लेखक परिचय

राकेश कुमार आर्य

राकेश कुमार आर्य

'उगता भारत' साप्ताहिक अखबार के संपादक; बी.ए.एल.एल.बी. तक की शिक्षा, पेशे से अधिवक्ता राकेश जी कई वर्षों से देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। अब तक बीस से अधिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वर्तमान में 'मानवाधिकार दर्पण' पत्रिका के कार्यकारी संपादक व 'अखिल हिन्दू सभा वार्ता' के सह संपादक हैं। सामाजिक रूप से सक्रिय राकेश जी अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति के राष्ट्रीय सलाहकार भी हैं। दादरी, ऊ.प्र. के निवासी हैं।

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arun jaitelyनरेन्द्र मोदी सरकार में वित्तमंत्री अरूण जेटली ने अपना दूसरा आम बजट संसद में पेश किया है। जिसकी कुल मिलाकर सराहना की जा रही है। वैसे इस बजट को गंभीरता से पढ़ा व समझा जाए तो यह वास्तव में गांव-गरीब की चिंता करने वाला और उनके लिए कुछ करके दिखाने का संकल्प व्यक्त करने वाला बजट है। जिसमें प्रधानमंत्री का वह चुनावी नारा मूत्र्तरूप लेता दिखाई दे रहा है-जिसमें ‘सबका साथ और सबका विकास’ करने की बात कही गयी थी। लोगों को इस बजट की प्रतीक्षा थी। इस बजट ने भविष्य के लिए देश को उम्मीदों की डोर से बांधने का कार्य किया है और समीक्षकों को लग रहा है कि हमने शुभारंभ कर दिया है-अपने नये भारत के राजपथ के निर्माण का। यह राजपथ ही भारत को ‘अच्छे दिनों’ की ओर ले जाएगा।

वित्तमंत्री अरूण जेटली को इस बात के लिए भी बधाई दी जाएगी कि उन्होंने बजट पेश करते समय ऐसी शब्दावली का प्रयोग किया कि अपनी सारी बातें कहकर भी विपक्ष को शोर मचाने का अवसर नही दिया। सारा विपक्ष टकटकी लगाकर उन्हें सुनता रहा, जबकि सत्तापक्ष अपने वित्तमंत्री के समर्थन में तालियां बजाता रहा। इस प्रकार विपक्ष के नेताओं ने भी इस अवसर पर अपनी गंभीरता का परिचय दिया। जिसे देखकर लगा कि हम वास्तव में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का ध्यान रखने वाले लोग हैं।

वित्तमंत्री अरूण जेटली ने नये भारत के निर्माण के लिए नौ आधार चिन्हित किये हैं। इसमें पहला है किसानों की आय को पांच वर्ष में दोगुणा किया जाएगा। किसानों की स्थिति देश में सचमुच दयनीय है और उन्हें इस दयनीय स्थिति से उभारना सरकार का दायित्व है। यद्यपि पूर्व में भी किसानों के कल्याण को लेकर बजट में प्राविधान किये जाते रहे हैं, परंतु इस बार मोदी ने किसानों के उत्थान के लिए जैविक खेती को आधार बनाने की सोच को इस बजट में परिलक्षित कराना चाहा है। यदि यह योजना क्रियान्वित होती है तो सचमुच हम एक युगान्तरकारी योजना के साक्षी बनेंगे। हमारे किसानों के द्वारा नित्य आत्महत्याएं की जा रही हैं। उसके पीछे कारण है कि उनकी खेती महंगी कर दी गयी है। पानी, खाद, निराई, गुड़ाई, कटाई, निकासी आदि सभी को उसे पैसों से खरीदना या कराना पड़ रहा है। जिससे फसल के आने के समय जब वह अपना सारा हिसाब लगाता है तो ज्ञात होता है कि उसे बचा कुछ नही उल्टा कर्जा हो गया है। तब वह दुखी होकर आत्महत्या की ओर बढ़ जाता है। यदि आजकल किसानों को जैविक खादों से और पशुधन विकास कराके उनके गोबर से खेती कराने की पुरानी परंपरा को लागू करा दिया जाए तो हमारा किसान खुशहाल हो सकता है। जो किसान इस पद्घति से खेती करने लगे हैं-उन्हें अच्छे परिणाम मिल भी रहे हैं। इसलिए किसानों के लिए इस बजट में विशेष व्यवस्था करके प्रधानमंत्री ने देश के अन्नदाता की शुभकामनाएं अर्जित की हैं। जिसके लिए वित्तमंत्री अरूण जेटली भी बधाई के पात्र हैं।

गांव, गरीब और किसान की चिंता को मिटाने के लिए कृत संकल्प इस बजट को गांव के विकास के पथप्रदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिसमें अगले प्रमुख आधार के रूप में मनरेगा पर ध्यान देते हुए वित्तमंत्री ने इस योजना के लिए स्पष्टï किया है कि इसकी सफलता के लिए धन की कमी नही आने दी जाएगी। जब वैश्विक मंदी का दौर चल रहा हो तब किसानों पर सबसे अधिक ध्यान देकर वित्तमंत्री ने देश की समस्याओं को मिटाने के लिए उनके मूल पर कठोर प्रहार किया है। यह सच है कि इस आम बजट की मूल आत्मा आर्थिक और सामाजिक संतुलन के बीच रची-बसी दिखाई देती है, जबकि उद्देश्य जनसाधारण के जीवन स्तर को ऊंचा करना लगता है। जिससे देश के जनसाधारण में इस बजट से उम्मीदों का संचार हुआ है। वित्तमंत्री ने देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए लोगों को सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय देने के संवैधानिक संकल्प को पूर्ण करने का संकल्प इस बजट के माध्यम से किया है। इसलिए कुछ समीक्षक ने इस बजट को स्वतंत्र भारत में इतना अच्छा आने वाला देश का पहला बजट कहा है।

बजट की अगली विशेषता है-हर गरीब को एक लाख का बीमा देने की योजना की घोषणा। हमारा मानना है कि देश के हर व्यक्ति को या युवा को रोजगार देने के लिए उसे आर्थिक सहायता सरकार उपलब्ध कराये और उसका कोई भी रोजगार स्थापित कराके उसे आत्मनिर्भर बनाने का कार्य तो अवश्य ही करे। देश की कोई भी सरकार सारे देशवासियों के लिए नौकरी नही दे सकती। हां, हर व्यक्ति को जीविकोपार्जन का कोई साधन अवश्य दे सकती है, और देना भी चाहिए। सभी लोगों का शिक्षित किया जाना भी महाकठिन है, पर सभी को संस्कारित किया जा सकता है, जिसके लिए हमें विशेष योजनाएं बनानी पड़ेंगी। देश के धर्म और संस्कृति की रक्षार्थ जो सामाजिक संगठन पहले से कार्य कर रहे हैं, या करना चाहते हैं-उन्हें यह कार्य दिया जा सकता है।

बजट में सडक़ों का नेटवर्क तेजी से बढ़ाने की योजना पर कार्य करने का संकल्प भी व्यक्त किया गया है। देश के संतुलित, सुनियोजित और समुचित विकास के लिए इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सडक़ परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी भी बधाई के पात्र हैं। वह स्वयं ऐसा कार्य करना चाहते हैं, जिससे हर गांव-कस्बा देश की अन्य प्रमुख सडक़ों से जुड़ जाएं। हर युवा को रोजगार देने के लिए भागीरथ प्रयास करने की आवश्यकता है। जिसके लिए वित्तमंत्री विशेष चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

अब सब्सिडी भी गरीब या पात्र लोगों को सीधे दिये जाने की तैयारी की जा रही है। जिसे अब कानूनी जामा पहनाया जाएगा। इसे भी इस बजट की विशेषता कहना पड़ेगा। मोदी सरकार ने कॉरपोरेट जगत में भी टैक्स में विशेष बदलाव करने का निर्णय लिया है। सरकार ने पांच लाख की आय रखने वालों को 3000 रूपये की राहत दी है। नये कर्मचारियों का पीएफ तीन साल तक सरकार अपनी ओर से देगी। 50 लाख तक के घर पर ब्याज में पचास हजार की छूट दी जाएगी। हर कर योग सर्विस पर कृषि कल्याण टैक्स लगेगा। इनकम टैक्स स्लैब ज्यों का त्यों बना रहेगा। गृहमंत्रालय में बजट के 24.56 प्रतिशत वृद्घि कर दी गयी है। मनरेगा के लिए सरकार 38,500 करोड़ रूपये देगी। सिंचाई के लिए पांच वर्ष में 86,500 करोड़ रूपये दिये जाएंगे। जबकि 55,000 करोड़ रूपये सडक़ व हाईवे के लिए दिये जाएंगे।

इस प्रकार बजट हर क्षेत्र में समृद्घि की विस्तृत योजना को मूत्र्त रूप देने का प्रयास करता जान पड़ता है। जिसके लिए हमारे वित्तमंत्री धन्यवाद के पात्र हैं। गांव-गरीब एवं किसान की सेवा से ही देश आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी के चिंतन को स्पष्टï करने वाले इस बजट के माध्यम से देश का चतुर्दिश विकास हो, ऐसी हमारी शुभकामनाएं हैं।

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