लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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25 दिसम्बर पर विशेषः-

मृत्यंुजय दीक्षित

भारतीय राजनीति व लोकतंत्र के महानायक व सुशासन के प्रतीक भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बनाने में अग्रणी भूमिका अदा करने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न यशस्वी अटल बिहारी बाजपेयी।पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी महान हिंदी कवि ,पत्रकार व प्रखरवक्ता थे। एक प्रकार से अटल बिहारी बाजपेयी भारतीय राजनीति के इनसाइक्लोपीडिया भी माने गये लेकिन आज दुर्भाग्य से बीमारी से ग्रसित होकर अपने जीवन की एक नयी कविता लिख रहे हैं। अटल जी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में हुआ था। वे भारत के ऐसे राजनीतिज्ञ है। जिनका सारा जीवन देश की राजनीति में ही गुजरा है। अटल जी का देश की राजनीति व साहित्य तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में अप्रतिम स्थान है और रहेगा। अटल जी ने जनसंघ की स्थापना में महतवपूर्ण भूमिका अदा की व 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे।  भारतीय जनता पार्टी के निर्माता थे। वे जीवनभर राजनीति में सक्रिय रहे।

भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले अटल बिहारी बाजपेयी लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म,पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत पत्र – पत्रिकाओं के लम्बे समय तक संपादक रहे। पत्रकारिता के क्षेत्र मंें भी उनका अप्रतिम योगदान रहा। उनके कई विषयों पर लेख प्रकाशित होते रहेते थे। उन्होनें अपना जीवन संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था। अटल जी ने पहली बार 1955 में लोकसभा चुनाव लड़ा और पराजित हुए। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बलरामपुर  से जनसंघ प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा पहुंचे। सन 1957 से 1977 तक जनसंघ की स्थापना से लगातार 20 वर्षों तक संसदीय दल के नेता रहे। मोरार जी देसाई सरकार में 1977 से 1979 तक भारत के विदेश मंत्री रहे तथा विश्व राजनीति में भी अपना लोहा मनवाया। अटल जी भारत के पहले ऐसे विदेशमंत्री थे जिन्होनें संयुक्तराष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देकर राष्ट्रभाशा का मान बढ़ाया था।  अटल जी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कश्मीर आंदोलन का भी 1953 में जोरदार तरीके से सहयोग दिया था। जब आपसी मतभेदों के गहराने के बाद मोरार जी की सरकार का पतन हो गया उसके बाद नाराज होकर 1980 में अटल बिहारी बाजपेयी व लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय जनता पार्टी का गठन किया। 6 अप्रैल 1980 को वह भाजपा के अध्यक्ष बने। दो बार राजसभा के सदस्य चुने गये।

लोकतंत्र के सजग और यशस्वी प्रहरी अटल जी  16 मई से 1 जून1996 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उनकी पहली सरकार मात्र 13 दिनों में ही गिर गयी थी। लेकिन उनका संघर्ष चलता रहा और 19 अप्रैल 1998 को पुनः देश के प्रधानमंत्री बने। उनका यह शासनकाल पूरे वर्ष तक चल जाता लेकिन पता नहीं कुछ राजनैतिक विश्लेषकों व सलाहकरों ने समय से पूर्व ही उन्हें चुनाव करवाने की सलाह दे डाली। जिसका नजीता यह हुआ कि 2004 के लोकसभा चुनाव गर्मियों में हुए तथा भाजपा ने शाइनिंग इंडिया का नारा दिया जिसके बाद भाजपा की पराजय हो गयी और एनडीए की सरकार सत्ता से बाहर हो गयी। अटल जी का कार्यकाल कई बातों के लिये याद रखा जायेगा।

अटल जी के ही कार्यकाल में भारत ने राजस्थान के पोखरन में 11 व 13 मई 1998 को पांच भूमिगत परमाणु विस्फोट किये और उसके बाद भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया।इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि इसकी भनक अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों तक को नहीं हो सकी थी।इसके बाद विश्व के देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंधभी लगा दिये लेकिन भारत विचलित नहीं और वह आगे बढ़ता रहा। यही नहीं अटलजी की सरकार में पाकिस्तान के साथ बेहतर संम्बंधों की अनोखी पहल की गयी लेकिन भारत को बदले में कारगिल की लड़ाई झेलनी पड़ गयी। अटल सरकार ने युद्ध नियमों का पालन करते हुए कारगिल को पाकिस्तानी सेना व आतंकियांे के कब्जे से मुक्त करा लिया। इसके अलावा बाजपेयी सरकार में विकास कार्यो को एक बड़ी गति प्रदान की गयी जो आज भी यादगार हैं।

अटल जी की सरकार में स्व्र्णिम चतुर्भुज योजना की शुरूआत की गयीं इसके अंतर्गत दिल्ली- कोलकाता -चेन्नई – मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया।अटल जी के शासनकाल में भारत मंे जितनी सड़कों का निर्माण हुआ उतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ था। इसके अतिरिक्त आवास योजना, रोजगार सृजन के लिए कई योजनाओं को शुरू किया गया। अटल जी देशके पहले ऐस गैर कांग्रेस प्रधानमंत्री रहे जिनका कार्यकाल नेहरू व इंदिरा गांधी के जिन्होंने बाद सबसे अधिक था। वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने न केवल गठबंधन सरकार को स्थायित्व दिया अपितु सफलतापूर्वक संचालित भी किया। अटल जी के लगभग सभी दलों में दोस्त थे। कहा जाता है कि जब अटल जी संसद में बोलने के लिये खड़े होते थे तब संसद में सन्नाटा छा जाता था।

भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी को 1992 में पदमविभूषण से सम्मानित किये गये। उन्हें 1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिला। 1993 और 2015 में डी लिट की उपाधि से सम्मानित किया गया।1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार और 1994 में भाररत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अटल जी को उनके जीवन का सबसे बड़े पुरस्कार 2015 के दिसम्बर माह में भारतरत्न से सम्मानित किया गया। अटल जी की एक ही इच्छा रहती थ्ी कि उनका भारत भूख भय और निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो। अटल जी महान कवि थे।

मेरी इक्यावन कविताएं अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। उनके पिता कृष्ण बिहारी बाजपेयी ग्वालियर रियासत में जाने माने कवि थें। उनके संघर्षमय जीवन ,परिवर्तनशील परिस्थितियां , देशव्यापी आंदोलन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी। उनकी कविताओं पर गजल गायक जगजीत सिंह ने एक एल्बम भी निकाला था। कई महत्वपूर्ण प्रसंगों पर उनका कविता पाठ जनमानस व श्रोता को भाव विभोर कर देता था तथा जीवन में नव उत्साह का संचार भी करता था। अटल जी केे लेखांे व भाषणों का संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है। साथ ही उनकी अन्य रचनाओं में सेकुलरवाद, राजनीति की रनटीली राहें, अमर आग है ,संसद में तीन दशक काफी उल्लेखनीय है। अटल जी राम मंदिर आंदोलन मेें भी जोर शोर से शामिल हुए तथा उन्हें भी अयोध्या जाते समय गिरफ्तार किया गया था। अटल बिहारी बाजपेयी वास्तव में महान व्यक्तित्व के धनी थे तथा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में कश्मीर समस्या के समाधान हेतु गम्भीर प्रयास हुये थे तथा यह उसी का प्रतिफल है कि कश्मीर की जनता आज भी अटल जी को याद करती है। जम्मू कश्मीर की महिला मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अटल जी की जबर्दस्त प्रशंसक हैं तथा इसी का परिणाम है कि आज वह घोर विरोध के बाद भी भाजपा के साथ मजबूत गठबंधन की सरकार चला रही हैं।

पीएम मोदी के अगुवाई वाली कंेद्र की राजग सरकार इस बार अटल जी के जन्म दिन को सुशासन दिवस के रूप मंे मनाने जा रही है। इस अवसर पर सरकार के कामों की जानकारी जनता तक पहुचायी जायेगी। जिसमें कंेद्र सरकार के मंत्री व सांसद जनता के सामने सरकार के कामकाज का ब्यौरा देंगे ।सरकारी नीतियों से जनता को होने वाले फायदों की जानकारी जनता को दी जायेगी। इस दिन का उपयोग डिजिटल परिवर्तन को बढ़ज्ञवा देने और सभी क्षेत्रों के लोगों से सम्पर्क बढ़ाने के लिये किया जायेगा। पूरे देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

प्रेषकः- मृत्युंजय दीक्षित

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