लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

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एक जमाना था जब सोवियत शासन और समाजवाद के प्रभाववश सारी दुनिया में विचारों और सूचनाओं की सेसरशिप खूब होती थी, आए दिन समाजवादी समाजों में साधारण आदमी सूचना और खबरों को तरसता था। संयोग की बात है अथवा सिद्धांत की समस्या है यह कहना मुश्किल है, लेकिन सच यह है कि साम्यवादी विचारकों और कम्युनिस्ट समाज का सूचना और खबरों से बैर चला आ रहा है। आज भी समाजवादी समाजों में सूचना पाना, खबर पाना आसान नहीं हैं। हमें सोचना चाहिए कि आखिरकार साम्यवादी खबर से क्यों डरते हैं? खबरों से डरने वाला समाज कभी भी स्वस्थ समाज का दावा नहीं कर सकता। जिस समाज में खबरें प्राप्त करने के लिए जंग करनी पड़े,वह समाज आर्थिक तौर पर कितनी भी तरक्की कर ले पिछड़ा ही कह लाएगा। यही स्थिति इन दिनों चीन की है।

चीन में कहने को इंटरनेट है लेकिन अबाधित ढ़ंग से सूचनाएं पाना संभव नहीं है। सूचनाओं की खोज करते हुए आप जेल भी जा सकते हैं। पहली दिक्कत तो यह है कि सूचनाओं पर कड़ी साइबर निगरानी है। इसके बावजूद यदि सूचना मिल गयी तो उसे संप्रसारित करना मुश्किल होता है।

उल्लेखनीय है चीन में इंटरनेट यूजर पर देश के अंदर नजर रखी जाती है। आप यदि ऐसी सूचना खोजकर पढ़ रहे हैं जो सेंसर है तो आपको पुलिस दमन का सामना करना पड़ेगा। आप आसानी से देख सकते हैं कि कौन सी साइट, ब्लॉग आदि को सेंसर कर दिया गया है। यहां http://whatblocked.com/ पर देखेंगे तो सारा खेल आसानी से समझ में आ जाएगा। आज की तारीख में फेसबुक, ट्विटर, यू ट्यूब, ट्विटपिक, विकीलीक पर पूरी तरह पाबंदी है। बीबीसी और विकीपीडिया पर आंशिक पाबंदी है। गूगल न्यूज और जीमेल उपलब्ध हैं।

चीन की साइबर नाकेबंदी और नेट सेंसरशिप का परिणाम यह हुआ है कि अब नेट पर ऐसे सरबर आ गए हैं जो वैध नहीं हैं। जिन्हें प्रॉक्सी सरबर कहा जाता है। ये वे सरबर हैं जो चीनी साइबर पुलिस की पकड़ के बाहर हैं और इनका संचालन अमेरिका से ही होता है और संभवतः सीआईए के द्वारा संचालित हैं। ऐसा ही एक सरबर है Haystack । इस सरबर को सीआईए ने ईरान के तथाकथित सत्ताविरोधियों को मुहैय्या कराया था। इसी तरह A VPN, Tor, Steganography आदि सरबर हैं जो प्रचलित सरबरों के विकल्प के रुप में काम कर रहे हैं और इनके जरिए ही प्रतिवादी चीनी जनता सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रही है। शर्त एक ही है कि आपके पास सही साफ्टवेयर होना चाहिए जिससे आप उपरोक्त सरबरों का इस्तेमाल कर सकें।

चीन में व्यापक नेट सेंसरशिप के बावजूद नेट का कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। तकरीबन 30बिलियन डॉलर का 2009 में नेट कंपनियों ने कारोबार किया है। चीन में ज्यादातर लोग नेट पर जीवनशैली और मनोरंजन से संबंधित सूचनाएं प्राप्त करने जाते हैं। अधिकांश जनता की खबरों को खोजने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इंटरनेट के 60 प्रतिशत यूजर 30 साल से कम उम्र के हैं। मॉर्गन स्टेनले में नेट विशेषज्ञ रिचर्डस जी का मानना है कि अमेरिका में अधिकांश यूजर खबरों की तलाश में नेट पर जाते हैं। लेकिन चीन में मनोरंजन की तलाश में जाते हैं। चीन में काम करने वाली नेट कंपनियों की मुश्किल यह है कि उनके पास स्थानीय मदद का अभाव है और सभी नेट कंपनियों को चीन के प्रशासन के साथ गांठ बांधकर काम करना पड़ता है। इसके कारण प्रशासन का राजनीतिक एजेण्डा नेट कंपनी का बिजनेस एजेण्डा बन जाता है।

यही खबर और सूचना की मौत का प्रधान कारण भी है। राजनीतिक दल का एजेण्डा यदि व्यापार और संचार का एजेण्डा बनेगा तो सूचना और खबर की मौत तय है।

-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

2 Responses to “साम्यवादी खबर से क्यों डरते हैं?”

  1. मिहिरभोज

    साम्यवाद के मूल मैं है तानाशाही……और तानाशाह खबरों पर प्रतिबंध ही तो लगा सकते हैं,,,,,

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