हम कितना जानते ? हमारी विचारधारायें सूचना के आभाव में कितनी धारदार हो पाती?

हिन्दी में हमने कभी एक कहावत पढ़ी थी – एकै साधै सब सधे, सब साधे सब जाय। आज की तारीख में प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस कहावत पर खरी उतर रही है। हम वो नहीं जानते, जो हम जानना चाहते हैं। हम वो जानते हैं जो मीडिया हमें जनाना चाहती है। आप मनोहर परिकर के बारे में नहीं जानते, हां अरविन्द केजरीवाल के बारे में आप विस्तार से जानते हैं। आप गोधरा काण्ड के बारे में कम जानते हैं पर गुजरात दंगे के बारे में काफी विस्तार से जानते होंगे। कहते हैं जब गोधरा काण्ड हुआ तो दो दिनों तक देश के राजनेताओं के कण्ठ से आवाज नहीं निकली। जब इसकी प्रतिक्रिया शुरू हुयी तो राजनेताओं का कण्ठ ऐसा खुला की आज तक बन्द होने का नाम ही नहीं ले रहा है। यदि गुजरात दंगा गलत था तो गोधरा उससे भी गलत था। गोधरा की भर्त्सना इतनी ज्यादा होनी चाहिये थी कि दोबारा कोर्इ गुजरात दंगा देश में न होने पाये, पर हुआ ठीक उल्टा। गोधरा पर चर्चा इसलिये नहीं हुयी, क्योकि प्रत्येक दल को एक समुदाय विशेष का वोट खिसक जाने का डर था। जब समस्या पर चोट हमारे हितों को प्रभवित करता हो तो हमें समस्या के समाधानकर्ता पर सन्देह होता है।

आर्इये थोड़ा सा नजर डालें देश के प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर। एक ऐसी वास्तविकता जिस पर शायद कोर्इ प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया न तो बहस करा सकता है और ना ही समाचार लिख सकता है। आर्इये देखने का प्रयास करें आखिर कहां से देश की धड़कनों को कन्ट्रोल किया जा रहा है। चलते हैं जरा परदे के पीछे और देखते हैं उन मीडिया के चमकते चेहरों को जिनका मेकप एवं स्क्रिप्ट कोर्इ और लिखता है।

बात की शुरूआत गुजरात चुनाव से। गुजरात चुनाव के दौरान इस बात की तस्दीक हो चुकी है कि गैर-जिम्मेदाराना तरीके से प्रिन्ट एव इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मियों को सउदी अरब से मोदी एवं हिन्दूत्तववादी ताकतों को बदनाम करने के लिये धन मुहैया कराया गया, ये दीगर बात है कि वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हुये। हिन्दूस्तान में आज की तारीख में कर्इ नामचीन प्रकाशन समूह है जिनमें खास तौर से टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, द हिन्दुस्तान टाइम्स, हिन्दू ग्रुप, आनन्द बाजार पत्रिका, एनाडू ग्रुप, मलयालम मनोरमा ग्रुप, मातृभूमि ग्रुप, सहारा ग्रुप हैं। आइये जरा इन प्रकाशन ग्रुप समूहों के मालिकाना सिथति को देखें।

एनडीटीवी एक बहुत ही मशहूर टीवी चैनल है जिसकी मदद स्पेन के द्वारा हो रही है। हाल ही में इस चैनल के माध्यम से पाकिस्तान के प्रति नर्मी का रूख देखा जा सकता है। कारण स्पष्ट है पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने इस चैनल को पाकिस्तान के आबो हवा में फलने-फूलने का मौका दे दिया है। इस सिलसिले में यह बताना भी उचित है कि भारतीय सीओ प्रणव राव प्रकाश करात के साथ भातृत्व का रिश्ता निभा रहे हैं जो भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी के महासचिव हैं, उनकी पत्नी वृंदा करात बहन की भूमिका में है।

इंडिया टूडे , जो भारत की राष्ट्रीय साप्ताहिकी हुआ करती है जिसे बीजेपी का समथर्क माना जाता है, एनडीटीवी के द्वारा खरीदी जा चुकी है। आज की तारीख में उसके नजरिये में हिन्दुत्व के प्रति आमूल-चूल परिवर्तन हो चुका है।

सीएनएन -आर्इबीएन। इस चैनल की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता इसार्इ मिशीनरी द्वारा संचालित होती है। इसकी तमाम शाखायें पूरी दुनिया में फैली हुयी हैं तथा मुख्यालय अमेरिका में है। इसार्इ मिशीनरी तकरीबन आठ सौ मिलयन डॉलर वार्षिक रूप से इसके विकास के लिये धनराशि आवंटित करती है। इसके भारतीय मुखिया राजदीप सरदेसार्इ और उनकी पत्नी सगारिका घोष है।

टाइम्स ग्रुप का परिवार काफी बड़ा है। इस परिवार में टाइम्स ऑफ इंडिया, मीड-डे, नवभारत टाइम्स, स्टारडस्ट, फेमिना, विजय टाइम्स, विजय कर्नाटका, टाइम्स नाउ ( 24 घण्टे न्यूज चैनल ) और भी बहुत से शामिल हैं। टाइम्स समूह का संचालन बैनेट एवं कोलमैन द्वारा होता है। इसके भी पीछे र्इसाइ मिशिनरी कार्यरत है जो तकरीबन 80 प्रतिशत इसकी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। इतना ही नहीं, बाकी का बीस प्रतिशत एक अंग्रेज तथा एक इटली निवासी बराबर का वहन करते हैं। इटली का यह मददगार रोबेरटो मिन्डो सोनिया गांधी का करीबी है।

स्टार टीवी का संचालन ऑस्ट्रिया से होता है जिसके पीछे एक बार पुन: मदद का हाथ र्इसाइयत का है। जहां तक हिन्दुस्तान टाइम्स का सवाल है तो इसके पीछे बिरला समूह है। हलांकि जब से शोभना भारतीय ने इसका कार्यभार सम्भाला है तब से यह चैनल टाइम्स ग्रुप के सहयोग के साथ कार्य करता हुआ देखा जा सकता है। द हिन्दू अंग्रेजी दैनिक तकरीबन सवा सौ साल पहले अपने अस्तित्व में आया। लेकिन हाल ही में उसे जोशुआ समाज द्वारा अधिगृहित कर लिया गया।

इंडियन एक्सप्रेस। यह समाचार पत्र भी दो समूहों में विभक्त है। द इंडियन एक्सप्रेस तथा न्यू इंडियन एक्सप्रेस। इसके पीछे भी र्इसाइ मिशिनरियां ही हैं। इनाडू तथा एक भारतीय व्यक्तित्व रामूजी राव जो फिल्मी दुनिया और स्टूडियोज के संसार में दखल रखते हैं, उनके द्वारा यह संचालित है।

आन्ध्र ज्येाति – इसके बारे में हकीकत ये है कि हैदराबाद की मुस्लिम पार्टी एमआर्इएम जो कि एक कांग्रेसी मंत्री के साथ अच्छे रिश्तों को रखती है, के द्वारा यह तेलगू दैनिक खरीदा जा चुका है।

द स्टेटमैन – कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के द्वारा संचालित हो रहा है। मातृभूमि के पीछे मुस्लीम लीग एवं कम्यूनिस्ट नेताओं का हाथ है। एनडीटीवी के लिये काम करने वाले राजदीप सरदेसार्इ तथा बरखा दत्त उस समय ( गुजरात दंगे ) के मुस्लिम हताहतों को प्रचारित एवं प्रसारित करने के लिये सउदी अरब से एक अच्छी खासी रकम प्राप्त किये।

तत्कालीन समय यह भी खुलासा हुआ कि नामी गिरामी सम्पादक तरूण तेजपाल जो आज की तारीख में जेल की सलाखों के पीछे हैं, बीजेपी एवं हिन्दुत्व को लक्ष्य बनाने के लिये अरब देशों से मान्यवर के पास धनराशि भेजी जाती थी।

अब तो यह निष्कर्षत: कहा जा सकता है कि भारतीय मीडिया का भारत में संचालन विदेशों के द्वारा हो रहा है और वो कब चाहेंगे इस देश में एक स्थिर और मजबूत सरकार हो।

8 Responses to “कौन है जिसने भारत की पत्रकारिता को कब्जे में ले लिया है”

  1. इक़बाल हिंदुस्तानी

    iqbal hindustani

    मीडिया समूह को विदेश से पैसा मिलने का आपका दवा एक आरोप या प्रचार ही अधिक लगता है क्योंकि आपने अपनी बात के पक्ष me कोइ सबूत तो दिया ही नही ; कम से कम अपनी जानकारी का श्रोत ही बता दीजिये जिसकी विश्वसनीयता को परखा जा सके.

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    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ.मधुसूदन

      इकबाल जी—मुझे किसी ने निम्न जानकारी भेजी थी। इसका स्रोत मुझे पता नहीं है। पर मनगढंत नहीं लगती|
      =============================================================
      Indian Media Ownership Facts

      Ever wondered why the Indian Media often misleads the public on trivial issues?
      QUESTION
      Who owns the media in India ?
      ANSWER
      There are several major publishing groups in India, the most prominent among them being the Times of India Group, the Indian Express Group, the Hindustan Times Group, The Hindu group, the Anandabazar Patrika Group, the Eenadu Group, the Malayalam Manorama Group, the Mathrubhumi group, the Sahara group, the Bhaskar group, and the Dainik Jagran group. Let us see the ownership of these media agencies.

      NDTV: A very popular TV news media is funded by the Gospels of Charity in Spain which supports Communism. Recently it has developed a soft corner towards Pakistan because the Ex-President Musharraf had allowed only this channel to be aired in Pakistan. Indian Division CEO Prannoy Roy is the co-brother of Prakash Karat, General Secretary of Communist Party of India. His wife and Brinda Karat are sisters.

      India Today which used to be the only national weekly who supported BJP is now bought by NDTV and since then the tone has changed drastically and turned into Hindu bashing. No prizes for guessing why.

      CNN-IBN: This is 100 percent funded by Southern Baptist Church with its branches in all over the world with HQ in US. The Church annually allocates $800 million for promotion of its channel. Its Indian heads are Rajdeep Sardesai and his wife Sagarika Ghosh.

      Times group list: Times Of India, Mid-Day, Nav-Bharth Times, Stardust , Femina, Vijaya Times, Vijaya Karnataka, Times now (24- hour news channel) and many more. Times Group is owned by Bennet & Coleman. ‘World Christian Council‘ does 80 percent of the Funding, and an Englishman and an Italian equally share balance 20 percent. The Italian Robertio Mindo is a close relative of Sonia Gandhi.

      Star TV: It is run by an Australian, who is supported by St. Peters Pontificial Church, Melbourne.

      Hindustan Times: Owned by Birla Group, but hands have changed since Shobana Bhartiya took over. Presently it is working in Collobration with Times Group (refer above).

      The Hindu: English daily, started over 125 years has been recently taken over by Joshua Society, Berne, Switzerland. N.Ram’s wife is a Swiss national.

      Indian Express: Divided into two groups:The Indian Express and The New Indian Express (southern edition): ACTS Christian Ministries have major stake in the Indian Express and later is still with the Indian counterpart.

      Eeenadu: Still to date controlled by an Indian named Ramoji Rao. Ramoji Rao is connected with film industry and owns a huge studio in Andhra Pradesh .

      Andhra Jyothi: The Muslim Party of Hyderabad known as MIM along with a Congress Minister has purchased this Telugu daily very recently.

      The Statesman: It is controlled by the Communist Party of India.

      Kairali TV: It is controlled by the Communist Party of India (Marxist)

      Mathrubhoomi: Leaders of Muslim League and Communist Leaders have major investment.

      Asian Age and Deccan Chronicle: Is owned by a Saudi Arabian Company with its chief Editor M.J. Akbar.

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  2. Bipin Kishore Sinha

    इसमें कोई दो राय नहीं कि अपने देश की प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया पर विदेशी राष्ट्रविरोधी शक्तियों का कब्ज़ा है. अरविंदजी ने इसे सिद्ध भी किया है. इनका बहिष्कार ही एकमात्र समाधान है. न्यू मिडिया या सोसल मिडिया विकल्प के रूप में उभर रही है और उसपर राष्ट्रवादियों की पकड़ भी मज़बूत हो रही है. वास्तविकता और जनता की आवाज़ को नज़रअंदाज़ करने वाली मिडिया अपने आप अपनी दुर्गति को प्राप्त हो जायेगी. आज हम इनके मुंहताज नहीं हैं. इनके बिना भी हम -आप अपने विचारों और लेखों का आदान-प्रदान सफलतापूर्वक कर रहे हैं. इसे और मज़बूत,, व्यापक तथा लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है. चरैवेति, चरैवेति.

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  3. Himwant

    मीडिया का काम हमे सत्य से अवगत कराना नहीं बल्कि हमे सत्य से दूर रखना ही रह गया है. मीडिया एक ऐसे औजार की भांती काम कर रहा है जिससे शक्ति राष्ट्र भारतीयों का दिमाग पर नियन्त्रण करने का काम ले रहे है. माओवादी के पीछे वास्तव में कौन है यह जानना उतना मुश्किल न होता अगर मीडिया न होती, ना ही केजरीवाल एवं माओवादीयों के रिश्तो को समझ पाना मुश्किल होता. आज देश के उच्च पदाधिकारी एवं खुफिया एजेंसिया भी मिडिया से सुचना एकत्र कर उसके आधार पर नीतिया बना रही है. जब की मीडिया के अपने गोरख़धंदे है, वह वही लिखता है जो हमें जनाना चाहता है. इन वास्तविकताओ को उजागर करता है यह लेख. इस विचार को और आगे बढाया जाए. देश में विदेश नियंत्रित मीडिया की इन प्रवृतियों पर अंकुश लगाना आवश्यक है और स्वदेशी चिन्तन वाली मीडिया से लोगो का साक्षात्कार कराना भी परम आवश्यक है.

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  4. DR.S.H.SHARMA

    The media has the strongest influence on all from children to old people, from uneducated to highly learned, from village to cities, poor to the richest, students to educationists, farmers to consumers, acotrs to spectators, where ever you go tv sets are there, mobile phones, lap tops aps you name it people have no time to think properly they are watching and listening whatever is being shown and that is the danger and they follow what they see and they do what they see. So the media is the GURU and the real Guru and in case of Hindusthan it is the FOREIGN GURU so everything Hindusthani is inferior and everything foreign is superior what Macauly could not do the modern media is teaching all the anti India stuff so India is not India any more but India is coconut . We are brown or black outside but wish to be white or European or American inside a most dangerous situation. This way we will lose our identity.
    This can be reversed and it is easy but there must be will power to reverse it and a man to do it.I have the formula and give it at a right time. Jai hind.

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    • इंसान

      मैं आपके विचारों से सहमत होते हुए आपका आदर करता हूँ लेकिन मैं जानना चाहूंगा कि आप अंग्रेजी भाषा में क्यों लिखते हैं?

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  5. डॉ. मधुसूदन

    Dr. Madhusudan

    बहुत उचित विश्लेषण है। इसी प्रकारका विश्लेषण हमारे इतिहास लेखकों का, स्तंभ लेखकों का इत्यादियों का भी होना चाहिए।
    धन्यवाद।

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    • डा. अरविन्द कुमार सिंह

      Dr. Arvind Kumar Singh

      सर जी,
      आपकी हौसलाआफजाइ के लिये धन्यवाद। आपके लेख मैं अक्सर पढता रहता हूं। अपनी संस्कृति के प्रति आपका अनुराग सैल्यूट का हकदार है। कृपया ऐसे ही लिखते रहे। विश्वास जाने लेखनी सार्थक दिशा की तरफ अग्रसर है।
                                                  आपका
                                                 अरविन्द

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