लेखक परिचय

अरूण पाण्डेय

अरूण पाण्डेय

मूलत: इलाहाबाद के रहने वाले श्री अरुण पाण्डेय अपनी पत्रकारिता की शुरुआत ‘दैनिक आज’ अखबार से की उसके बाद ‘यूनाइटेड भारत’, ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘देशबंधु’, ‘दैनिक जागरण’, ‘हरियाणा हरिटेज’ व ‘सच कहूँ’ जैसे तमाम प्रतिष्ठित एवं राष्ट्रीय अखबारों में बतौर संवाददाता व समाचार संपादक काम किया। वर्तमान में प्रवक्ता.कॉम में सम्पादन का कार्य देख रहे हैं।

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6गायों के यशस्वी स्थान पर कुछ लोगों की नजर लग गयी है और उनके पेट में यह बात पच नही रही है कि उसे कैसे पूज्यनीय होने से रोका जा सके । इसी गाय के लिये हिन्दू इतने साल तक संधर्ष करते रहे और आज भी कर रहे है लेकिन हिन्दू होने के बाद भी लोग गम्मी पीजा खायें यह नही होना चाहिये। वह हमारे परिवार का हिस्सा थे , है और आर्गेनिक फूड की मांग करने वाला यह देश उसी ओर जा रहा है जहां एक दिन यही गाय व बछडे फिर से परिवार का हिस्सा बनेगें । यह बात पलवल में एक कार्यक्रम के दौरान प्रवक्ता डाट काम से बातचीत में भाजपा के कदावर नेता संजय जोशी ने कही । प्रस्तुत है उनसे बातचीत के कुछ अंशः
प्र.: संजय जी आज गोरक्षा को लेकर पूरे देश में एक ही सवाल लोगों के मन में चल रहा है कि आखिर उसकी सुरक्षा कैसे की जाय। आप संध से भी है और भाजपा में एक बडी सख्सियत के रूप् में जाने जाते है । आपके विचारों में क्या गुजाइश है इस मामले को लेकर जबकि सभी दल, आपके दल का, इस मसले पर विरोध कर रहें है।
उ0: वह विरोध क्यों कर रहें है इस बात को मैं नही जानता , उनके विचार मेरे विचार से अलग हो सकते है लेकिन यह बात उन्हें भी सोचनी होगी इसी गाय का दूध पीकर बच्चा जवान होता है और वंश की परम्परा को आगे बढाता है । उसकी जगह हम चाय या किसी अन्य चीजों का सहारा क्यों नही ले लेते , वह जो हमें जीवन देती है वह हमारी मां के समान ही है, उसे हम उसी तरह देखते ह,ै जैसे अपनी मां को , अन्न देने वाली अपनी धरती मां को और छत्रछाया व पहचान देने वाली अपनी भारत मां को।
प्र0: हरियाणा में तो गोरक्षा के प्रंित पहले से ही लोग जागरूक है और यहां पर जितनी गोशाला है उतनी शायद ही कही हो, इतना ही नही यहां गोशाला में सबसे ज्यादा चंदा देकर पगडी पहनने का भी रिवाज रहा है। और राज्य यह क्यों नही कर पाये।
उ0: हरियाणा में गाय तो परिवार की आमदनी का मुख्य जरिया रही है और लोगों का घर इससे पलता है और इसी के दूघ से आज वह इतनी उंचाईयों तक पहुंचे और राज्यों ने इस बात को अब समझा लेकिन हरियाणा में दूध दही का खाना , यही है हरियाणा इसीलिये कहा जाता है और प्रदेशों को भी उनके राह का अनुसरण करना चाहिये।क्योंकि इसी में लक्ष्मी का वास है और तरक्की का रास्ता भी यही है।
प्र0: गोरक्षा अभियान में गायों की बात की जाती है जबकि बछडे पहले परिवार का एक हिस्सा होते थे, वह खेत जोतते थे, उनके द्वारा बीज निकालने में उनकी कदमपोशी करायी जाती थी लेकिन वह आज सडको पर आवारा घूम रहे है। उनके लिये भी गोरक्षा अभियान में कुछ है।
उ0: यह सच है कि आज के आधुनिक दौड में हम अपना वास्तविक जीवन भूल चुके है । पहले के लोग दीर्धायु होते थे और सौ से ज्यादा वर्षो तक इसलिये जीवित रहकर स्वस्थ व सुखी जीवन बिताते थे क्योंकि वह बछडों को अपने बेटों की तरह ही परिवार का हिस्सा मानते थे। गोबर की खाद , उपले की रोटी , अनाज को पेडो से निकालने के लिये उनका उपयोग होता था लेकिन आजकल लोग उसे फालतू समझने लगे है ।अब आर्गेनिक का जमाना वापस आ रहा है लोग यूरिया से भाग रहे है और वापस जाना चाहते है उसी युग में जिसे हम पीछे छोड आये है । उसी तरह जो हमारे परिवार का हिस्सा थे वह भी वापस आयेगें और इसी लिये यह अभियान चलाया जा रहा है ।
प्र0: कैसा रिस्पांस अभी तक लोगों को देखकर मिल रहा है।
उ0: किसी भी काम को करने में थोडा समय जरूर लगता है लेकिन हम जितनी तेजी से इस दिशा में आगे आये है । वह काबिलेगौर है , आज गोमांस पर जो रोक लगी है , उससे बेशक कार्यकर्ताेओं का मनोबल बढा है कुछ लोगों को हमारे गौमाता पर एतराज है लेकिन समय रहते उनको सद्बुद्धि आ जायेगी एैसा हमारा मानना है।
प्र0: केन्द्र में आपकी सरकार है और गोरक्षा को लेकर वह भी काफी गंभीर है । आप का क्या मानना है आप के इस कार्यक्रम में सरकार का योगदान क्या होगा।
उ0: हरियाणा की खट्टर सरकार ने तो पहले ही कमर कस रखी है और गायों व बछडो के प्रेित हमेशा से हरियाणा की सरकारों का रवैया बडा ही कठोर रहा है । इसकी सीख सभी राज्यों को लेनी चाहिये और अगर आर्गेनिक फूड चाहिये तो जानवरों को परिवार का हिस्सा बनाना ही होगा ।
प्र0: कोई और बात जो गोरक्षा को लेकर लोगों से कहना चाहेगें।
उ0: अगर स्वस्थ जीवन अपना रखना है तो जानवरों के प्रति उसी तरह से वफादार रहें जैसा वह आपके प्रति रहते है और उन्हे ंअपने परिवार में शामिल करे। गाय का दान जिसे हम गोदान कहते है वह इसलिये है कि गाय जब किसी के घर जाती है तो उसके साथ उस घर को वह सबकुछ मिलता है जो कि उस घर को चाहिये , सुख समद्धि देती है लेकिन विडम्बना हम इस बात को समझते है लेकिन देर से।

 

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1 Comment on "गोदान इसलिये कि खुशियां साथ जायें और नवजीवन मिले: संजय जोशी"

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Himwant
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आज गाय के नाम पर जर्सी नस्ल का पालन हो रहा है, आवश्यकता है अधिक दूध देने वाली स्वदेशी नस्लो का विकास हो। हरियाणा एवं गुजरात के अलावा, गाय की स्वदेशी नस्लो की विकास पर कोई अधिक काम नही हुआ है। बूढी गायों का संरक्षण भी हरियाणा गुजरात में दिखता है, अन्य जगहों पर नही। गाय पालन सिर्फ आस्था का विषय नही है, यह ग्रामीण अर्थ तन्त्र एवं पर्यावरण से भी जुड़ा मसला है। आज आवश्यकता है इस पर गम्भीर काम करने की।

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