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    युवा

    जल रही हो जिसमें
    लौ आत्मज्ञान की
    समझ हो जिसको
    स्वाभिमान की

    हृदय में हो जिसके
    करुणा व प्रेम भरा
    बाधाओं व संघर्षों से
    जो नहीं कभी डरा

    अपनी संस्कृति की
    हो जिसको पहचान
    भेदभाव से विमुख
    करे सबका सम्मान

    स्वदेश से करे जो
    प्रेम अपरम्पार
    जानता हो चलाना
    कलम व तलवार

    राष्ट्र निर्माण में जो
    सदैव बने अगुवा
    वास्तविक अर्थों में
    वही होता है युवा

    आलोक कौशिक

    आलोक कौशिक
    आलोक कौशिक
    शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन सम्पर्क सं.- 8292043472

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