लेखक परिचय

शिखा वार्ष्‍णेय

शिखा वार्ष्‍णेय

लंदन(यूके) निवासी स्‍वतंत्र पत्रकार-लेखिका।

Posted On by &filed under राजनीति.


-शिखा वार्ष्णेय

यह हमेशा न्‍यायाधीश की भूमिका में रहनेवाला भारतीय मीडिया का शर्मनाक अध्‍याय है। मीडिया खुद कटघरे में खड़ा हो रहा है। देश के प्रतिष्ठित इलेक्‍ट्रॉनिक चैनल एनडीटीवी से जुड़ी बरखा दत्त के दामन किस कदर दागदार हैं इसका पता चलता है हाल ही में सामने आए एक फोन टेंपिंग मामले से, जिसमें केंद्रीय संचार मंत्री पद पर एक घुसखोर नेता ए.राजा को काबिज कराने व इस मंत्रालय से कॉरपोरेट घरानों को लाभ दिलाने को लेकर बरखा दत्त राजनीतिक लॉबिंग कर रही है।

स्पेक्ट्रम घोटाले से चर्चा में आई नीरा राडिया और बरखा दत्त के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत जिसका अनुवाद शिखा वार्ष्णेय ने किया है ,प्रस्तुत है। इस बातचीत से साफ़ पता चलता है कि बरखा ने राजा की ताजपोशी के लिए गुलाम नबी आजाद से मदद ली और तो और बालू और मारन को हटाने के लिए करूणानिधि और उनकी बेटी का भी इस्तेमाल किया।

राडिया : नमस्ते , क्या मैंने तुम्हें जगा दिया?

बरखा : नहीं नहीं नहीं ,मैं उठी हुई थी ,हाँ लगभग पूरी रात

राडिया : हाँ , सुनो ,बात यह है कि उन्हें उससे ही बात करनी है , समस्या इसी वजह से है.

बरखा: हाँ , लगता है पी एम वास्तव में इस बात से नाराज हैं कि वो जनता में गए.

राडिया : पर वह तो बालू कर रहा है ना , करूणानिधि ने उसे ऐसा करने को नहीं कहा है

बरखा : ओह , उन्होंने नहीं कहा?

राडिया : नहीं .उसे बाहर आकर यह कांग्रेस आलाकमान को बताने को कहा गया था.

बरखा: और वह जनता में चला गया?

राडिया: अच्छा …,मीडिया …मीडिया बाहर थी

बरखा: हे भगवान . अब? मैं उनसे क्या कहूँ?तुम्ही बताओ मैं क्या कहूँ उनसे?

राडिया: मै तुम्हे बताती हूँ समस्या क्या है |.मेरी उसकी बीबी और उसकी बेटी दोनों से बात हुई

बरखा: हाँ हाँ

राडिया : समस्या यह है कि किसी और से नहीं , कांग्रेस को बालू से परेशानी है, उन्हें जाकर करूणानिधि से बात करनी चाहिए..

करूणानिधि से उनके बहुत अच्छे सम्बन्ध है

बरखा; सही , हाँ.

राडिया: तुमने देखा होगा क्योंकि बालू और मारन के सामने वे नहीं बात कर सकते.

बरखा: हाँ

राडिया: इसलिए उसे सीधे ही बताना होगा, तमिलनाडु में बहुत से कांग्रेसी नेता हैं.उन्हें वहां जाकर उसे सब कुछ बताना होगा.उन्हें चाहिए की वो सीधे जाकर अपनी बात कहें

बरखा: वह ठीक है .पर क्या करुणा बालू को छोड़ देगा?

राडिया: वह….देखो, अगर तुम उसे कहोगे कि बालू ही एक अकेली समस्या है ,मुझे पता है वह उन्हें हटा देगा

बरखा: पर ये देखो कि अभी तो पोर्टफोलियो को लेकर भी भी समस्या है ना.

राडिया : नहीं . उन्होंने कुछ नहीं कहा है.पोर्टफोलियो के बारे में तो बात भी नहीं हुई.

बरखा: कांग्रेस का दावा है कि जो भी हो डीएमके भूतल परिवहन, बिजली, आईटी, दूरसंचार, रेलवे और स्वास्थ्य चाहता था.

राडिया : और कांग्रेस मीडिया और बाकी माध्यम से यह सूचना फैला रही है कि मारन सबके बीच में अकेला स्वीकार्य व्यक्ति है |

बरखा: वो ..हाँ हाँ हाँ ..यह मुझे पता है.

राडिया : पर यह ठीक नहीं है ना.?

बरखा: नहीं , मुझे पता है , हमने वह हटा लिया है.

….बरखा : लेकिन कांग्रेस को करूणानिधि को यह भी बताना होगा कि हमने मारन के बारे में कुछ नहीं कहा है.

बरखा: ठीक है, मुझे उनसे दुबारा बात करने दो.

राडिया : हाँ ? उम्मीदवारों का चुनाव हम तुम पर छोड़ते हैं.बालू के बारे में हमारी कुछ आपत्तियां हैं ,उन्हें आपत्तियों के बारे में बता दो.और हमें मारन के बारे में कुछ नहीं कहा है |

बरखा दत्त निरा रादिया को एक विश्वसनीय विचौलिया बनने का आश्वासन देती है.

DATE 22 May 2009 TIME 10:47:33

बरखा: हाँ नीरा ?

राडिया : बरखा, मैंने कल तुमसे कांग्रेस के बारे में जो कहा था …न जाने वो डीएम के में किसके बारे में विचार कर रहे हैं

बरखा: हाँ ..मारन ही होगा.

राडिया : ..नहीं, वे कहते हैं कि बुनियादी पोर्टफोलियो मारन या बालू को नहीं दिया जाना चाहिए.

बरखा: नहीं. ऐसा इसलिए है कि वो ये पोर्टफोलियो अपने पास रखना चाहते हैं.

राडिया:उन्हें राजा को टेलीकाम देने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए |

बरखा: ओह अच्छा !

राडिया : उन्होंने शायद ये बाद किसी और से कही होगी या मारन से कहा होगा, जो सच नहीं बता रहा है.|

बरखा: मेरे ख़याल से मारन से कहा होगा.

राडिया: हाँ .तो अब होना यह चाहिए कि वे कनी से बात करें जिससे वह अपने पिता के साथ चर्चा कर सके क्योंकि यहाँ तक कि प्रधान मंत्री और करुनानिधि के बीएच बातचीत को भी उनकी बेटी ही अनुवाद कर रही थी …,और ये चर्चा बहुत छोटी थी २ मिनट की .

बरखा : ओके

.

राडिया : हमें इसे दुरुस्त करना होगा ,और जल्दीबाजी में ऐसा कोई फैसला न हो जो हम लोगों के हक़ के विरुद्ध हो

बरखा : नहीं वे जैसे ही RCR से बाहर आते हैं, मैं करती हूँ.

.

राडिया : पता है वह यह कह रही है कि गुलाम नवी आजाद जैसा कोई सीनियर ,ही ये बात प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकता है

बरखा : हाँ हाँ हाँ

राडिया : ठीक है? हम जो भी बात होगी कनिमोजी को बता देंगे फिर अपने पिता को बता सकती है कि मुझे कांग्रेस से ये सन्देश मिला है

बरखा : ठीक है कोई समस्या नहीं.मैं आजाद से बात कर लुंगी -रेसकोर्स रोड से बाहर निकलते ही मैं आजाद से बात कर लुंगी इसमें कोई समस्या नहीं है.

राडिया : हाँ फिर उसने कहा है कि जब पिताजी आयेंगे तो उनसे बात करेगी.

बरखा:ठीक है

DATE 22 May 2009 TIME 15:31:29

राडिया : वे उससे बात करेंगे?

बरखा: हाँ

राडिया : कौन? गुलाम ?

बर्कः: गुलाम . हाँ

राडिया : पता है कनिमेजी ५ बजे की फ्लाईट है चेन्नई वापस आने को ,दयानिधी मारन शपथ ग्रहण में शामिल होने जा रहा है जबकि सिर्फ राजा शपथग्रहण में शामिल होने का अधिकृत है .मारन ने करूणानिधि से जाकर कह दिया कि अहमद पटेल ने ख़ास तौर पर उसे शपथ गृहण में शामिल होने को कहा है.

बरखा: अहमद कहता है कि ये सब बकवास है.

राडिया : पर मैं कह रही हूँ ना ऐसा है . करूणानिधि बहुत असमंजस में हैं.

बरखा: नहीं पर कनिमेजी रूककर क्यूँ नहीं शपथग्रहण में शामिल होती ?

राडिया : वह नहीं शामिल होना चाहती क्योंकि उसके पिता ने उसे वापस आने को कहा है उसे अपने पिता का कहा मानना होगा. नहीं, गुलाम को फ़ोन करो.

DATE 22 May 2009 TIME 19:23:५७

बरखा दत्त :कांग्रेस में जिसे भी जानती हूँ सब शपथग्रहण में हैं ,इसलिए मैं ऊपर के लोगों से बात नहीं कर पाई.मेरा काम अभी ख़त्म हुआ और अब मैं अपने फ़ोन करने जा रही हूँ

राडिया : कनी अभी चेन्नई पहुंची है अभी मैंने बात की

बरखा : दया कहाँ है?मारन कहाँ है?

राडिया : मारण शपथ गृहण में नहीं आया क्योंकि उसे वापस बुला लिया था .क्योंकि उसने करुणानिधी को जाकर ये कहा कि अहमद पटेल ने उससे शपथ ग्रहण में आने को कहा था .इस पर करुनानानिधि ने नाराज होकर कहा कि तुम कांग्रेस में ही चले जाओ

बरखा ( हंसती है ) तो अब?

राडिया : राजा ही अब अकेला शपथग्रहण समारोह में शामिल होने का अधिकृत है वो अब ८:४० की फ्लाईट पकड़ने जा रहा है.

Leave a Reply

11 Comments on "बरखा दत्त का असली चेहरा!"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
Himwant
Guest

बरखा दत्त जैसे लोग जब अति करते है तो भारतीय मानस में तीव्र राष्ट्रप्रेम जागृत होता है. बुराई से अच्छी खाद बनती है. बरखा दत्त नामक खाद का उपयोग राष्ट्रप्रेम की फसल लहलहाने में हो रही है. ईश्वर इच्छा.

Jeet Bhargava
Guest

सही कहा आपने. बरखा दत्त, वीर संघवी जैसे दलालों के कारण आज पत्रकारिता बदनाम है. लेकिन इस खेल में सिर्फ यही नहीं, प्रभु चावला, प्रणव जेम्स रॉय और राजदीप सरदेसाई समेत टाइम्स ऑफ़ इंडिया जैसे मीडिया भी शामिल है. इस बात का अंदाजा उनकी पत्रकारिता से ही लग जाता है. सब के सब चर्च+जेहादी ताकतों+कोंग्रेस+ अमेरिका से पैसा खाते है और उनसे राग मिलाकर एक सुर में गाते है.

श्रीराम तिवारी
Guest
पूंजीवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही यह संभव है की सत्ता के गलियारों में तुकड्खोरों की पौ बारह है .भारत राष्ट्र की आज़ादी के बाद से ही राजनीती के शिखर पर स्वर्णिम कलश स्थापित किये जाने की जगह .कौवे और चमगादड़ें बीट करते पाए गए हैं .सेकड़ों .बरखा दत्त ,रांडिया .इस मुल्क की तलछट में पल रहे हैं ….कुछ तो पाकिस्तान और अमेरिका को सामरिक महत्व की खबरें देते हुए रंगे हाथो पकड़ी गईं .कुख्यात IAS रवि इन्दर सिंह तो ऐसी विष कन्याओं का अंतर राष्ट्रीय विशेषग्य सावित हुआ है .दुःख तो इस बात का है की …इन घटनाओं पर तमाम… Read more »
chandra kant
Guest

जो हो रहा है होने दो आज भगत सिंह जैसे युवाओ की आवश्यकता है जो ऐसे लोगो को जान से मार देय..पर हम खुद हे तो इन लोगो के चंनेल्स देखते है..आज का भारत पाकिस्तान से भी गन्दा हो गया है…भगवान् सबका भला करे

एल. आर गान्धी
Guest

Watch dogs- समाज के सतर्क प्रहरी – न जाने किन किन विशेषणों से ‘सम्मानित’ किया गया है है पत्रकारों को – मगर ये तो टुकड़ों पर दुम हिलाने वाले- पालतू निकले ? सतर्क प्रहरी ? … लगता है
‘चोर ही चौकीदार बने बैठे हैं…
इस वतन की बर्बादी के लिए बस एक ही उल्लू काफी था
हर शाख पे उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्तान क्या होगा !!!
शिखाजी इन सेकुलर शैतानों को ‘हमाम ‘ से निकाल बाहर बिठाने के लिए …साधुवाद.

wpDiscuz