क्या चीन के इशारे पर नया पाकिस्तान बनेगा नेपाल…?

     एक बड़ा एवं अनसुलझा सा सवाल है। जिसे समझने की जरूरत है। इस सवाल को नजर अंदाज करने की कदापि जरूरत नहीं। आज का समय एवं आज की परिस्थिति जो कुछ दृश्य दिखा रही है वह किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। यह अलग बात है कि हम मुगालते में रहें और आँख मूँदकर बैठ जाएं। तो यह हमारी ओर से किया गया फैसला होगा न कि परिस्थिति के अनुसार दिखाई दे रहा दृश्य। क्योंकि, नेपाल ने अपना जो चरित्र दिखाया है वह भविष्य की एक बड़ी योजना का संकेत दे रहा है। नेपाल के द्वारा खड़े किए गए विवाद ने एक साफ और स्पष्ट लाईन खींच दी है। जिसको हमें समझने की आवश्यकता है। क्योंकि, यह वही नेपाल है जोकि अनवरत भारत से लाभ लेता रहता है। फिर चाहे यह लाभ किसी भी प्रकार के सहयोग के रूप में हो। आर्थिक क्षेत्र में हो या कि नैतिक। भारत के द्वारा नेपाली नागरिकों के नौकरी एवं व्यसाय में भारत लगातार सहयोग करता रहता है। भारत सदैव बढ़-चढ़कर नेपाल का भरपूर सहयोग करता रहता है। इसका मुख्य कारण है कि भारत अपने सभी पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते चाहता है। इसलिए भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ मित्रता के साथ वर्ताव करता है परन्तु दुर्भाग्य यह है कि भारत के कुछ पड़ोसी देशों की चाल भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या है। क्योंकि, भारत यह चाहता है कि हम अपने पड़ोसी देशों के साथ मधुर संबन्ध बनाए रखें। लगातार भारत की यही विदेश नीति रही जिसके अनेकों उदाहरण हैं। लेकिन विश्वासघाती कदम बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

     वर्तमान समय में नेपाल ने जिस प्रकार का रूप दिखाया है वह अत्यंत चिंताजनक है। क्योंकि, चीन के इशारे पर जिस तरह से नेपाल नाच रहा है वह आने वाले समय के लिए बहुत ही घातक साबित होगा। क्योंकि, चीन लगातार भारत के विरुद्ध साजिश रचता है। आज पकिस्तान से भारत के रिश्ते क्यों खराब हुए इसके पीछ कौन है…? इसका मुख्य कारण चीन ही है। चीन लगातार भारत के विरुद्ध गोलबंदी करने में लगा हुआ है। चीन भारत के विरुद्ध जिस प्रकार की साजिश रच रहा है वह जगजाहिर है। चीन का चेहरा दुनिया के सामने उजागर है। चीन की नीति से पूरी दुनिया भलिभाँति अवगत है। भारत के विरुद्ध पाकिस्तान का प्रयोग करने वाला चीन अब नया विकल्प खोज चुका है। अब चीन ने एक नया मोहरा बना लिया है जिसे नेपाल कहते हैं। अब तक हम चीन के कारण ही पाकिस्तान से जुझ रहे थे लेकिन अब हमें इसी चीन के कारण ही नेपाल से भी जूझना पड़ेगा। वर्तमान समय में जिस प्रकार की रूप रेखा दिखा दे रही है वह बहुत ही साफ एवं स्पष्ट है कि भविष्य में नेपाल से भी भारत को जूझना पड़ेगा। अभी हमारी सेनाएं पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में पूरी तत्परता के साथ मुस्तैद रहती हैं लेकिन आने निकट भविष्य में यही स्थिति नेपाल की सीमा के साथ होने की प्रबल संभावना है। अब निकट भविष्य में नेपाल की सीमा पर भी वैसे ही चौकसी बरतनी पड़ेगी जैसे कि हम पाकिस्तान के सीमा पर चौकन्ना रहते हैं। इसका मुख्य कारण है कि नेपाल का चीन की गोद में बैठ जाना। अब नेपाल पूरी तरह से चीन की गोद में बैठ चुका है। 

     आश्चर्य की बात यह है कि जो विवाद है वह बहुत ही चिंताजनक है। क्योंकि नेपाल ने भारत पर जिस प्रकार का आरोप लगाया है वह दुर्भाग्य पूर्ण है। नेपाल की संसद ने एक नया नक्शा पास किया है जिसमें यह दर्शाया गया है कि नेपाल के भूभाग पर भारत का कब्जा है। जबकि यह पूरी तरह से बेबुनियाद है। लेकिन ठीक इसी के इतर चीन ने नेपाल की भूमि पर वास्तव में कब्जा कर लिया है साथ ही चीन ने नेपाल की नदियों पर बाँध भी बनाया हुआ है। समस्या यहीं नहीं समाप्त होती चीन ने नेपाल के कई क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर लिया है। साथ ही चीन ने नेपाल की जमीन पर सड़क चेक पोष्ट पुल जैसे बड़े कार्य कर रखे हैं। परन्तु, यह नेपाल को नहीं दिखाई देता जबकि यह सत्य है। लेकिन, नेपाल की के0पी0 शर्मा ओली सरकार को यह आँखों से नहीं दिखायी देता।

     बता दें कि नेपाल के कृषि मंत्रालय ने सीमावर्ती इलाकों का एक सर्वे कराया है। जिस पर रिपोर्ट में यह कहा गया है कि यदि नेपाल ने इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं की तो ड्रैगन उसकी और अधिक भूमि पर कब्‍जा कर लेगा। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन जमीन को हथियाने के लिए नेपाल की नदियों का रुख मोड़ रहा है। स्पष्ट कर दें कि चीन ने नेपाल के जिस इलाके के सीमावर्ती क्षेत्रों पर कब्‍जा किया है उसमें नेपाल के उत्तर-पश्चिम का हुमला जिला भी आता है। इस जिले से करनाली नदी बहती है और यह नदी पहाड़ों से होते हुए तिब्‍बत की ओर जाती है। यह नदी नेपाल के एक बड़े हिस्‍से से बहती है। यदि सूत्रों की माने तो इन क्षेत्रों में कंस्‍ट्रक्‍शन कार्य भी चीन के द्वारा किया जा रहा है। यहां पर तिब्‍बत के इलाके में सीमा से सटी एक सड़क भी है। यह सड़क नेपाल के लिमी के करीब से तिब्‍बत के बुरांग काउंटी से होते हुए मानसरोवर झील के करीब चीन के नेशनल हाईवे नंबर 219 से मिल जाती है। खास बात यह है कि यह वही सड़क है जहाँ मानसरोवर झील है, जहां से होते हुए हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के धाम कैलाश पर्वत का दर्शन करने जाते हैं। इसके अलावा रासुवा जिले के सीमावर्ती इलाकों में भी चीन ने कब्जा किया हुआ है। यहां से होकर गुजरने वाली सिंजान, भुरजक और जांबु खोला नदी के बहाव को बदलकर चीन ने यहां की करीब छह हेक्‍टेयर की भूमि को अपनी सीमा में मिला लिया है। इसी जिले से सटा हुआ है सिंधुपालचौक जिला। यहां की करीब 11 हेक्‍टेयर भूमि पर चीन पहले से ही अपना दावा करता आया है। यहां पर भी उसने दो नदियों के मार्ग में परिवर्तन कर जमीन हथियाकर तिब्‍बत में मिला ली है। इसके संखुवासभा जिले से बहने वाली तीन नदियों,सुमजुंग,काम खोला और अरुण नदी के मार्ग में परिवर्तन कर नेपाल की भूमि को तिब्‍बत में मिलाया है। चीन लगातार इस काम को अंजाम दे रहा है और नदियों का रुख बदल रहा है।

बड़ी बात यह है कि नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस बात को खारिज करते हुए कहा कि चीन ने हमारी कोई जमीन नहीं कब्जाई है। जिन क्षेत्रों के जमीनों की बात हो रही है वह क्षेत्र हमारा नहीं है वह क्षेत्र चीन का ही है उन क्षेत्रों पर नेपाल का किसी तरह का कोई अधिकार नहीं है। जबकि सत्य यह है कि चीन ने रुई गांव पर भी पूरी तरह से कब्जा कर लिया है और लगभग 72 घरों में रहने वाले निवासी अपनी मूल पहचान के लिए लड़ रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नेपाल के वर्तमान शासन ने चीन के सामने घुटने टेक दिए हैं और अब वह भारत विरोधी बयानों और भारत विरोधी गतिविधियों का सहारा ले रहे हैं। इसलिए अब इस बात को समझने की जरूरत है कि जो सत्य है उसे नेपाल पूरी तरह से दबा रहा है और जो सत्य नहीं है उसे नेपाल उठा रहा है। अतः इस पूरे खेल को बहुत ही गम्भीरता के साथ समझने की आवश्यकता है। कि क्या अंदर खाने नेपाल की चीन के साथ कोई डील हो गई है। जिस डील के आधार पर कार्य को गति दी जा रही है। क्योंकि, यह तो सत्य है कि चीन ने नेपाल की भूमि पर कब्जा किया हुआ है साथ ही नेपाल की नदियों का अस्तित्व भी चीन समाप्ता कर रहा है। परन्तु नेपाल की ओली सरकार अपनी आँखें मूँदे हुए बैठी है। चीन के विरुद्ध नेपाल की सरकार अपना मुँह भी नहीं खोलती लेकिन वहीं भारत के विरूद्ध नेपाल की सरकार गहरी साजिश कर रही है। इसलिए भारत को अब नेपाल से सावधान हो जाना चाहिए। अब नेपाल वह नेपाल नहीं रहा। अब नेपाल समय के साथ बदल चुका है। अब नेपाल भारत का दोस्त नहीं रहा क्योंकि अब नेपाल चीनी गोद में बैठ चुका है। अब हमें नेपाल से पूरी तरह से सावधान रहना चाहिए। साथ ही बुद्धि का प्रयोग करके नेपाल में एक नया सियासी समीकरण खड़ा कर देना चाहिए। जिससे की के0पी0 शर्मा की ओली सरकार सत्ता से दूर हो जाए और नयी सरकार के साथ नई नीति स्थापित हो सके। क्येंकि, ओली सरकार भारत के विरुद्ध पूरी तरह से लामबंध दिखाई दे रही है। जिसको उखाड़ फेंकना जरूरी है। क्योंकि, अगर समय रहते इस छोटे से मर्ज का इलाज नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं कि आज का यह छोटा सा मर्ज आने वाले कल के लिए एक बड़ा नासूर बन जाएगा। अतः इस नासूर न बन पाए इसका ईलाज होना चाहिए अन्यथा निकट भविष्य में एक और नया पाकिस्तान बन जाएगा। यह नया पाकिस्तान न बनें इसलिए हमें जरूरी कदम उठाने की सख्त जरूरत है।   

        (सज्जाद हैदर)

2 thoughts on “क्या चीन के इशारे पर नया पाकिस्तान बनेगा नेपाल…?

  1. वास्तविकता को दिखाता लेख | धन्यवाद |

  2. ये पाकिस्तान नहीं बनेगा , चीन(ड्रैगन ) नेपाल को पूरा ही निगल जायेगा, और उससमय वह हमारे सर पर बैठा नजर आएगा , यह तो नेपाल की जनता को आज सम्भलने समझने की जरूरत है , व साम्यवादियों से उसे निपटने की जरूरत है

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