लेखक परिचय

सुजाता मिश्र

सुजाता मिश्र

हिंदी साहित्य तथा हिंदी पत्रकारिता में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक - स्नात्कोत्तर. हिंदी साहित्य में डॉक्ट्रेट। हिंदी भाषा - साहित्य की शिक्षिका। समसामयिक विषयों पर विविध समाचारपत्र- पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन साथ ही विद्यार्थियों के लिए विद्यालयीन विषयों पर लेखन।

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सुजाता मिश्र 

Arvind kejrivalखुद को सबसे अलग , सर्वश्रेष्ठ, एकमात्र देशभक्त का तमगा देने वाली आम आदमी पार्टी का सच में क्या आम आदमी से कोई रिश्ता है ? जब यह दल नया – नया बना था तो अन्य लोगों की तरह मुझे भी लगा कि शायद यह एक बड़े परिवर्तन की शुरुवात है। किन्तु बहुत जल्द ही अपनी नीतियों, कार्यपद्धति और उमीदवारों के चयन से स्वघोषित देश भक्त अरविंद केजरीवाल ने यह साबित कर दिया कि आम आदमी पार्टी अन्य राजनीतिक पार्टियों से अलग बेशक हो पर श्रेष्ठ कतई नहीं है। यह एक ऐसी पार्टी है जिसके सदस्यों की संख्या बहुत है , पर कोई व्यवस्थित ढांचा नहीं है। भीड़ की तरह लोगों को जोड़ लिया गया है , जिनकी न तो कोई विचारधारा है न उत्तरदायित्व , है तो सिर्फ चुनाव लड़ने की लालसा। कांग्रेस और भाजपा सहित अन्य राजनितिक दलो पर अरविंद केजरीवाल और उनकी तथाकथित “आम” आदमी पार्टी जिस तरह से आरोप लगाते हैं उससे अरविंद केजरीवाल अपनी ही अहमियत खोते जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी बनने से पहले जो अरविंद अन्ना हज़ारे के साथ लोकपाल आंदोलन में शामिल थे उनकी जो इज्जत देशवासियों के मन में थी आज उन्ही देशवासियों के मन में केजरीवाल की मंशा के प्रति संदेह है।

दिल्ली में शीला दीक्षित और उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के अनेक आरोपों के दम पर , शीला दीक्षित के खिलाफ सबूतों के दम पर चुनाव जितने वाले अरविंद केजरीवाल ने चुनाव के तुरंत बाद न सिर्फ कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनायी बल्कि शीला दीक्षित के भ्रष्टाचारी शासन पर भी चुप्पी साध ली। यही पहला और बड़ा धक्का था उन सभी के लिए जिन्होंने एक परिवर्तन की उम्मीद से आम आदमी पार्टी को वोट दिया था। मीडिया द्वारा और जनता द्वारा अरविंद केजरीवाल से इस बाबत सवाल करने पर उन्होंने बड़े मंझे हुए नेताओं की तरह चुनाव पूर्व शीला दीक्षित के खिलाफ प्रस्तुत किये सबूतों को नाकाफी बताते हुए शीला दीक्षित के खिलाफ कार्यवाही को टाल दिया , आज केजरीवाल की उसी राजनितिक चाल का नतीज़ा है कि शीला दीक्षित को केरल का राजयपाल बना दिया गया है। क्या सच में केजरीवाल भ्रष्टाचार के खिलाफ थे? क्या उनकी नीयत साफ़ थी ? खैर ये तो बस शुरुआत थी , उसके बाद अरविंद केजरीवाल एक के बाद एक जनता का भरोसा तोड़ते गये। उनके कानून मंत्री विदेशी महिलाओं के साथ बदसलूकी करते पकडे गये , उन पर दिल्ली उच्च न्यायलय में आरोप भी साबित हुआ किन्तु केजरीवाल ने अपने कानून मंत्री का न सिर्फ समर्थन किया बल्कि अरविंद और उनकी पार्टी के विरोध – प्रदर्शन के कारण दिल्लीवासियों को अराजकता और अव्यवस्था का सामना भी करना पड़ा। क्या अरविंद केजरीवाल ने कभी भी सच में आम आदमी की दिक्कतों को समझा ? अरविंद जी मैले – कुचैले कपडे पहनकर , मफरल लपेटकर ही कोई आम आदमी नही बन जाता , यदि आपको सच में आम आदमी की कोई परवाह होती तो अपने स्वार्थ के लिए आप दिल्लीवासियों को यूँ परेशान नहीं करते। किन उम्मीदों से आपको वोट दिया था दिल्ली वालों ने , और क्या किया आपने , सिर्फ कोरी घोषणाएं ? न पानी का बिल कम हुआ न बिजली का , न ठेके पर काम करने वालो की सुनी आपने न कानून व्यवस्था के लिए कुछ किया। कैसे करते सामने लोकसभा चुनाव जो थे। जिसके लिए एक सुनियोजित तरीके से आपने दिल्ली की सरकार को गिरा दिया। “लोकपाल के लिए हज़ार बार मुख्यमंत्री की कुर्सी कुर्बान “ आप की इन दलीलों पर कौन भरोसा करेगा ? कौन इसे त्याग मानेगा ? कैसा त्याग ? अरविंद जी आप कोई भी एक मुद्दा बनाकर , उसे “अदर एक्सट्रीम “ तक ले जाकर जिम्मेदारी से हटना चाह रहे थे , सो हट गये। यह कोई त्याग नही पलायन है। “हिट एंड रन “ आपका मूल स्वाभाव है। अन्ना के जन आंदोलन के बाद जब आपने राजनीति में उतरने का निर्णय लिया तब आप कांग्रेस पर एक के बाद एक आरोप लगाते रहे। गम्भीर आरोप लगाकर सबको भ्रष्ट कहकर मुद्दे को भूल जाना और मामले को छोड़ देना अरविंद केजरीवाल के लिए सहज सामान्य बात है। सरकार बनाना भी “हिट” जैसा था और फिर इस्तीफा देना “रन” जैसा।

आम आदमी की पार्टी में सभी खास लोगों को उम्मीदवार बनाना क्या साबित करता है ? जो लोग आम आदमी पार्टी से अन्ना के आंदोलन के समय से जुड़े रहे , जिन्होंने ज़मीनी स्तर पर कार्य किया उन्हें उम्मीदवार न बनाकर आप सभी जाने – माने चेहरो को उम्मीदवार बनाते नज़र आये। बताईये कहाँ थे आपके ये तथाकथित देशभक्त पिछले दस सालो से ? कहाँ थे ये देश भक्त अन्ना आंदोलन के समय ? जो आज अपनी बड़ी – बड़ी नौकरियां छोड़कर लोकसभा चुनाव में उतर रहे हैं आपके टिकट पर। क्या ये हैं भारत के आम आदमी ? कांग्रेस या भाजपा के नेताओं के उद्योगपतियों से सम्बन्ध पर आप सवाल दागते हैं , और खुद आपकी पार्टी बड़े – बड़े व्यापारियों , मालिकों बड़े – बड़े अधिकारियों को टिकट देती है उसका क्या जवाब है आपके पास ? आप करे तो चमत्कार , कोई और करे तो भ्रष्टाचार ? आप हमेशा से मीडिया पर आरोप लगाते रहे हैं की मीडिया को भाजपा और कांग्रेस ने खरीद लिया है , पर जब आप खुद एक पत्रकार से सेटिंग करते नज़र आये तो आप कहते है इतना तो चलता है। वाह क्या बात है , और आश्चर्य तो तब होता है जब आप भगत सिंह को अपना आदर्श बताते हुए एक पत्रकार से कहते हुए दिखे कि कांग्रेस और भाजपा वालो ने भगतसिंह को आतंकवादी घोषित कर दिया पर मैं उन्हें शहीद मनाता हूँ। अरविंद जी क्या आप नही जानते आपकी पार्टी के संस्थापक सदस्य प्रशांत भूषण ही वो शख्स हैं जो सुप्रीम कोर्ट में भगत सिंह को देशभक्त मानने के खिलाफ लड़ रहे हैं , जी हाँ आपकी पार्टी के अहम् सदस्यों ने ही भगत सिंह को आतंकवादी घोषित किया है। क्या आपको जरा भी संकोच नही होता इस तरह लोगो की भावनाओं से खेलते हुए ?

आप किस आधार पर कहते हैं कि आप परिवर्तन लाना चाहते हैं ? सत्ता पाने की जो हड़बड़ाहट आम आदमी पार्टी में दिखती है वो आज तक किसी भी राजनितिक दल में दृष्टिगत नही हुई। क्या शर्म की बात है की आप मुख़्तार अंसारी जैसे नेताओं तक का साथ लेने को तैयार हैं, क्या इन्ही के दम पर भ्रष्टाचार दूर करेंगे? महज एक साल हुए हैं आपकी पार्टी बने और आप प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नज़र रखे हुए हैं ? यदि सच में आप में कोई जिम्मेवारी होती तो आप पहले दिल्ली की सरकार को चला कर दिखाते , जो कुछ था आपके पास उस से खुद को साबित करते , पर नही आप तो चंद महीनो में ही मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बन जाना चाहते हैं। महज़ 49 दिन आपने दिल्ली की सरकार चलाई और सालो से गुज़रात में सरकार चला रहे नरेन्द्र मोदी , महारष्ट्र में सालों से चल रहे कांग्रेस के शासन का निरीक्षण करने निकल पड़े , किस आधार पर ? और जब गुजरात में आपको कोई बड़ा मुद्दा नही मिला तो आपके कार्यकर्ता दिल्ली , उत्तरप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में स्थापित भाजपा के कार्यालय में पहुँच गए तोड़ – फोड़ करने , हंगामा करने , यह कैसी अराजकता फैला रहे हैं आप लोग ? महारष्ट्र में आपके कार्यकर्ताओं ने कितनी तोड़ – फोड़ की , सुर्ख़ियों में रहने के लिए क्या देश में वैमनस्य फैलाना सही है। सत्ता की चाह रखना बुरी बात नही है लेकिन उसे पाने के लिए जो रास्ता आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल ने अपनाया वह अवश्य ही निंदनीय है। भाजपा और कांग्रेस को छोड़ दे तो भारत में अनेको राजनितिक पार्टियां है जो कई सालो से अलग – अलग राज्यों में सरकारें बनाती आयी हैं , लोकसभा चुनाव में भी भाग लेती हैं , पर सत्ता पाने की जो हड़बड़ाहट आम आदमी पार्टी में दिखती है वो किसी अन्य में नही। शायद आपके इसी रवैये कि वजह से अन्ना ने आपका साथ छोड़ दिया। वो आपकी इस महत्वाकांक्षी स्वाभाव से अवगत हो गये होंगे , जिसे हम लोग अब देख पा रहे हैं।

एक के बाद एक वो सभी लोग आपकी पार्टी से उम्मीदवार बनाये जा रहें है जो भाजपा या कांग्रेस की विचारधारा के विरोधी हैं , जो राष्ट्रवाद के विरोधी हैं , जी अराजकता के समर्थक हैं। इस से एक बात और ज़ाहिर होती है कि आपके ऐसे सभी उम्मीदवार मीडिया में सुर्खियां बनकर छाये रहे , कांग्रेस और भाजपा कि सरकारों के विरुद्ध समाचार फैलाते रहे , और वो अंदर ही अंदर आप का समर्थन करते रहे ,इस तरह से आपने अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए मीडिया का भी दुरूपयोग किया , और आज अपने उन्ही मीडिया बंधुओं को आप अपना प्रत्याशी बना कर उन्हें उनके काम काम का इनाम दे रहे हैं। अरविंद जी बिना विचारधारा , बिना संगठन , बिना उद्देश्य के बनी आम आदमी पार्टी का यही चेहरा सच है जो अब सामने आ चुका है। आपका मकसद सिर्फ सत्ता पाना रहा है , न कि परिवर्तन , यही वजह है कि आज आपकी पार्टी के मतभेद खुल कर सामने आ रहे हैं , सबको सुरक्षित सीट चाहिए , कोई परिवर्तन के लिए नही लड़ रहा चुनाव , सिर्फ एक मकसद है सत्ता पाना। सभी को भ्रष्ट घोषित कर आप स्वयं को ईमानदारी का प्रमाणपत्र देकर जो राजनीती कर रहे है वह आपके नौसखियेपन को दर्शाता है। राजनीती मुद्दो पर होती है , विचारधारा पर होती है न कि सिर्फ आरोप लगाकर। हर किसी को गलत साबित करते – करते आज आप खुद अपना महत्व खोते जा रहे हैं , आपसे ऐसे आरोप – प्रत्यारोप की राजनीती कि उम्मीद नही थी , शायद आप भूल गये कि जब हम किसी पर एक ऊँगली उठाते हैं तो तीन उँगलियाँ हमारी तरफ भी उठती हैं।

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55 Comments on "आप – परिवर्तन या पलायन"

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डॉ.अशोक कुमार तिवारी
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डॉ.अशोक कुमार तिवारी
सुजाता जी आप महिला हैं और मोदी को केजरीवाल से श्रेष्ठ मानती हैं इसलिए आप से कुछ प्रश्न की विनम्र अनुमति चाहता हूँ : —– (मैं अहमदाबाद में रहने वाला एक हिंदी शिक्षक हूँ – मोदी की धर्मपत्नी भी रिटायर्ड शिक्षिका हैं मैं उनसे मिल चुका हूँ ) ———————————————- 1) क्या मोदी का व्यवहार अपनी पत्नी के प्रति उचित है ? 2) उ.प्र. के मोहनलाल गंज में जो कुछ हुआ उसपर मोदी का ढूलमुल रवैय्या क्या उचित है ? 3) 17% रेल भाड़ा बढ़ाकर भूटान-नेपाल को खैरात देना क्या उचित है ? 4) उ.प्र. के मोहनलाल गंज में जो कुछ… Read more »
vijay shanker yadav
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Kabhi apne asli india dekhi hai jaha , sabse jaisa anpad, kupoisit, corruption, sabse jaida satarvetion, unstable society hai, yeh data hai UNO ka, kaise social welfare scem ka paisa corruption ka jariya banta hai, kaise jal, jungal, and jamin ko ujad kar corporate ko diya jata manmani karne koi, on paper sab sahi, par jiski lathi uski bhaes wali baat ho jaati hai, corporates ko jamin kaise government desh ki bhavish ka naam dekar chinti ya le leti hai, kaise police system kaam kati hai, naxals kiu hai kon hai, kabhi apne dhanbad, jhariya, mp mein shingroli ki kahni… Read more »
सुजाता मिश्र
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विजय शंकर यादव जी इस देश में जितनी भी बड़ी एन जी ओ हैं वो सब तो केजरीवाल साहब के साथ हैं , अगर इन एन जी ओ ने अपने करोडो – अरबो के फण्ड का आधा भी ईमानदारी से खर्च किया होता तो भारत की बदहाली में काफी कमी आ जाती …मतलब अब तक जिन लोगो के लिए कुछ नहीं हुआ उनके लिए आगे कोई कुछ बेहतर करने की भी ना सोचे ? बार – बार भारत की गरीबी की दुहाई देकर विकास का विरोध करने वाले लोगो को पहले खुद उन साधनो का त्याग करना चाहिए जिनका इस्तेमाल… Read more »
इंसान
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आपने विजय शंकर यादव को भारत के विकास पर शिक्षा दी है तो मुझे विश्वास है कि विजय अवश्य इसे ग्रहण कर अपनी सोच व व्यवहार में उपयुक्त परिवर्तन लाएंगे, मैं तो केवल उन्हें हिंदी भाषा को रोमन शैली में न लिख देवनागरी में लिखने का आग्रह करूँगा| जब हिंदी भाषा के प्रति सम्मान जागे गा तो अवश्य ही देश का भी सोचेंगे|

vijay shanker yadav
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Kabhi apne asli india dekhi hai jaha , sabse jaisa anpad, kupoisit, corruption, sabse jaida satarvetion, unstable society hai, yeh data hai UNO ka, kaise social welfare scem ka paisa corruption ka jariya banta hai, kaise jal, jungal, and jamin ko ujad kar corporate ko diya jata manmani karne koi, on paper sab sahi, par jiski lathi uski bhaes wali baat ho jaati hai, corporates ko jamin kaise government desh ki bhavish ka naam dekar chinti ya le leti hai, kaise police system kaam kati hai, naxals kiu hai kon hai, kabhi apne dhanbad, jhariya, mp mein shingroli ki kahni… Read more »
vijay shanker yadav
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Kya bakwas argument hai, tark ke jah kutark diya jaa raha, har eh ek baat ko personal maan baathe, saty anubav ki chiz hai, tateh data interpretation ki, anubhav umer ke sath aata hai, aapne sirf aapna agenda rakhne ka kaam kiya, sab kafi padhe likhe bewkuf log hai, aisa lagta hai, kejriwal prasansa ke kabil hai, yeh baat unohne kar dikhae, chahe adanni*ambani wali baat ho, ya corruption related exposed ya unka delhi mein kaam, jamsedpur mein unka kaam ya mother teresa se milne ke baad kaalighat mein kuya kaam, kuch to baat hai bande mein.kitne log hai jo… Read more »
Satish Kr.Singh
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केजरीवाल ने पार्टी का करोड़ो रूपया डकार गया. लोक सभा चुनाव में केजरीवाल की ज़मानत ज़ब्त होने जरा है लेकिन केजरीवाल को इस से बहुत फायदा हुआ है क्यों की अण्णा का पूँछ पकड़ कर यह मानसिक रोगी (केजरीवाल ) ने 2 वर्षो में आम आदमी पार्टी फण्ड में लगभग 350 करोड़ रुपये जमा कर लिया है जिस का मालिक यह अकेले है .अब चुनाव के बाद यह गुडगाँव और ग़ज़िआबाद में रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी का धंधा शुरू करने वाला है.सिसोदिया को मैनेज करने के लिय इस को कुछ चटनी चटा देगा वरना और सब तथाकथित साथिओ को लात… Read more »
आर. सिंह
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सतीश कुमार जी,क्या दूर की कौड़ी लाएं हैं आप ? बेबुनियाद लांछन लगाने वालों की भारत में कमी नहीं है और न भविष्य वक्ताओं की,पर मानना पड़ेगा कि आप को उसमे बी बहुत उंचा स्थान दिया जा सकता है। कहा जाता है न कि आदमी हर पल कुछ सीखता है, तो इतनी ज्यादा उम्र होने के बावजूद ऐसे हांकने वाले का दर्शन मुझे नहीं हुआ था,अतः आज भी मेरी अनुभव में बढ़ोतरी हुई। नमो बेकार फेंकू नाम से बदनाम हैं। भारत में ऐसा लगता है कि हर गली में बड़े बड़े फेंकू भरे पड़े हैं। मेरे जैसे लोगों की एक… Read more »
सुजाता मिश्र
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आर सिंह जी अब क्या कहना है आपका आम आदमी पार्टी के बारे में , मतलब के यारो को यूँ ही बिखरना था … युवाओं का साथ भी नहीं मिला , मैंने आप से कहा था ना की अगले लोकसभा चुनाव में इस पार्टी का कोई वज़ूद ही नहीं रहेगा , किताबी ज्ञान और व्यवहारिकता का अंतर यही है … “कहीं की ईंट , कहीं का रोड़ा , केजरीवाल ने कुनबा जोड़ा” … खैर ये तो होना ही , एक हार भी नहीं सकी जो पार्टी वो क्या परिवर्तन करेगी देश में ….

आर. सिंह
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ऐसे तो आपके और मेरे विचारों में जमीन आसमान का अंतर है,अतः मैं पहले ही लिख चूका हूँ कि इसमे सार्थक बहस की कोई गुंजाइस नहीं रहती,फिर यह आलेख जिसका लिंक मैं नीचे दे रहा हूँ,आपके प्रश्नो का समुचित उत्तर होगा.
http://www.pravakta.com/nda-government#comment-71266

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