तुम्हारे पूर्वज खुदा नहीं राम कृष्ण हैं

विनय कुमार विनायक
धन्य-धन्य हैंवो मानव दुनिया में,
जिसने भारत भूमि में जन्म लिया,
भारत है वसुंधा में एक मुल्कऐसा,
जिसनेसमग्र विश्व को ज्ञान दिया!

भारतहैअतिसुन्दरदेशजहां में,
जहां देवता आने से ललचातारहा,
भारत की सभ्यता और संस्कृति है
ऐसीजोसंपूर्णजगको भातीरही!

भारत सर्वदा सत्य,अहिंसा पर चला,
भारत में रहते हर जाति मजहबके
लोग,भारत देशहैसबके लिए भला,
भारतवंशियोंने नहीं किसी को छला!

अगर तुम हो भारत माता के सपूत,
तो फिर आक्रांताओं से क्यों जुड़े हो,
क्यों मंदिर केमलबे पर खड़े बाबरी
मस्जिद के टूटे ढांचे खातिरअड़े हो!

आक्रांताओं ने पूरी बर्बरता से पूर्वजों,
यानि वर्तमान मुस्लिमों के पितृजन,
मातृजन,बंधु बांधवोंके कत्ल किए,
या तो फिर मुस्लिम बना लिए गए!

अगर सद्विचारी बनकर मनन करो,
तब सबसे पहले आक्रांताओं के धर्म
अविलंबबदल, पितृधर्म में वापसी
कर लो,भारत मां कीजयकार करो!

क्यों मुट्ठीभर आक्रांताओं के वंशज
तुम्हें आज बरगलाने में लगे हुए हैं?
येआक्रांताएंशुद्ध अरबी तुर्की नहीं,
मातृपक्ष से हिन्दूव तुर्की दोगले हैं!

तुम बहुसंख्यक भारतीय मुस्लिम हो,
भारत मां के धर्मांतरित हिन्दू वंशज,
अपने मुंह कोदेखो और मिलान करो,
तुम अरबी-तुर्की-फारसी नहीं हिन्दू हो!

आज तुम अपने पहचान की संकट में
परमुखापेक्षी बने हो,खुदको पहचानो,
तुम्हारे पूर्वज खुदा नहीं, राम कृष्ण हैं,
तुम राम कृष्ण की परम्परा में जन्मे!

अपने पूर्वजों, भाई बंधुओंको पहचानो,
तुम्हारे पूर्वज अरब,तुर्किस्तान के नहीं,
तुम संतानखुदा नहीं,भगवान राम के,
तुम त्याग दोआक्रांताओं के धर्म को!

तुम लौट आओ अपने वंश परंपरा में,
बहुत शांति मिलेगी,देश में शांति होगी,
पाकिस्तानीमजहबसे मोह त्यागकर,
हिन्दूमूल के देशी धर्म में वापस आओ!

गर नकल करना है तो पाकिस्तानी नहीं,
इंडोनेशिया केमुसलमान की नकल करो,
धर्म तो बदला है,मगर पूर्वज बदला नहीं,
मस्जिद पर रामायण का श्लोक है खुदा!

अपनी भाषा,अपनी संस्कृति, अपनी संज्ञा,
गोरी,गजनवी,बाबर, तैमूरकी भक्ति नहीं,
सुकर्णो,सुहार्तो,मेघावती नामहिंदूधर्मका,
मन का शुद्धिकरण करो,एक ईश्वर-खुदा!

ईश्वर देशी संज्ञा,मगरखुदाविदेशी अक्षर,
राम कृष्णमानव रूप में अवतरित ईश्वर,
राम-कृष्ण,बुद्ध-महावीर को चाहिएमंदिर,
खुदा निराकार ईश्वर सा,नहीं चाहिए घर!

मंदिर-मस्जिद की लड़ाईकरना हैबेकार,
ईश्वर, अल्लाह,खुदा कीमूर्ति नहीं होती,
मंदिर हमेशा सेहोतादेवमूर्तियों का घर,
राम कृष्णजन्मे तोजन्मस्थान चाहिए!

राम कृष्ण बुद्ध महावीर के पहले ईश्वर
निराकारथे, जिनकीप्राकृतिक पूजा होती,
बाद में साकार ईश्वरावतार की मूर्ति बनी,
मूर्तिपूजा हेतु मंदिर,गुरुद्वारा चाहिए ही!

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