लेखक परिचय

नवनीत कुमार गुप्‍ता

नवनीत कुमार गुप्‍ता

लेखक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्वायत्त संगठन 'विज्ञान प्रसार' में प्रॉजेक्ट अधिकारी (एडूसेट) के पद पर कार्यरत हैं तथा वर्ष 2010 में इन्हें ''ग्लोबल वार्मिंग का समाधान गांधीगीरी'' पुस्तक के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रथम मेदिनी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

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नवनीत कुमार गुप्ता

हमारी जीवनदायी धरती जीवन के रंग-बिरंगे रूपों से सजी है। भांति-भांति के पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं की उपस्थिति धरती को जीवनमय बनाए हुए है। विभिन्न जीवों का घर हमारी पृथ्वी अपनी अनोखी जैवविविधता के कारण विशिष्ट है। जैव विविधता के कारण धरती मनोहर और सुंदर बनी हुई है। हमारा देश भी जैवविविधता के मामले में संपन्न है। देश की इसी जैवविविधता से आम जनता को अवगत कराने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 5 जून से एक जैवविविधता स्पेशल ट्रेन चलायी गयी है। जो देश के अनेक स्थानों पर जाकर जैवविविधता के प्रति जागरूकता का प्रसार करेगी।

इस विशेष ट्रेन के 16 डिब्बों में से 8 डिब्बे हिमालय और गंगा के मैदानी भाग, पूर्वात्तर भारत, रेगिस्तान, पष्चिमी घाट और तटीय क्षेत्रों की जैवविविधता पर आधारित हैं। वैसे तो भारत के पास विष्व क्षेत्रफल की केवल 2.4 भूमि है। लेकिन फिर भी यहां जीवों की लगभग 7 प्रतिशत प्रजातियों और मानव आबादी का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है। असल में हमारे देश में जैवविविधता के संरक्षण का इतिहास प्राचीन काल से रहा है। यहां आश्रम व्यवस्था के अंतर्गत जीवों को संरक्षण प्रदान किया जाता रहा है। आज भी देश भर में अनेक देववन हैं जहां जैवविविधता को संरक्षण मिला हुआ है। भारत की इसी अनोखी विरासत के बारे में जैवविविधता ट्रेन लोगों को रूबरू कराने का प्रयास करेगी। 22 दिसंबर तक 18 हजार किलोमीटर की यात्रा के दौरान 52 स्टेशनों पर इस ट्रेन को करीब 50 लाख लोगों के देखे जाने का अनुमान है। इस ट्रेन में भारत की विशिष्ट भू-आकृतियों एवं वहां पायी जाने वाली जैव विविधता की समृद्धता को दर्षाया है। कच्छ का रन, शीत मरूस्थल, हिमालय की तराई के क्षेत्र, नमभूमियों, रेगिस्तानों एवं नदियों की समृद्ध जैवविविधता को अत्यंत आकर्शक रूप से दर्षाया है। इसके माध्यम से जाना जा सकता है कि हमारे देश में अत्यधिक वर्षा वाले स्थान से लेकर कम वर्षा वाले रेगिस्तान भी हैं। यहां अत्यंत ठंडे और बर्फ से ढके पहाड़ी क्षेत्र, ठंडे रेगिस्तान, समुद्र तटीय क्षेत्र और दलदली क्षेत्र विद्यमान हंै। यह सभी स्थान विभिन्न रूपों व गुणों वाले जीव-जंतुओं एवं पेड़-पौधों को आश्रय प्रदान करते हैं। इसी कारण हमारे देश की गिनती विश्व के 12 सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में की जाती है। इस ट्रेन में विभिन्न प्रकार के तथ्यों और आंकड़ों से देश की जैवविविधता को समझाया है। आज जैवविविधता के मामले में भारत की समृद्धता विष्वविख्यात है क्योंकि यहां लगभग 46,000 वनस्पति प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से लगभग 15, 000 फल-फूल वाले पौधे, 2,500 ब्रायोफाइट, 1000 प्रकार के पर्णांग (फर्न), 1,600 प्रकार के शैवाक (लाइकेन), 2,300 प्रकार के शैवाल तथा 12,500 तरह के फफूंद पाए जाते हैं। भारत में लगभग 77,000 जंतुओं की प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें 372 स्तनधारी प्रजातियां, 1228 प्रकार के पक्षी, 428 प्रकार के सरीसृप तथा 204 प्रकार के उभयचर, 2546 प्रकार की मछलियां तथा 5000 से ज्यादा प्रावारचूर्ण यानी मोलस्क एवं 50,000 से ज्यादा कीटों की प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत भारत विष्व के 25 हॉट स्पॉट्स यानी प्रचुर जैव विविधता वाले ऐसे स्थानों में शामिल है जो जैव विविधता के लिहाज से सबसे समृद्ध हैं।

इन 25 हॉट स्पॉट क्षेत्रों में से पश्चिमी घाट व श्रीलंका तथा पूर्व हिमालय क्षेत्र को मुख्य 8 हॉट स्पॉट्स क्षेत्रों में रखा गया है। भारत को प्राकृतवास विविधता के आधार पर 12 भागों में में बांटा गया है। इसी के साथ भारत में 26 ऐसे स्थानिक केन्द्र निर्धारित किए गए हैं जो अब तक ज्ञात फूल वाले पौधों में से दो-तिहाई प्रजातियों का घर हैं।

ट्रेन में भारत में उगाई जाने वाली विभिन्न फसलों में भी असीम जैव विविधता देखने को मिलती है।

हमारे देश में जो फसलें उगाई जाती हैं उनमें से 66 प्रजातियां व उनके जंगली संबंधियों की लगभग 320 प्रजातियों का जन्म स्थान भारत ही है। आपको यह जानकर एक सुखद आश्चर्य अवश्य होगा कि आज से लगभग 50 साल पहले तक भारत में चावल की लगभग 50,000 से 60,000 किस्में उगाई जाती थीं। भारत को चावल, अरहर, आम, हल्दी, अदरक, गन्ना आदि की 30,000-50,000 किस्मों की खोज का केन्द्र माना जाता है। इसके अलावा गेहूं ,दालों, नीबू, गन्ने, आम, अदरक, हल्दी, आदि की फसलों में भी हमें काफी विविधता देखने को मिलती है। इस विविधता का अपना विशेष महत्व है। एक ही अनाज की विभिन्न प्रजातियां भिन्न-भिन्न मौसमों व स्थानों के अनुकूल होती हैं जिससे हर स्थान के वातावरण के अनुसार फसल ली जा सकती है।

इस ट्रेन के द्वारा भारत के महत्वपूर्ण नदियों, झीलों, नमभूमियों एवं तालाबों के बारे में रोचक जानकारी दी गई है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के संदेश को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया है। महासागरों में उपस्थित प्रवाल भित्ति की अद्भुत दुनिया एवं वहां उपस्थित हजारों प्रकार की मछलियों के बारे में दी गई जानकारी रोचक है। इसके अलावा मैंग्रोव वनों को तटीय क्षेत्रों के लिए एक रक्षक बताया है जो तुफान और सुनामी के समय जान-माल की हानि को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मैंग्रोवन वनस्पति क्षेत्र और प्रवाल भित्ति क्षेत्र महत्वपूर्ण तटीय पर्यावरणीय संसाधन हैं जो कि समुद्री जीव प्रजातियों को आश्रय प्रदान करते हैं। इस क्षेत्रों में समुद्री जीवों को जीवन के लिए अनुकूल वातावरण मिलने के साथ ही तीव्र मौसमी बदलावों से भी सुरक्षा मिलती है। महासागरों में स्थित प्रवाल भित्ति क्षेत्र अतुल्य जैव विविधता रखते हैं। हालांकि संपूर्ण पृथ्वी के लगभग एक प्रतिशत हिस्से पर ही इनका अधिकार है परन्तु ये समुद्री जीवों विशेषकर मछलियों की 25 प्रतिशत प्रजातियों का आश्रय स्थल है। प्रवाल भित्ति क्षेत्र में केकड़ें, स्टारफिश, झींगे, डॉल्फिन, शार्क व अनेक प्रजातियों की मछलियां और विभिन्न वनस्पतियां जैसे लाल शैवाल, हरा शैवाल, भूरा शैवाल एवं मोलास्क मिलते हैं।

इस ट्रेन की ‘विज्ञान का आनंद’ खण्ड की कुछ गतिविधियां काफी रोचक एवं ध्यान आकर्शित करने वाली हैं। जैसे हमारा भार सौरमंडल के विभिन्न ग्रहों पर कितना होगा यह हम एक मशीन के द्वारा जान सकते हैं। सूक्ष्मजीवों का हमारे जीवन में महत्व को भी दर्षाया गया है। इस ट्रेन में सूक्ष्मदर्षी के द्वारा दही के जमने एवं इडली बनाने के लिए मददगार सूक्ष्मजीवों को देखा जा सकता है। जैवविविधता ट्रेन में ऐसी अनेक रोचक गतिविधियां है जिन्हें स्वयं किया जा सकता है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण संरक्षण के लिए एक इको चार्ट बनाया गया है जिसमें सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक की गतिविधियों द्वारा पानी एवं ऊर्जा संरक्षण के विभिन्न तरीकों पर जोर दिया गया है। इस ट्रेन में ऊर्जा संरक्षण एवं जल संरक्षण के साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिए जाने एवं उपयोग करने संबंधी विभिन्न गतिविधियां दी गई है। बेकार प्लास्टिक से विभिन्न उपयोगी सामग्रियों का निर्माण करके दिखाया गया है ताकि हम प्लास्टिक के कचरे से निजात पा सकें।

इस ट्रेन में जलवायु परिवर्तन के कारण जैव विविधता में सर्वाधिक तेजी से होते परिवर्तन पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। पृथ्वी ग्रह के औसत तापमान में लगातार वृद्धि जारी है। तापमान में होने वाली वृद्धि का प्रभाव पृथ्वी के पूरे वातावरण पर पड़ रहा है जिसके कारण यहां जीवन को विभिन्न संकटों का सामना करना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के चलते दुनियाभर की आधी प्रवाल भित्ति अगले पचास साल में खत्म हो जाएंगी और इसके कारण समुद्र के तापमान में वृद्धि होगी जिससे तटीय इलाकों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। गिद्धों, डाल्फिनों, बाघों एवं हिमतेंदुओं पर मंडराते खतरे ने जैवविविधता के प्रति चिंता को बढ़ाया है। एक अनुमान के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण 21 प्रतिशत स्तनधारी जीव, 30 प्रतिशत उभयचर जीव और 35 प्रतिशत बिना रीढ़ वाले जीवों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसलिए इन संकटग्रस्त प्रजातियों के बारे में अधिक गंभीर होने की जरूरत है। इस ट्रेन का भी यही उद्देश्यर है कि जैवविविधता का संरक्षण करें ताकि पृथ्वी सदैव जीवन के बहुरंगी रूपों से सजी रहे। (चरखा फीचर्स)

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1 Comment on "पहियों पर चलता जैवविविधता"

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डॉ. मधुसूदन
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रोचक एवं जानकारी पूर्ण आलेखन।

(१)पर, निम्न जानकारी चिन्ता जनक भी है।
==>”एक अनुमान के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण 21 प्रतिशत स्तनधारी जीव, 30 प्रतिशत उभयचर जीव और 35 प्रतिशत बिना रीढ़ वाले जीवों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।<====

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