मानव का क्लोन बनाने में क्यों नहीं मिल पा रही सफलता?

—–विनय कुमार विनायक
जरा बताओ तो विज्ञानवेत्ता!
मानव का क्लोन बनाने में क्यों नहीं मिल पा रही सफलता?
क्यों फेल हो जाती जीन-जेनेटिक्स/एक्स-वाई क्रोमोजोम के
सद्-असद् गुण सूत्रों को सटा-हटाकर
एक सा मनोवांछित मानव बनाने की मंशा?

भेड़-बकरी/चूहे-चूजों का क्लोन बनानेवाले जरा बताओ तो विज्ञानवेत्ता!
मानव का क्लोन क्यों नहीं बन पाता? कौन सी समस्या है सृष्टिजेता?

विज्ञान की भाषा में तुमने ही कहा था
‘इतर नहीं है मानव पशुओं से’/’मानव एक सामाजिक पशु है’
‘मानव का विकास बंदर से हुआ है’आदि-आदि
फिर अन्य जीवों सा मानव का क्लोन क्यों नहीं बन पाता?

क्यों नहीं फिर अनेक या एक भी मर्यादावतार राम बना लेते?
सावित्री-सीता-द्रौपदी-दमयन्ती जैसी सती साध्वी
उर्वशी-मेनका-रंभा-घृताचि सी पुरुष मनभावन नारियां
डॉली भेड़ की तरह लैब में क्यों नही उपजा लेते?

सावित्री-दमयन्ती तो चाहिए अमर देव/मरणशील मानवों को भी,
सीता तो चाहिए भगवान राम और शैतान रावण को भी!

यज्ञवेदी से दीप्त हो निकली द्रौपदी तो चाहिए
जुआड़ी धर्मावतार युधिष्ठिर/वृकोदर पवनसुत भीम/
सव्यसाची इन्द्रपुत्र अर्जुन/सुदर्शन देव चिकित्सक अश्विनी कुमार
द्वय नकुल-सहदेव से लेकर अत्याचारी-बलात्कारी-कामुक
दुर्योधन/दु:शासन/जयद्रथ/कीचक को भी!

ऐसे में सुरों-असुरों में/आर्यों-म्लेच्छों में/नर पुंगवों में
ये सर्वमान्य ब्राण्ड की ब्रह्माण्ड सुंदरियां
उर्वशी-मेनका-रंभा—सावित्री-सीता-द्रौपदी-दमयन्ती—
थोक भाव में बनाकर और बांटकर रोक सकते
भूत से चले/वर्तमान में चल रहे/
भविष्य में चलने वाले ढेर सारे सुर-असुर/
देव-दानव/राम-रावण/पाण्डव-कौरव संग्राम
या दहेज-दानव/कन्या भ्रूण-वधू हत्या से पा सकते हो त्राण!

जरा सोचो तो वैज्ञानिको!
मानव का पशुओं सा क्लोन क्यों नहीं बन पाता?
जरा विचारो तो विज्ञानवेत्ता!
परम्परा-संस्कृति/बुद्धि-विवेक/समय-परिस्थिति
मानवों को पशुओं से इतर जीव तो नहीं बनाता?

आज की तिथि में कोई मर्यादावतार राम बनकर
रावण को मार पाएगा सीधे-सीधे क्या?
या कोई बर्वर आक्रांता गजनवी-गोरी-बाबर-गोरा बनकर
कच्छ-कश्मीर से कन्या कुमारी तक सरपट घोड़ा दौड़ाएगा क्या?

आज की तिथि में राजेन्द्र प्रसाद का कोई क्लोन
उस संविधान को मुंहजबानी यादकर कौन सा गुल खिलाएगा?
जिसमें चार सौ चोर दरवाजे एक अदना जाहिल नेता भी
गिना जाता या हर विधान का कोई भी काट बता देता!

प्रयोग तो किए होंगे नन-रीप्रोडक्टिव सोमेटिक परिपक्व
कोशिका केन्द्रक को भ्रूणिकृत कर मानव क्लोन बनाने का!

बना भी होगा हू बहू कार्बन कापी सेल डोनर जैसा
उतने उम्र का सभी अच्छाई-बुराई बीमारियों के साथ!
उस उम्र से पहले बचपन, किशोरावस्था गायब,
माता-पिता,वंश-परम्परा,नैतिक संस्कार,दाय-दायित्व विहीन!

फिर किस काम का हत्या या अंग प्रत्यारोपण?
तो क्या एक जीते-जागते इंसान का
अंग काटना,बांटना,प्रत्यारोपित करना अपराध नहीं होगा?

सृष्टि के समानांतर अलैंगिक कायिक सृष्टि नई नही है
भारतीय ऋषियों ने पहले भी की थी गौ की काया से
वशिष्ठ विश्वामित्र ने गोहरण युद्ध में बर्वर, शक,
म्लेच्छादि योद्धाओं की जो युद्ध भूमि में खेत आई थी!
(वाल्मीकि रामायण, बाल कांड सर्ग 54/55)

अस्तु आज की तिथि में अच्छा लगता किसी क्रिकेट
देवता का क्रिकेट के मैदान में चौंका-छक्का लगाना
किन्तु किसी भी तिथि में अच्छा नहीं लगेगा
किसी क्रिकेट-देवता के हमाम में उनकी
क्रिकेट देवी के साथ उनके क्लोन का इश्क लड़ाना!
–विनय कुमार विनायक

Leave a Reply

%d bloggers like this: