लेखक परिचय

सिद्धार्थ शंकर गौतम

सिद्धार्थ शंकर गौतम

ललितपुर(उत्तरप्रदेश) में जन्‍मे सिद्धार्थजी ने स्कूली शिक्षा जामनगर (गुजरात) से प्राप्त की, ज़िन्दगी क्या है इसे पुणे (महाराष्ट्र) में जाना और जीना इंदौर/उज्जैन (मध्यप्रदेश) में सीखा। पढ़ाई-लिखाई से उन्‍हें छुटकारा मिला तो घुमक्कड़ी जीवन व्यतीत कर भारत को करीब से देखा। वर्तमान में उनका केन्‍द्र भोपाल (मध्यप्रदेश) है। पेशे से पत्रकार हैं, सो अपने आसपास जो भी घटित महसूसते हैं उसे कागज़ की कतरनों पर लेखन के माध्यम से उड़ेल देते हैं। राजनीति पसंदीदा विषय है किन्तु जब समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भान होता है तो सामाजिक विषयों पर भी जमकर लिखते हैं। वर्तमान में दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, हरिभूमि, पत्रिका, नवभारत, राज एक्सप्रेस, प्रदेश टुडे, राष्ट्रीय सहारा, जनसंदेश टाइम्स, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, सन्मार्ग, दैनिक दबंग दुनिया, स्वदेश, आचरण (सभी समाचार पत्र), हमसमवेत, एक्सप्रेस न्यूज़ (हिंदी भाषी न्यूज़ एजेंसी) सहित कई वेबसाइटों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं और आज भी उन्‍हें अपनी लेखनी में धार का इंतज़ार है।

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सिद्धार्थ शंकर गौतम

११ तारीख रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान पर अपने एक दिन के सांकेतिक अनशन में अन्ना ने लोकपाल बिल पर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाये| सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बार अन्ना ने सीधे-सीधे राहुल गाँधी को मजबूत लोकपाल बिल पास न कराने का आरोपी ठहरा दिया| राहुल पर आरोप लगते ही चौतरफा घिरे कांग्रेसियों के खून में मानो उबाल आ गया| अन्ना पर उनका हमला देख ऐसा लगा जैसे अन्ना में बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया हो| सरकार, कांग्रेस पार्टी के नेता समेत कुछ राजनीतिक दल ( जिनकी राजनीति की दुकान ही कांग्रेसी आशीर्वाद से चलती है ) ने एकजुट होकर अन्ना को धमकी भरे अंदाज़ में चेतावनी दी कि वे राहुल की राह का काँटा न बने| कभी मुलायम सिंह के हाई-प्रोफाइल समाजवाद को ढ़ोने वाले और वर्तमान में कांग्रेसी सेकुलरिस्म की राजनीति में रम चुके बेनी बाबू ने तो अन्ना को सीधे तौर पर धमकी दी कि यदि उन्होंने राहुल के खिलाफ दुष्प्रचार बंद नहीं किया तो उत्तर प्रदेश आने पर उन्हें देख लिया जाएगा| बेनी प्रसाद वर्मा यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि यदि अन्ना की उम्र ७५ वर्ष है तो कांग्रेस भी १२५ साल पुरानी पार्टी है| हम अन्ना से डरने वाले नहीं हैं| अब बेनी बाबू को कौन समझाए कि जिस कांग्रेस पार्टी को वे १२५ साल पुरानी बतला रहे हैं, उसे तो इंदिरा गाँधी ने ३५ वर्ष पहले ही तोड़ दिया था| इस लिहाज से तो आज कि कांग्रेस अन्ना की उम्र से काफी छोटी है| क्या राहुल पर सीधा हमला बेनी बाबू को इतना उद्वेलित कर गया कि उन्हें कांग्रेस के इतिहास का भी भान नहीं रहा?

बिहार में अपनी साख और सरकार गवां चुके लालू प्रसाद यादव ने भी बहती गंगा में हाथ धोकर स्वयं को कांग्रेस हितैषी साबित करने में कोई कसर बाकी न रखी| उन्होंने राहुल का नाम लिए बगैर अन्ना पर हमला बोलते हुए कहा कि अन्ना ने १८० सांसदों के लिए जिस अभद्र भाषा का प्रयोग किया है वह देश को अराजकता की ओर ले जाएगा| अब पता नहीं लालू यादव को अन्ना की भ्रष्टाचार मुहिम में ऐसा क्या सुनाई पड़ा जो देश में अराजकता का माहौल पैदा कर सकता है? हाँ, नेताओं का भ्रष्ट होना नहीं रुका तो देश की जनता ज़रूर अराजक हो जाएगी| कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. वी. हनुमंत राव ने भी अन्ना पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्ना को राहुल के विरोध में दुष्प्रचार बंद कर देना चाहिए| राहुल कांग्रेस महासचिव है और हम उनकी आलोचना नहीं सुन सकते| वे सरकार का हिस्सा भी नहीं हैं तो अन्ना उन्हें क्यों निशाना बना रहे हैं? यह राहुल के विरुद्ध संघ और भाजपा का कुचक्र है ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके और अन्ना उनके लिए यह काम बखूबी कर रहे हैं| कांग्रेस प्रवक्ता राशिद आल्वी ने भी अन्ना पर जमकर निशाना साधा| लोकपाल पर खुली बहस में कांग्रेस के हिस्सा न लेने के फैसले का बचाव करते हुए आल्वी ने कहा कि जिस मंच पर हमारे नेता सोनिया और राहुल की आलोचना हो रही हो, वहां हम कैसे जाते? लगता है आल्वी जी और कांग्रेस के लिए देश हित से बड़ा मुद्दा है सोनिया और राहुल की आलोचना में भागीदार न बनना और उसे रोकने का हरसंभव प्रयास करना|

विवादास्पद बयानों के धनी कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी अन्ना के राहुल विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राहुल ने जब इस मुद्दे पर कुछ कहा ही नहीं है तो अन्ना क्यों उन्हें बदनाम कर रहे हैं? उन्होंने अन्ना पर भाजपा के इशारों पर काम करने का भी आरोप लगाया| सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, संसदीय कार्यमंत्री नारायण सामी, कांग्रेस सांसद बालचंद्र मुंगेवर, असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई सहित तमाम बड़े कांग्रेसी नेताओं ने अन्ना के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए राहुल का बचाव शुरू कर दिया है| ऐसे में कांग्रेस के अन्ना के प्रति बढ़ते हमले से यह सवाल पैदा हो गया है कि क्या कांग्रेस अन्ना से वाकई डर गई है? क्या पार्टी को लगता है कि राहुल की राजनीति की धार को अन्ना कुंद करने का माद्दा रखते हैं? क्या राहुल को प्रधानमंत्री पद का स्वाभाविक दावेदार घोषित करना कांग्रेसी मानसिकता मात्र है? अन्ना के रहते क्या राहुल का उत्तर प्रदेश फतह का सपना पूरा होगा?

इन जैसे तमाम सवालों का शायद यही जवाब है- हाँ? कांग्रेस वाकई में अन्ना से डर गई है| पार्टी के नेताओं को लगता है कि राहुल का विरोध कर अन्ना शहरी युवा वोटरों को कांग्रेस से दूर कर देंगे| राहुल उत्तर प्रदेश चुनाव में अपनी पूरी प्रतिष्ठा दांव पर लगा चुके हैं| जोड़-तोड़ की राजनीति चरम पर है| अब यदि अन्ना सीधे तौर पर राहुल के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे तो राहुल सहित पार्टी को नुकसान होना तय है| वैसे कांग्रेसियों की यह सोच भी गलत नहीं है| भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम से अन्ना ने युवाओं के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर आकर्षित किया है| सोशल नेटवर्किंग साइट्स; जहां युवा एक सशक्त माध्यम हैं; ने भी अन्ना के आंदोलन में सहभागिता की है| युवाओं का यह वही वर्ग है जिसे लेकर कांग्रेस के नेता यह दावा करते हैं कि यह राहुल के साथ है| अब जबकि यह वर्ग खुलेआम अन्ना के साथ अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर रहा है तो यह राहुल के साथ कैसे हुआ? फिर युवा ही क्यों; अन्ना की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम से समाज के हर वर्ग और तबके का आम-आदमी जुड़ा है| यह भी वही आम आदमी है जिसके साथ का दावा कांग्रेस का हाथ किया करता है| जब हर तरफ से हाथ का साथ छूट रहा हो तो इसके नेताओं में बेचैनी स्वाभाविक है| ऐसे में नेहरु खानदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाने के चक्कर में कांग्रेस के नेताओं में अजीब सी घबराहट है जो उनसे ऊल-जुलूल वयक्त्व्यों में स्पष्ट दिखाई देती है| ऐसे में हो सकता है अन्ना राहुल की राजनीति को उतना नुकसान न पहुंचाए जितना खुद कांग्रेस के नेता अपनी फिसलती जुबान से पहुंचा दें| यदि कांग्रेस के नेताओं को वाकई में राहुल चमत्कारिक व्यक्तित्व लगते हैं तो कांग्रेस और सरकार को चाहिए कि वे जनभावनाओं का सम्मान करते हुए भ्रष्टाचार मुक्त भारत का आम आदमी का सपना पूरा करें वरना तो “युवराज” राहुल कहीं युवराज ही न रह जाएँ|

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1 Comment on "अन्ना बनाम राहुल की जंग से कांग्रेस की बौखलाहट आई सामने?"

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इक़बाल हिंदुस्तानी
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अन्ना के विरोधी भ्रष्ट हैं उनका बोख्लाना मुमकिन है लेकिन अन्ना के साथ जनता है वे दर नहीं सकते बल्कि सर्कार बदल सकते हैं.

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