Archive for the Category ‘पुस्तक समीक्षा’
चिंतन-सृजन (1) : एक भारतीय कम्युनिस्ट की आत्मकथा
निर्मल वर्मा
हिंदी में विचार-पत्रिकाओं की संख्या बहुत कम हैं। जो हैं भी, उनमें से अधिकांश अराष्ट्रीय विचारों से प्रेरित हैं। लेकिन इन विडंबनाओं के बीच कुछ पत्रिकाएं अभी भी ज्ञान-आलोक दीप प्रज्वलित कर रही है, इन्हीं में से प्रमुख है : त्रैमासिक पत्रिका 'चिंतन-सृजन'। इसके संपादक श्री बी.बी. कुमार एवं ...पुस्तक चर्चा : स्त्रीत्व धारणाएँ एवं यथार्थ, लेखिका-कुसुमलता केडिया
पृष्ठ
:
180
मूल्य
:
$13.95
प्रकाशक
:
विश्वविद्यालय प्रकाशन
आईएसबीएन
:
978-81-7124-680
प्रकाशित
:
जनवरी ०१, २००९
पुस्तक क्रं
:
7584
मुखपृष्ठ
:
सजिल्द
प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश
विश्व की ‘एकेडमिक्स’ यूरोईसाई सिद्धान्तों, अवधारणाओं एवं विचार-प्रयत्नों से संचालित है। आधुनिक स्त्री-विमर्श पूरी तरह पापमय, हिंसक और सेक्स के विचित्र आतंक से पीड़ित ईसाईयत द्वारा गढ़ा गया है। गैरईसाई देशों एवं सभ्यताओं में उनके अपने ऐतिहासिक, सामाजिक एवं धार्मिक परिदृश्य ...समकालीनता की दास्तान ‘मुक्त होती औरत’
समीक्षा-कथा संग्रह-मुक्त होती औरत
शीना एन. बी.
स्वस्थ सामाजिक जीवन के निर्माण के लिए सुदृढ़ राष्ट्रीय एवं आर्थिक परिस्थितियों की तरह स्वस्थ भावनात्मक तत्वों की भी अह्म भूमिका है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि भावनात्मक अंशों में प्रतिबंध लगाना स्वस्थ सामाजिकता के खिलाफ है। ऐसी ही एक भावनात्मकता है प्रणय। ...पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय
पुस्तक समीक्षक - डॉ. मनोज चतुर्वेदी
दीनदयाल उपाध्याय एक विचारक, प्रचारक, विस्तारक, राष्ट्रषि, संपादक, पत्रकार अर्थशास्त्री, समाजसेवी, एक प्रखर वक्ता, शिक्षाविद तथा अपूर्व संगठनकर्ता थे। उन्होंने अहोरात्र भारत माता की सेवा करते-करते अपने जीवन को होम कर दिया। दीनदयाल जी ने लेखन तथा संपादन की शिक्षा, आज के महाविद्यालयों-विश्वविद्यालयों से नहीं ...‘संगठन सर्वोपरि’ और नितिन गडकरी
पुस्तक समीक्षक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी
भाजपा के कई राष्ट्रीय अध्यक्ष हुए जैसे श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री कुशाभाऊ ठाकरे, डॉ. मुरलीमनोहर जोशी, श्री वेंकया नायडू, श्री बंगारू लक्ष्मण, श्री के. जना. कृष्णूर्ति, श्री राजनाथ सिंह तथा श्री नितिन गडकरी।
मुझे जहां तक लगता है। कुछ एक को छोड़कर ...








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