तुम और मैं

तेरा रूठना, मनना,
मनाना, मनुहार करना,
तेरे-मेरे रहने तक
यूँ ही चलता जाए।

ये हँसी-ठिठोली,
तेरी सुमधुर बोली,
तेरी ऐसी अदाएँ,
मेरा मन-बदन सिहर जाए।

तेरा आज भी
मुझे कनखियों से यूँ देखना,
मेरे देखते ही यूँ फेरना,
मेरे गाल-कान सब लाल कर जाए।

शरीर बूढ़ा भी हो पर
मन नित-नूतन, जवान।
तू प्रतिक्षण मेरे दिल-दिमाग में,
हर कदम तेरा-मेरा साथ बढ़ता जाए।

वो तेरा पहला,
बेतकल्लुफ़-सा स्पर्श,
आज भी तन-मन में मेरे,
तनिक झुरझुरी-सी भरता जाए।

तू मेरे लिए
खास थी, खास है,
खास रहेगी हमेशा,
मेरी खुशी का यह राज़ यूँ ही फलता जाए।

तुझे है याद, आज भी क्या,
जब पहली बार,
तूने मुझे छुआ था।
तेरे मेरे दिलों में
कुछ-कुछ और बहुत कुछ हुआ था।

तू मेरी जिंदगी में रहती ऐसे,
लू में ठंडी हवा का झोंका हो जैसे।
तेरे तन-बदन की गंध है ऐसे,
पहली बरसात की भीनी सुवास हो जैसे।

उम्र के इस पड़ाव पर भी,
महक तेरे बदन की,
पगला मुझे बना देती है।
फूलों पर मंडराता, गुनगुनाता
भंवरा मुझे बना देती है।

जिंदगी की सच्चाई
सुख-दुख के पाटों के बीच
दुख के अथाह सागर को भी,
तेरी हल्की-सी मुस्कराहट
अंजुली भर पानी बना देती है।

तुम हो मेरी जिंदगी का वो आईना,
जिसमें हर दिन,
मैं अपने आप को,
खुश और नित नये
जोश से भरपूर देखता हूँ।
तुम हो तो मैं हूँ,
तुम नहीं तो मैं कुछ भी नहीं।
इसी मधुर संगीत में
जीवन नए रंग गढ़ता रहे।
साथ यूँ ही चलता रहे।

1 thought on “तुम और मैं

  1. क्या बात है
    तुम और मैं जैसे
    शरीर मे आत्मा की प्रतीति
    तुम और मैं जैसे
    शब्द और अर्थ की अभिव्यक्ति
    तुम और मैं जैसे
    कार्य में कारण की प्रतीति
    तुम और मैं जैसे
    अर्धनारीश्वर की अभिव्यक्ति

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