लेखक परिचय

डॉ नीलम महेन्द्रा

डॉ नीलम महेन्द्रा

समाज में घटित होने वाली घटनाएँ मुझे लिखने के लिए प्रेरित करती हैं।भारतीय समाज में उसकी संस्कृति के प्रति खोते आकर्षण को पुनः स्थापित करने में अपना योगदान देना चाहती हूँ।

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कन्हैया कुमार

कन्हैया कुमार

देश का आम नागरिक बहुत सीधा साधा है वह वही देखता है जो दिखाया जाता है और वही सुनता है जो सुनाया जाता है,कोई प्रतिकार नहीं करता किन्तु समझदार भी बहुत है,वह उपयुक्त समय पर प्रतिक्रिया अवश्य देता है ।जब से कन्हैया कुमार जेल से बेल पर रिहा हुआ है प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रानिक मीडिया उसी के चर्चे हो रहे हैं।बाहर आते ही उसके सीखे सिखाए भाषण का सीधा प्रसारण ,रात को प्राइम टाइम पर प्रमुख चैनलों द्वारा उसके साक्षात्कार का प्रसारण इत्यादि इत्यादि। न्यायपालिका ने उसे जमानत पर रिहा किया है बाइज्जत बरी नहीं किया है ऐसे युवक को नायक की तरह प्रस्तुत करना! मीडिया में तमाम बुद्धिजीवी वर्ग होता है क्या वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं? क्या वे अपनी कही हुई बात का महत्व और उसका आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव से वाकिफ हैं?
अब कुछ सवाल कन्हैया कुमार से ———-
तुम बिना नाम लिए एक बी जे पी नेता से पूछ रहे हो कि क्या उनका भाई सरहद पर है मैं पूछना चाहूँगी क्यों? ताकि तुम उसके शहीद होने का जश्न मना पाओ जैसे तुमने दंतेवाड़ा के शहीदों मनाया था! और शायद इसलिए तुम्हारा भाई सरहद पर नहीं है और न ही होगा।तुम्हें देश के किसानों की, बच्चों की,आम आदमी के अधिकारों की बहुत चिंता है , देश के लिए कुछ करना चाहते हो तो देश सेवा की सच्ची नौकरी करने सेना में क्यों नहीं गए जिसमें तुम्हें सचमुच देश के लिए कुछ करने का मौका मिलता? तुम नेताओं जैसे भाषण देकर देश का कौन सा भला कर रहे हो?और यदि भाषण देकर ही देश का भविष्य सुधार सकते हो तो कोई नीति ही बता देते हम कुछ सीख ही लेते लेकिन तुमने तो वही 66 सालों पुराने राजनैतिक मुद्दे ही उठाए जिनमें से वामपंथ और दलित राजनीति की बू आ रही थी।तुमने कहा कि जे एन यू में रिसर्च स्कौलर पढ़ते हैं और विज्ञान पढ़ना अलग बात होती है वैज्ञानिक बनना अलग तो मेरे भाई मैं जे एन यू के एक रिसर्च स्कोलर के भाषण में देश के जटिल मुद्दों का कोई वैज्ञानिक हल ढूंढ रही थी।
तुमने कहा तुम्हें आजादी चाहिए भारत “से” नहीं भारत” में ” किस चीज़ की आजादी?जिस गरीबी और भुखमरी की बात तुम कर रहे हो वो 1.5 साल में नहीं आई वो तो 66 साल पुरानी है मेरे भाई! अगर तुम सच में इन्हें दूर करना चाहते तो सरकार के बगल में खड़े होकर उसे मजबूती प्रदान करते अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर उसे कमजोर नहीं करते।और कुछ नहीं तो अपने भाषण में कोई सृजनात्मक सुझाव ही दे देते!अभिव्यक्ति की आजादी तो इस देश में इतनी है मेरे भाई कि जिस छात्र नेता की सभा में देश को खण्ड खण्ड करने के नारे उसके सामने लग रहे हो और वह चुपचाप खड़ा हो उसे अपनी बात कहने का मौका दिया जा रहा है सीधे गोली या फाँसी नहीं दी जा रही।
तुम कह रहे हो तुम्हें न्याय पालिका पर पूरा भरोसा है तो यह भरोसा उस दिन कहाँ था जिस दिन तुम अफजल गुरु की फाँसी का विरोध कर रहे थे ?मेरे ख्याल से तुम सही कह रहे हो तुम्हें उस दिन नहीं था लेकिन आज है क्योंकि तुम जेल से बेल पर बाहर आ गए नहीं तो तुम जानते हो तुम्हारे साथ क्या हो सकता था। तुम कहते हो तुम्हारा आदर्श रोहित है तो तुम शायद यह भूल गए मेरे भाई कि रोहित ने भी अफजल गुरु की फाँसी का विरोध किया था लेकिन तुम्हें तो भारत की न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है !
इसे भारत की महानता कहें या मीडिया की मूर्खता कि देश के विरुद्ध नारे लगाने वाले, देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलने वाले,शब्दों के मायाजाल को इस्तेमाल करने वाला युवक खलनायक बनकर जेल तो जाता है लेकिन निकलता नायक बन कर है
जिसका स्वागत मीडिया द्वारा ऐसा किया जाता है जैसा शायद किसी सैनिक का भी ड्यूटी से घर वापस आने पर नहीं होता होगा।
तुम कहते हो जे एन यू देश के उन गिने चुने विश्वविद्यालयों में से एक है जो रिजर्वेशन कोटा के नियम का पालन करके आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को पढ़ने का मौका देता है तुम खुद एक ऐसे परिवार से हो जिसकी मासिक आय तीन हजार रुपए है।साथ ही तुम्हें चाहिए जातिवाद से आजादी तो मेरे भाई यदि जातिवाद से पूरी आजादी मिल गई तो तुम्हारे बहुत से साथी अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाएंगे! तुम्हें संघवाद से आजादी चाहिए संघ को तो पूरे देश ने कई बार देखा है देश की विषय परस्थितियों मे आगे बढ़ कर देश सेवा करते हुए चाहे वे बाढ़ ग्रस्त इलाके हो या भूकंप पीड़ित प्रदेश तो क्या संघ से आजादी के बाद तुम अपने परिवार के साथ ऐसी परिस्थितियों में देश की सेवा के लिए आगे आओगे?
तुम चाहते हो चपरासी का बेटा और राष्ट्रपति का बेटा एक ही स्कूल में पढ़े तो मेरे भाई तुम उसी जे एन यू में पढ़ रहे हो वो भी एक आम आदमी के पैसे से जिसमें से सुषमा स्वराज सीता राम येचुरी जैसे अनेक दिग्गज पढ़कर निकले हैं ।
तुम्हें मोदी जी के स्टेलिन पर बोलने पर टीवी मे घुस जाने की इच्छा हो रही थी तो मुझे भी तुम्हारे जातिवाद और भ्रष्टाचार पर बोलने पर जे एन यू में घुस जाने की इच्छा हो रही थी कि जिन 66 साल पुराने मुद्दों की बात कर रहे हो जो कि पुरानी सरकारों की देन हैं और सबसे ज्यादा तुम्हारे खुद के राज्य बिहार में फैली है तो यह भाषण तुमने पटना यूनिवर्सिटी में क्यों नहीं दिया?
तुम्हें दाल की कीमत पर एतराज है तो मेरे भाई इसके पहले जब प्याज ने रुलाया था काँग्रेस के शासन में तब तुम्हारी आँख नम क्यों नहीं हुई?
तुम कहते कि वे मन की बात कहते हैं सुनते नहीं हैं तो मेरे भाई तुम्हारे मन की बात बहुत पहले ही उन्होंने सुन ली थी तभी तो तुम्हारी मन की बात उनसे मिल गई”सत्यमेव जयते ”
तुम कहते हो कि वे मन की बात तो करते हैं माँ की बात नहीं तो मेरे भाई तुम्हारी माँ शब्द की व्याख्या तनिक स्वार्थी और सीमित है इसलिए तुम अपनी माँ की बात करते हो लेकिन उनकी माँ शब्द की व्याख्या व्यापक है इसलिए वे भारत माता की बात करते हैं, वे उन माताओं की बात करते हैं जिनके बच्चे सरहद पर शहीद हो रहे हैं।
जहाँ तक मेरी जानकारी है तुम 28 साल के हो यानी जब देश में शारदा घोटाला (2013) ,कोयला घोटाला (2012) कामनवेल्थ गेम्स घोटाला (2010) हुआ था तुम लगभग 20 वर्ष के आसपास के थे ,इन भ्रष्टाचारों को समझ सकते थे तो तुमने तब नारे क्यों नहीं लगाए  “भ्रष्टाचार से आजादी”?
तुम कहते हो कि देश की जनता भूल जाती है लेकिन मेरे भाई तुम यह बात याद रखना कि तुम भी कुछ नेताओं द्वारा इस्तेमाल करके भुला दिए जाओगे।
अब कुछ बातें उन विषयों की जो तुम्हारे ओजस्वी भाषण में नहीं थी।जैसे उमर खालिद और अनिबार्न जिनका तुमने जिक्र तक नहीं किया!शायद इसलिए कि अगर तुम उनका समर्थन करते तो जो अभी कह रहे थे वो कह नहीं पाते और अगर विरोध करते तो जो उस दिन कहा उस पर प्रश्न चिह्न लग जाता अत:बड़ी  चालाकी से पूरे मुद्दे को दबा गए।
तुम जिन मुद्दों के लिए जेल भेजे गए थे –कश्मीर की आज़ादी,अफजल गुरु की फाँसी,बेल पर बाहर आने पर तुम्हारे मुद्दे ही बदल गए!तुमने अपने भाषण में इनका नाम तक नहीं लिया?चलो जेल की चार दीवारी की सीमाओं ने तुम्हें अभिव्यक्ति की आजादी की सीमाओं का ज्ञान तो करा दिया!तुम्हारे हाथ में सही झण्डा तो पहुँचा दिया?भारत माता की जय बोलना सिखा दिया!
तुम जिस वामपंथी विचारधारा की बात करते हो,जिस लाल सलाम की बात करते हो यह भूल जाते हो कि उसी वामपंथ की सरकार इतने सालों से पश्चिमी बंगाल में है और आज भी वह देश के सबसे पिछड़े और गरीब प्रदेश में शामिल है इतने सालों में पश्चिम बंगाल की सरकार वहाँ से गरीबी नहीं मिटा पाई।जिस अभिव्यक्ति की आजादी की बात तुम करते हो आज से कुछ साल पहले तसलीमा नसरीन उसी आजादी को माँग रही थी  पश्चिम बंगाल सरकार सेलेकिन उन्हें बंगाल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा ।
तुम कहते हो तुमने कोई देश विरोधी गतिविधि नहीं की।देश की संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु की फाँसी का विरोध क्या देश भक्ति की श्रेणी में आता है? एक प्रश्न यह भी कि अगर तुम सही कह रहे हो और तुम एक देश भक्त हो तो तुम्हें अपने देश का नाम बताना होगा जिसकी भक्ति तुम कर रहे हो। हे कोई जबाब ?

डॉ नीलम महेंद्रा

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6 Comments on "है कोई जबाब ? कन्हैया कुमार"

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mahendra gupta
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बिलकुल सहमत हूँ नीलमजी मैं आप के सवालों से , आज देश में भाषण दे कर बरगलाने का एक चलन हो गया है , हमारे बाइक हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इस रोग को बहुत बढ़ाया है , और बिना वजह ही ऐसे नेता जन्म ले लेते हैं , हालाँकि इनकी जीवन लीला ज्यादा दिन नहीं चलती क्योंकि यथार्थ के धरातल पर आ कर इनके पाँव डगमगाने लगते हैं , और फिर वे घृणा, विभाजन की नीति अपनाते हैं , केजरीवाल इसकी एक अच्छी मिसाल हैं वह भी मीडिया पुत्र हैं और कन्हैया भी केवल इसी जुगत में है

डॉ. मधुसूदन
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डॉ. मधुसूदन

*एक कन्हैया नामक चुहिया*

कन्हैया नामक चुहिया ने सूर्योदय पर देखी परछाई।
आस्मान तक देख परछाई नापी अपनी ऊंचाई।
॥१॥
लम्बी लम्बी देख छाया, चूहा बहुत मुस्काया।
ऊंचा उठाकर हाथ सूर्य को देने लगा चुनौतियाँ।
॥२॥
कुछ चूहों की बजी तालियाँ, उसकी मति पगलाई।
आस्मान तक देख परछाई नापने लगा ऊंचाई।
॥३॥
लाल रंगका कुत्ता आया, ऊंची पीछली टांग किया।
चूहे पर धारा सीतल बहाकर अपना काम किया।
॥४॥
सिंचित हुआ चूहा अब तो लिडर कहलाता है।
रोज सबेरे आवन जावन सबका दिल बहलाता है।
॥५॥

शकुन्तला बहादुर
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वाह ! वाह !!
शकुन बहादुर

Himwant
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जेएनयुको उनलोगों ने सशस्त्र, हिंसक एवं आतंकी नक्सली माओवादीयों का क्षेत्रीय मुख्यालय बना रखा था. उनलोगो को विश्व मुख्यालय देश के बाहर है. कहाँ है ???

Kapil Yadav
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वाह बहुत खूब !

बी एन गोयल
Guest
बी एन गोयल

अच्छी व्याख्या की है – अगर कोई समझना चाहे –

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