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    Homeसाहित्‍यकविताशब्द खतरे में

    शब्द खतरे में


    सकार शब्दों का अस्तित्व
    आज खतरे में है
    किन्तु शब्द खतरे में है जैसी गुहार
    क्यों नहीं लगाते शब्द रचनाकार?
    ‘सच्चरित्र’,’सत्यवादी’, ‘सत्यनिष्ठ’,
    ‘सदाचारी’,’सद्व्यवहारी’, ‘संस्कारी’
    जैसे लुप्तप्राय होते शब्दों के लिए
    सरकार क्यों नहीं बनाती
    एक योजना प्रोजेक्ट टाइगर जैसी?
    मिथकीय-ऐतिहासिक
    चरित्र नायकों के बूते कबतक
    चलते रहेंगे ये शब्द;
    मनुष्यता के लबादे
    ओढ़ने-पहनने-बिछाने के
    अभाव में कबतक ढो पाएगी
    इन शब्दों को डिक्सनरी?
    क्या शीघ्र नहीं हो जाएंगे
    ये सकार सद शब्द
    संग्रहालय के कचरे जैसा
    लेक्सीकान की मृत शब्द सम्पदा?

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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