लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

Posted On by &filed under राजनीति.


उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपना चुनाव घोषणा पत्र क्या जारी किया, वह तो उपहार-पत्र जैसा लग रहा था। समाज के हर वर्ग को कोई न कोई तोहफा! दुबारा मुख्यमंत्री बनने के लिए तोहफों की यह बरसात काफी है। करोड़ों लोग इन तोहफों के लिए लार टपकाए रहते हैं। भला, वे अखिलेश को वोट नहीं देंगे तो किसको देंगे? मुफ्त स्मार्ट फोन के लिए अभी से लगभग डेढ़ करोड़ नौजवानों ने अपने नाम लिखा दिए हैं। एक करोड़ वृद्धों को एक हजार रु. महिना पेंशन मिलेगी, गरीब महिलाओं को प्रेशर कुकर (जिन्हें फारसी में देग-ए-बुखार कहते हैं) मुफ्त मिलेंगे, अत्यंत गरीब लोगों को गेहूं और चावल मुफ्त मिलेगा, मजदूरों और किसानों के लिए कल्याण-कोश कायम किए जाएंगे, वृद्धाश्रम बनाए जाएंगे, महिला-यात्रियों का बस किराया आधा हो जाएगा, कामकाजी महिलाओं के लिए होस्टल बनाए जाएंगे तथा अल्पसंख्यकों के लिए विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।

इस तरह की कई सुविधाएं अन्य दल भी देने की घोषणा करेंगे लेकिन उप्र की जनता सबसे ज्यादा भरोसा अखिलेश पर इसलिए करेगी कि अखिलेश ने जो वादे पांच साल पहले किए थे, उनमें से ज्यादातर पूरे कर दिए। इसके अलावा वे अभी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर ये वादे कर रहे हैं, जबकि अन्य पार्टियों के पास मुख्यमंत्रियों के कोई ठोस उम्मीदवार ही नहीं हैं।

लेकिन ये वादे क्या काफी हैं? चुनाव जीतने के लिए तो ये काफी हैं लेकिन यह राहत की राजनीति है। ये शब्द डा. लोहिया के हैं। राहत दिए बिना राजनीति चल नहीं सकती लेकिन परिवर्तन की राजनीति के बिना राजनीति कोरा धंधा बनकर रह जाती है। मेरा प्रश्न यह है कि पांचों राज्यों के इन चुनावों में ये पार्टियां कौनसे ऐसे वादे कर रही हैं, जिनसे देश में बुनियादी परिवर्तन की आशा बंध रही है?

क्या लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि के बारे में हमारी पार्टियों के पास ऐसी कार्य-योजनाएं हैं, जिनसे लोगों को स्थायी लाभ हों? शराबबंदी के बारे में सभी पार्टियां मौन क्यों हैं? अंग्रेजी के वर्चस्व को खत्म करने के बारे में हमारे नेता क्यों हकला रहे हैं? वे ऐसे प्रावधान की घोषणा क्यों नहीं करते कि हर सरकारी कर्मचारी, हर फौजी और हर न्यायिक अधिकारी के बच्चे अनिवार्य रुप से सरकारी स्कूलों में ही पढ़ेंगे और वे अपना इलाज सरकारी अस्पतालों में ही करवाएंगे? समाजवादी पार्टी से तो हम उम्मीद करते हैं कि वह समतामूलक समाज का नक्शा पेश करेगी और पुनः सत्तारुढ़ होने पर उसे लागू करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *