लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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adhdattention deficit hyperactivity disorder (ADHD)

(ध्यान की कमी  अति सक्रियता विकार के लियें पूरे लेख मे ADHD का प्रयोग किया जायेगा )

यह विकार काफ़ी बच्चों मे होता है , जोकि बड़े होने तक भी बना रहता है।यह मस्तिष्क का विकार है मस्तिष्क की इमजिंग करने पर पता चला है कि मस्तिष्क का विकास औसतन तीन साल पिछड़ा रहता है। ADHD किसी चीज़ पर ध्यान देना, एकाग्र होना, व्यवहार पर नियंत्रण रख पाना मुश्किल होता है, अतः बच्चे पढ़ाई मे पिछड़ने लगते हैं, दोस्त बनान मुश्किल होता है। अपने काम समय से नहीं कर पाते। मस्तिष्क के उन क्षेत्रों मे बदलाव नज़र आता है जो विचार ध्यान और योजना बनाने क्षमता को नियंत्रित करते हैं।हाल मे हुए अनुसंधानो से पता चलता है कि मस्तिष्क की बाहरी सतह की परिपक्वता भी देर से आती है।मस्तिष्क के दोनों भागों मे भी संचार सामान्य नही होता।यद्यपि अभी तक इस विकार का कोई इलाज नहीं है पर उचित प्रबंधन और प्रशिक्षण से बहुतसे लक्षणों पर क़ाबू पाया जा सकता है।

ध्यान की कमी के लक्षण-

  •  बहुत आसानी से ध्यान बंट जाता है, किसी चीज़ की बारीकियां छुट जाती हैं, एक काम करते करते दूसरा काम शुरू कर देंगे।
  •  किसी काम मे एकाग्रता लाना बहुत कठिन होता है।
  •  किसी भी काम से जल्दी उकता जाते हैं।
  •  ध्यान एक चीज़ मे नहीं लगता, चीज़ ठीक से लगाना या नया काम सीखना कठिन होता है।
  •  स्कूल से मिला गृहकार्य पूरा न कर पाना, चीज़े खोना जैसे पैंसिल रबर वगैरह।
  •   कुछ कहा जाय तो ऐसा लगे कि बच्चा सुन ही नहीं रहा है।
  •  दिवास्वप्न की स्थिति मे रहना धीरे धीरे काम करना परेशान होना।
  •  सूचनाओं को अपनी उम्र के अन्य बच्चो की तरह न ग्रहण करना, या न समझ पाना।
  • आदेशों को न समझना उनपर ध्यान न  देना।

 

अतिसक्रियता के लक्षण-

  •  अपनी कुर्सी पर सीधे नहीं बैठेंगे, कुलबुलाते और छटपटाते रहेंगे।
  •  अपने आस पास की हर चीज़ को छूते, खेलते रहेंगे।स्कूल मे, कहानी सुनने के समय या खाने के समय एक जगह नहीं बैठे रह पायेंगे।
  •  लगातार घूमते रहेंगे स्थिर नहीं रह पायेंगे।
  • चुपचाप बैठकर कोई काम नहीं कर पायेंगे।
  •  लगातार कुछ न कुछ बोलते रहेंगे।

आवेगी व्यवहार के लक्षण-

  • धैर्य की बेहद कमी।
  •  किसी के लियें बिना सोच विचार के ग़लत बातें बड़बड़ाते रहेंगे, दूसरे पर या उनपर उसका क्या असर हो सकता है, यह सोचे बिना।
  •  किसी का इंतज़ार नहीं कर पायेंगे जैसे खेल मे अपनी बारी आने का।
  •  दूसरों के काम मे बाधा डालते रहेंगे।

ADHD केमुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं-

1मु्ख्य रूप से अति सक्रिय और आवेगी (Predominantly hyperactive -impulsive )- जिनमे 6 या उससे अधिक लक्षण अति सक्रियता और आवेग के हों।ध्यान न लगा पाने के लक्षण  6 से कम दिखे तो इस श्रेणी का ADHD  माना जायेगा अर्थात मुख्य समस्या अति सक्रियता और आवेगी व्यवहार हो और ध्यान न लगा पाने की समस्या गौण हो।

2 मुख्य समस्या ध्यान न लगा पाना [  Predominantly  inattentive ]-  इस प्रकार के ADHD ध्यान लगाने की समस्या अधिक प्रखर होती है, अति सक्रियता की समस्या होती है पर कुछ कम।

3 ध्यान न लगा पाने और अतिसक्रियता की समस्या लगभग बराबर हो [Combined hyperactiveimpulsive and  inattentive ] अधिकांश बच्चे इसी श्रेणी मे आते हैं।

लक्षण

ADHD के अंन्तर्गत ध्यान की कमी, अतिसक्रियता और आवेगी व्यवहार आता है।यदि बच्चों का व्यवहार  इस प्रकार का हो, उस आयु के अन्य बच्चों के मुक़ाबले वो अति सक्रिय लगें, आवेगी लगें या किसी काम मे मन न लगा पाने जैसे लक्षण गंभीर लगें तो उन्हे 6 महीने तक विशेषज्ञों की निगरानी मे, अवलोकन(observation) मे रखना चाहिये।

कारण

ADHD के कारणों के बारे मे अभी तक यही माना जाता है किये अनुवांशिक होता है  ,किसी जीन के कारण होता है इस पर बहुत अनुसंधान हो रहे हैं । किसी सर की चोट , कुपोषण या सामाजिक वातावरण का भी योगदान हो सकता है।

निदान

हर बच्चे का व्यक्तित्व अलग होता है, सभी को किसी न  किसी समय ध्यान लगा ने मे दिक्क़त हो सकती है, सभी थोड़ बहुत आवेगी हो सकते हैं लेकिन वो ADHD से पीडित नहीं होते, सामान्य बच्चे होते हैं। 3-6 साल की आयु मे  ADHD के लक्षण प्रकट हो सकते हैं जिनका निदान कर पाना बहुत मुश्किल होता है।इस विकार मे माता पिता को महसूस होता है कि बच्चा हर काम से रुचि खोता जा रहा है जैसे वह हाथ से निकल गया हो। उसे नियंत्रण मे रख पाना कठिन होता जाता है।

अधिक तर बच्चो की असमान्य गतिविधियों पर अध्यापकों की नज़र जाती है। ADHD के निदान के लियें कोई परीक्षण नहीं है सबसे पहले बच्चे को बच्चों के चिकित्सक (pediatricians) को दिखाना चाहिये जिससे वो पता लगा सकें कि कोई और बीमारी तो नहीं है। कुछ चिकित्सकों को ADHD का अनुभव होता है, यदि ADHD शक हो तो मनोचिकित्सक जिनका बच्चों की मानसिक बीमारियों  (paediatric  Psychiatrist) के बारे मे ज्ञान को दिखाना चाहिये।

ये चिकित्सक पहले बच्चे के व्यवहार जांच परख करेंगे, स्कूल से उनके अध्यापकों से उनके व्यवहार का ब्यौरा लेंगें,माता पिता से बात चीत करेंगे और इन्हे यह निर्णय लेने मे कुछ समय लगेगा कि बच्चे को ADHD है या कोई अन्य विकार है।

उपचार-

यद्यपि ADHD  का कोई इलाज नहीं है पर कुछ दवाइयाँ हैं जो लगातार देने से बहुत सुधार होता है, साथ मे व्यावाहरिक चिकित्सा और सायकोथैरेपी कांउंसैलिग भी चलती है।माता पिता को भी इन बच्चों का लालन पालन करने के लियें प्रशिक्षित किया जाता है। चिकित्सा के नतीजे अच्छे निकलते हैं जिससे बच्चे एक सामान्य जीवन जी सकते हैं।

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1 Comment on "ध्यान की कमी अति सक्रियता विकार"

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vijay nikore
Guest

इस लाभदायक लेख के लिए धन्यवाद और बधाई।
विजय निकोर

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