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फखरे आलम

फखरे आलम

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berlin wallबर्लिन की दिवार को गिराऐ जाने का 25वाँ वर्षगाठ बड़े ही हर्ष व उल्लास के साथ जर्मनी में मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर विश्व भर से खुशियों में शामिल होने के लिऐ लोग जर्मनी में जमा हो रहे हैं। आध्ुनिक और प्रगतिशील पश्चिमी बर्लिन जो कभी कम्यूनिष्ट रूस का उपनिवेश रह चुका है। पश्चिमी बर्लिन और पूर्वी बर्लिन एक ही प्रान्त के दो भाग, और दोनों भागों में गजब की असमानता, प्रगति और विाकस के क्षेत्रा का एक जमीन तो दूसरा आसमान कहा जा सकता है। पूर्वी बर्लिन, पश्चिमी बर्लिन की अपेक्षा अत्यन्त पिछड़ा और अविकसित माना जा सकता है। यहाँ पर रोजगार के कम अवसर और जनता अधिक गरिब और पिछड़ा है।

दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी को परास्त का मुँह देखना पड़ा था। और विश्व युद्ध के अगलवा और विजेताओं ने जर्मनी पर अपना अपना अधिपत्य और जमर्नी को कमजोर बनाऐ रखने के लिए जमर्नी को चार भागो में बाँटकर अपना अपना उपनिवेश बना डाला था। जमर्नी के उत्तरी भाग ब्रिटेन के, मध्य भाग अमेरिका के दक्षिणी भाग, प्रंफास और पश्चिमी भाग रुस ने हथिया लिया था। जब तीनों महाशक्ति और रूस के मध्य विरोधाभास का जन्म हुआ और शीत युद्ध ने अपना सिर उठाया तो बन्दर बाँट में बाधाऐं उत्पन्न होने लगी। जमर्नी के परास्त पर उनके भागों को विजेताओं ने अपने अपने हिस्से में बाँट तो लिया मगर बर्लीन की अन्र्तराष्ट्रीय हैसियत को नजर में रखते हुए इस भाग को स्वतंत्रा ही छोड़ दिया गया।

शीत युद्ध के समय ब्रिटेन, अमेरिका और प्रंफास के अध्ीन का जर्मन भाग पश्चिमी जमर्नी और रूस के अधिकार वाला क्षेत्रा पूर्वी जमर्नी के नाम से जाना जाने लगा। जबकि बर्लिन को दो भागों में अर्थात पश्चिमी और पूर्वी बर्लिन के नाम से विभाजित कर दिया गया। प्रारम्भ में बर्लिन के दोनों भागों के मध्य कोई दीवार नहीं थी। लेकिन आर्थिक तंगी और गरीबी के कारण पूर्वी जर्मनी के 35 लाख से अधिक लोगों ने बेहतर भविष्य और अपनी स्थिति बेहतर बनाने के लिऐ पश्चिमी जर्मनी की ओर पलायन किया तो सीमाएं बंद करके 13 अगस्त 1961 को पश्चमी बर्लिन के चारों ओर 168 कि.मी. लम्बी दीवार खीच दी गई। इस प्रकार एक शहर दो भागों में विभक्त हो गया। यह दीवार पलान को रोकने के साथ-साथ पूर्वी और पश्चिमी जमर्नी के मध्य सीमाओं का निर्धरण भी करने लगा जबकि अन्र्तराष्ट्रीय पटल पर इसे पश्चिमी यूरोप और पूर्वी देशों के मध्य का मनमुटाव के रूप में भी देखा जाता रहा।

बर्लिन की दिवार ने लगभग तीन दशकों तक पलायन को रोका और इस दीवार को पार करते समय हजारों लोग मारे गऐ। पूर्वी देशों के प्रयास के कारण जो उन्होंने जमर्नी के निवासियों में पैदा की कुछ ही दिनों में पूर्वी जमर्नी की सरकार ने जनता के प्रभाव में आकर 9 नवम्बर 1989 को पश्चिमी जमर्नी में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध् को हटा लिया, जिसके कारण पूर्वी जमर्नी के हजारों लोगों ने दीवार फलाग कर पश्चिमी जमर्नी में प्रवेश कर गऐ और इस घटना के कुछ दिनों के पश्चात ही जनता ने सामूहिक रूप से दिवार को गिरा दिया। और बर्लिन की दिवार इतिहास का अध्याय बन गया। दीवार के दोनों भागों पर, दोनों क्षेत्रों के निवासियों ने अजीब व गरीब तरह के चित्र बना रखे थे। जब दीवार पूरी तरह गिरा दी गई तो दीवार के पत्थर का अनोखा रंग और आकार सामने आया जिसे छोटे छोटे टुकड़ों में विभक्त पत्थरों को पर्यटकों को बेचा गया और बड़े-बड़े व्यापारियों और उद्योग जगत के लोगों ने विश्व भर में उपहार स्वरूप भेंट किऐ थे। आज जमर्नी के लोग विश्व भर के लोगों के साथ मिलकर खुशियां बांट रहे हैं।

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