लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

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hari b bindalश्री हरीबाबू बिंदल की हाल ही में प्रकाशित तीन पुस्तकों,
(1).प्रतिबिम्ब, अमेरिका में लिखी प्रवासी कहानियों का संग्रह,
(2) अमुक्तक भाग 2, अमेरिका में लिखी हास्य कविताओं का संग्रह भाग 2, एवं
(3). ‘माइ जरनी’ (अंग्रेजी में), आत्मकथा, का लोकार्पण व विमोचन, लोकमत साप्ताहिक के प्रकाशक श्री अनिल माथुर द्वारा स्वयं के निवास, बूई, मेरीलेंड में 5 सितम्बर 2015 को सफलतापूर्ण सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, भारतीय दूतावास में कम्यूनिटी अफेअर्स मंत्री,श्री एन.के.मिश्रा रहे तथा उपस्थित महानुभावों में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सतीश मिश्रा, वाशिंग्टन डी.सी,शाखा अध्यक्ष श्रीमती सुमन शुक्ला, स्थनीय वरिष्ठ डाक्टर एवं कवि डा.सुमन वरदान, व मित्रों में श्रीमती सविता अग्रवाल ने श्री बिंदल जी के प्रति अपने भाव प्रकट किये । कार्यक्रम का संचालन स्थानीय जाने माने कवि डा.नरेंद्र टंडन ने किया । सरस्वती बंदना व एक गीत श्रीमती विद्या शर्मा ने, तथा एक कविता ‘ढाई अक्षर श्री सुरिंदर पुरी ने प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि का परिचय श्री सुनीलसिंह ने व श्री बिंदल का परिचय डा.सुरभी गर्ग ने पढा । लोकार्पण के बाद प्रतिबिम्ब की एक कहाँनी ‘महादेवी’,ब अमुक्तक भाग 2 के ‘सोलह आने सही’ खंड की एक कविता, ‘हाईस्कूल का रिजल्ट’ श्री बिंदल ने पढ कर सुनाई । स्थानीय कवि, पत्रकार, परिवार,मित्र, व प्रशंसकों को मिला कर करीब 60 व्यक्ति कार्यक्रम में सम्मिलित हुये । जलपान व पुस्तक हस्ताक्षर के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

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