कृष्ण ने क्यों कहा मैं शस्त्रधारियों में राम हूं

—विनय कुमार विनायक
कृष्ण ने क्यों कहा
मैं शस्त्रधारियों में राम हूं
इसलिए कि बिना शस्त्र बिखर जाती सत्ता
बुद्ध की अहिंसा ने
अशोक को किया था निहत्था
बुद्ध की अहिंसा ने आमंत्रित किया
विदेशी आक्रांताओं को भारत में
काश कि परवर्ती शासकों ने धम्म के बजाय
गीता को अहमियत दिया होता
तो भारत की स्थिति कुछ अलग होती
शस्त्र धारण से पाशविकता नियंत्रित होती
पशु के पास जन्म से अस्त्र होता
पशु का नियंत्रण कर्ता पशुपति
अस्त्र हीन कैसे हो सकता?
अस्त्र हीन नहीं है पिनाकी आदि देवता
आदमी भी तो जैविक रूप से पशु होता
हिंसा के विभिन्न हथियारों से लैस
अंधेरे सुनसान जगहों में
हिंसक हिंसा का करतब दिखलाता
कहीं नारियों पर कहीं नागरिकों पर
कहीं बलात्कार कहीं हत्या कर
कहीं भीड़ स्वत: हथियार बनकर
किसी की पहचान जानकर
बिना किसी दुश्मनी के अपने पूर्वाग्रह से
निरपराध को पीट पीटकर मार डालता
क्योंकि उसने खास पोशाक पहन रखी होगी
खास तरह से तराशी गई मूंछें होगी
खास तरह की दाढ़ी होगी या नहीं होगी
जो भीड़ को हथियार बनकर अनजाने में
बिना जान पहचान के चुनौती दे रही होगी
और भीड़ आदिम हथियार बनकर
उस निहत्थे आदमी पर टूट पड़ती मार देती
ऐसे में पशुपति को अस्त्र-शस्त्र रखना होता
बिना अस्त्र-शस्त्र धारण किए
शास्त्र के शासन को मानता नहीं कोई
इसलिए कृष्ण ने कहा था
मैं शस्त्रधारियों में राम हूं
बिना शस्त्र के न्याय नहीं कर सकता
कोई न्यायिक कार्यपालिका शास्त्रवेत्ता
विधायिका तत्कालीन या किसी काल की सत्ता
वैसे भारत में अलग किस्म की जड़ता थी
वर्ण जाति के बंद हो जाने रुढ़ हो जाने की
प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई नीचे से ऊपर उठने की
पशु से हीन हो गए निम्न वर्ण जाति के प्राणी
क्रोधी नर के कर में पशु शक्ति परशु आ जाने से
तब राम बनने की संभावना खत्म हो गई थी
कृष्ण कह सकते थे शस्त्रधारियों में परशुराम हूं
किन्तु नहीं, स्वयं को शस्त्रधारियों में राम कहा
क्योंकि परशुराम नाम में परशु प्रतीक पशुबल का
परशुराम में न मातृभक्ति, न रिश्ते से हमदर्दी
मौसेरे अनुजों से घृणा, इष्टपुत्र गणेश से बर्बरता
सिर्फ जातीय अहं, हिंसा से लगाव, भाव तामसी
जबकि राम सर्वगुणी मर्यादित रिश्ते में अनुरक्ति
शक्ति उनके कर में शोभती जिसमें क्षमा प्रवृत्ति
बुद्ध जिन थे उदासीन शक्ति साधना के प्रति
उन्होंने अहिंसा करुणा की बहा दी ऐसी सुरसरि
जिससे भारतीय संस्कृति क्षरित होने लगी थी
अस्त्रहीन शस्त्रहीन निस्पृह निरीह डरी-डरी सी
वर्ण जाति के बंद घेरे में घिर जाने के कारण से
निम्न वर्ण की जातियां थी मरी-मरी अधमरी सी
ऐसे में सर्वगुणसंपन्न राम कृष्ण सा संत सिपाही
साहित्यकार गुरु गोबिंद की शिद्दत से जरूरत थी!
—विनय कुमार विनायक
दुमका, झारखंड-814101.

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