• मुख पृष्ठ
  • राजनीति
    • चुनाव
      • लोकसभा चुनाव
      • विधानसभा चुनाव
      • घोषणा-पत्र
      • चुनाव विश्‍लेषण
      • आंकडे
  • आर्थिकी
  • विश्ववार्ता
  • मीडिया
  • मनोरंजन
    • खेल जगत
    • टेलिविज़न
    • रेडियो
    • सिनेमा
    • संगीत
    • चुटकुले
    • कार्टून
  • धर्म-अध्यात्म
  • कला-संस्कृति
  • साहित्‍य
    • लेख
    • कहानी
    • कविता
    • गजल
    • आलोचना
    • व्यंग्य
    • पुस्तक समीक्षा
  • समाज
  • साक्षात्‍कार
  • विविधा
  • अन्य
    • वीडियो
    • महिला-जगत
    • बच्चों का पन्ना
    • विधि-कानून
    • हिंद स्‍वराज
    • सार्थक पहल
    • खेत-खलिहान
    • जन-जागरण
    • विज्ञान
    • स्‍वास्‍थ्‍य-योग
    • सैर-सपाटा
    • खान-पान
  • संपर्क

Archive for the Category ‘पुस्तक समीक्षा’


  • Page 1 of 2
  • 1
  • 2
  • >

उपन्यास अंश(आमचो बस्तर से)- नरबलि और माँ दंतेश्वरी

उपन्यास अंश(आमचो बस्तर से)- नरबलि और माँ दंतेश्वरी  राजीव रंजन प्रसाद विलियम्सन का अगला कदम था बस्तर की आत्मा का हनन। भोंसला शासक रघुजी तृतीय पर दबाव बनाया जाने लगा। माँ दंतेश्वरी के मंदिर में नरबलि होने की खबरों को हवा दी जाने लगी जिसकी आड़ में कभी भोंसला राजा तो कभी कंपनी बहादुर की ओर से अपमान जनक ...

February 21st, 2012 | लेखक : राजीव रंजन प्रसाद | 50 views | No Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: aamcho bastar, आमचो बस्तर, नरबलि और माँ दंतेश्वरी

पुस्तक समीक्षा ; ‘ये तय हुआ था’

पुस्तक समीक्षा ; ‘ये तय हुआ था’ शादाब जफर ‘‘शादाब’’ लोकसभा में कार्यरत बचपन से आज तक मेरी दोस्ती की डोर में बंधे मेरे अज़ीज़ दोस्त शहजाद जी ने अभी कुछ दिनो पहले बडे से लिफाफे में बंद मुझे एक गजल संग्रह समीक्षार्थ दिया और बोले समीक्षा लिखनी है। मैने पूछा किस का है बोले मेरे साथ ही ...

February 14th, 2012 | लेखक : शादाब जाफर 'शादाब' | 15 views | 1 Comment »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा, साहित्‍य | Tags: Book Review, पुस्तक समीक्षा, ये तय हुआ था’

चिंतन-सृजन (1) : एक भारतीय कम्युनिस्ट की आत्मकथा

चिंतन-सृजन (1) : एक भारतीय कम्युनिस्ट की आत्मकथा निर्मल वर्मा  हिंदी में विचार-पत्रिकाओं की संख्‍या बहुत कम हैं। जो हैं भी, उनमें से अधिकांश अराष्‍ट्रीय विचारों से प्रेरित हैं। लेकिन इन विडंबनाओं के बीच कुछ पत्रिकाएं अभी भी ज्ञान-आलोक दीप प्रज्‍वलित कर रही है, इन्‍हीं में से प्रमुख है : त्रैमासिक पत्रिका 'चिंतन-सृजन'। इसके संपादक श्री बी.बी. कुमार एवं ...

November 25th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 70 views | 2 Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: The Journey of an Indian Communist – Mohit Sen, निर्मल वर्मा

पुस्‍तक चर्चा : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

पुस्‍तक चर्चा : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ डॉ. मनोज चतुर्वेदी  नानाजी देशमुख उर्फ चंडीदास अमृतराव देशमुख का नाम कोई अनजाना नहीं है। महाराष्ट्र राज्य के हिंगोली (परभणी) जिला तथा कडोली जैसे निर्धनतम ग्राम में पैदा हुए नानाजी ने 1934 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से देशसेवा का व्रत लिया तो उन्होंने प्रचारक रूप में ही देश के ...

November 19th, 2011 | लेखक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 145 views | No Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: RSS, नानाजी देशमुख, राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ

पुस्तक चर्चा/पत्रकारिता के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण पुस्तक ‘‘रेडियो पत्रकारिता’’

पुस्तक चर्चा/पत्रकारिता के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण पुस्तक ‘‘रेडियो पत्रकारिता’’ पत्रकारिता का ताना-बाना आज पूरी तरह बदल गया है। रोज नये-नये तकनीक और पहलू, पत्रकारिता को एक अलग पहचान दिलाने में लगे हैं। सूचना तकनीक के विकास और विस्तार में पत्रकारिता के क्षेत्र इलेक्ट्रानिक मीडिया को दिनों-दिन विस्तार दे रहा है। इसके पारंपरिक संवाद ने माध्यम को अपना बाना बदलने ...

November 7th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 52 views | No Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा, प्रवक्ता न्यूज़ | Tags: radio journalism, रेडियो पत्रकारिता

पुस्‍तक समीक्षा/ ‘भारत क्‍या है’

पुस्‍तक समीक्षा/ 'भारत क्‍या है' कृष्ण जी मिश्र  'भारत क्‍या है' के नाम से विख्यात सलिल ज्ञवाली की पुस्तक, जो भारतीय सोच और व्यापकता से प्रेरित शीर्ष वैज्ञानिकों, दार्शनिकों, और संतों के वाणी का संकलन है, उसकी उपयोगिता और महत्त्व को मैं शब्दों में वर्णित नहीं कर सकता. यह पुस्तक एक त्रिवेणी की तरह अद्भुत चिंतन के ...

October 6th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 112 views | No Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: India, भारत क्‍या है

राष्ट्र-ऋषि नानाजी

राष्ट्र-ऋषि नानाजी डॉ. मनोज चतुर्वेदी नानाजी देशमुख का नाम याद आते ही मेरे अंदर उस दिव्य पुरूष का चित्र उपस्थित हो जाता है जब काशी विद्यापीठ में अध्ययन के दौरान ही देश और समाज के प्रति पीड़ा ने मुझे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक बनने हेतु प्रेरित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति ...

September 28th, 2011 | लेखक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 62 views | No Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: Nanaji Deshmukh, नानाजी देशमुख

‘गल्प के रंग’ आलोचना पुस्तक का लोकार्पण

'गल्प के रंग' आलोचना पुस्तक का लोकार्पण प्रख्यात आलोचक डॉ0 प्रभाकर श्रोत्रिय ने कहा कि जिस भाषा के पास अच्छे आलोचक नहीं होते उस भाषा का विकास संभव नहीं हो पाता। हिन्दी के पास आलोचना की लम्बी परम्परा रही है। लेकिन आज कुछ लोग यह शिकायत करते हैं कि अच्छी आलोचना और नाटक नहीं लिखे जा रहे। ...

August 20th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 32 views | No Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा, प्रवक्ता न्यूज़ | Tags: गल्प के रंग

‘हेलो बस्‍तर’ को पढ़ने की कोई आवश्‍यकता नहीं

'हेलो बस्‍तर' को पढ़ने की कोई आवश्‍यकता नहीं कौशलेन्‍द्र “हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] ‘हैलो बस्‍तर’ की एकांगी समीक्षा की है राजीव रंजन प्रसाद ने  सत्‍य का गला घोट दिया है राहुल पंडिता ने १- भूमकाल से माओवादी संघर्ष की तुलना नहीं की जा सकती. दोनों में ज़मीन-आसमान का फर्क है. दोनों के उद्देश्यों में फर्क है. दोनों ...

July 30th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 85 views | No Comments »
Posted in Category: आलोचना, पुस्तक समीक्षा | Tags: hello bastar, नक्‍सलाद, बस्‍तर, माओवाद, हेलो बस्‍तर

[पुस्‍तक समीक्षा:'हेलो बस्तर'] आदिवासियों का सवाल तो रह गया

[पुस्‍तक समीक्षा:'हेलो बस्तर'] आदिवासियों का सवाल तो रह गया सुदीप ठाकुर  बस्‍तर और माओवादी आंदोलन पर केन्द्रित राहुल पंडिता की पुस्तक 'हेलो बस्तर' की समीक्षा लिखकर राजीव रंजन प्रसाद ने  इसे हकीकत से दूर बताया। इस विमर्श को आगे बढ़ाने को लेकर हम यहां 24 जुलाई 2011 को अमर उजाला में प्रकाशित सुदीप ठाकुर द्वारा लिखित इस पुस्‍तक की समीक्षा प्रकाशित कर ...

July 28th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 86 views | No Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा, साहित्‍य | Tags: Bastar, आदिवासी, बस्‍तर, माओवाद, हेलो बस्‍तर

सत्‍य का गला घोट दिया है राहुल पंडिता ने

सत्‍य का गला घोट दिया है राहुल पंडिता ने हाल ही में बस्‍तर के आदिवासियों की समस्‍याओं और यहां चल रहे माओवादी आंदोलन पर राहुल पंडिता की पुस्‍तक 'हेलो बस्‍तर' प्रकाशित हुई है। राजीव रंजन प्रसाद ने इसकी समीक्षा लिखी और यह सर्वप्रथम प्रवक्‍ता डॉट कॉम पर प्रकाशित हुई। इस समीक्षा पर 10 टिप्‍पणियां आईं। सारगर्भित। एक टिप्‍पणीकार को ...

July 28th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 128 views | No Comments »
Posted in Category: आलोचना, पुस्तक समीक्षा | Tags: Bastar, बस्‍तर, माओवाद, राहुल पंडिता, हेलो बस्‍तर

‘हैलो बस्‍तर’ की एकांगी समीक्षा की है राजीव रंजन प्रसाद ने

'हैलो बस्‍तर' की एकांगी समीक्षा की है राजीव रंजन प्रसाद ने ए.के. पंकज हाल ही में बस्‍तर के आदिवासियों की समस्‍याओं और यहां चल रहे माओवादी आंदोलन पर राहुल पंडिता की पुस्‍तक ‘हेलो बस्‍तर’ प्रकाशित हुई है। राजीव रंजन प्रसाद ने इसकी समीक्षा लिखी और यह सर्वप्रथम प्रवक्‍ता डॉट कॉम पर प्रकाशित हुई। इस समीक्षा पर ए. के. पंकज ने टिप्‍पणी लिखकर इसे एकांगी ...

July 28th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 66 views | 2 Comments »
Posted in Category: आलोचना, पुस्तक समीक्षा | Tags: hello bastar, हैलो बस्‍तर

“हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] – राजीव रंजन प्रसाद

“हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] – राजीव रंजन प्रसाद माओवादियों ने बस्‍तर को आग के हवाले कर दिया है, जिसकी तपिश में भोले-भाले आदिवासी झुलस रहे हैं। माओवादी भले ही इन क्षेत्रों के विकास की बात करते हों लेकिन उनके पास विकास का वैकल्पिक मॉडल नहीं है, उलटे वे शिक्षण संस्‍थानों और सड़कों को बम से उड़ाकर बस्‍तर के ...

July 24th, 2011 | लेखक : राजीव रंजन प्रसाद | 821 views | 15 Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा, राजनीति | Tags: hello bastar, आदिवासी, बस्‍तर, माओवाद, राहुल पंडिता, हेलो बस्‍तर

पुस्‍तक चर्चा : स्त्रीत्व धारणाएँ एवं यथार्थ, लेखिका-कुसुमलता केडिया

पुस्‍तक चर्चा : स्त्रीत्व धारणाएँ एवं यथार्थ, लेखिका-कुसुमलता केडिया पृष्ठ : 180 मूल्य : $13.95 प्रकाशक : विश्वविद्यालय प्रकाशन आईएसबीएन : 978-81-7124-680 प्रकाशित : जनवरी ०१, २००९ पुस्तक क्रं : 7584 मुखपृष्ठ : सजिल्द प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश विश्व की ‘एकेडमिक्स’ यूरोईसाई सिद्धान्तों, अवधारणाओं एवं विचार-प्रयत्नों से संचालित है। आधुनिक स्त्री-विमर्श पूरी तरह पापमय, हिंसक और सेक्स के विचित्र आतंक से पीड़ित ईसाईयत द्वारा गढ़ा गया है। गैरईसाई देशों एवं सभ्यताओं में उनके अपने ऐतिहासिक, सामाजिक एवं धार्मिक परिदृश्य ...

July 2nd, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 39 views | No Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: स्त्रीत्व धारणाएँ एवं यथार्थ

समकालीनता की दास्तान ‘मुक्त होती औरत’

समकालीनता की दास्तान 'मुक्त होती औरत' समीक्षा-कथा संग्रह-मुक्त होती औरत शीना एन. बी. स्वस्थ सामाजिक जीवन के निर्माण के लिए सुदृढ़ राष्ट्रीय एवं आर्थिक परिस्थितियों की तरह स्वस्थ भावनात्मक तत्वों की भी अह्म भूमिका है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि भावनात्मक अंशों में प्रतिबंध लगाना स्वस्थ सामाजिकता के खिलाफ है। ऐसी ही एक भावनात्मकता है प्रणय। ...

June 23rd, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 84 views | 1 Comment »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: Pramod Bhargav, प्रमोद भार्गव, मुक्‍त होती औरत

जाति- ब्रिटिश कुचेष्टा की शिकार

जाति- ब्रिटिश कुचेष्टा की शिकार डॉ. मधुसूदन पुस्तक समीक्षा का अनुवाद: एक पुस्तक अकस्मात हाथ लगी, लेखक हैं निकॉलस डर्क। बस, खरीद लीजिए उसे, आप यदि ले सकते हैं तो। नाम है, , ”Castes of Mind: Colonialism and Making of British India” अर्थात ”मानसिक जातियां : उपनिवेशवाद और ब्रिटिश राज का भारत में गठन” और लिखी गयी ...

May 20th, 2011 | लेखक : प्रो. मधुसूदन | 304 views | 11 Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: Castes of Mind

दुनिया में सबसे सहनशील धर्मपंथ -हिंदुत्व

दुनिया में सबसे सहनशील धर्मपंथ -हिंदुत्व विजय सोनी भारत में तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी लोगों ने जहाँ हिन्दुओं को और हिंदुत्व को हिन्दू आतंकवाद तक का नाम दे दिया है वहीँ ये जानना भी आवश्यक है की "व्हाट इस इंडिया " मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई की  भारतीय दर्शन से दुनिया कितनी प्रभावित है ,इस ...

May 18th, 2011 | लेखक : विजय सोनी | 941 views | 21 Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: What is India?

भारतीय राजनीतिक एवं न्याययिक व्यवस्था से ज्यादा पश्चिमी देशों पर भरोसा करता है चर्च

भारतीय राजनीतिक एवं न्याययिक व्यवस्था से ज्यादा पश्चिमी देशों पर भरोसा करता है चर्च नई दिल्ली - आजादी के बाद से भारतीय ईसाई एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के नागरिक रहे है। धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था चाहे कितनी ही दोषपूर्ण हो, लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहे कितनी ही गैर प्रतिनिधिक हो, यहां के ईसाइयों (चर्च) को जो खास सहूलियतें हासिल है, वे बहूत से ईसाइयों को यूरोप व अमेरिका में ...

April 13th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 92 views | 2 Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: Indian Political

पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय

पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय पुस्‍तक समीक्षक - डॉ. मनोज चतुर्वेदी दीनदयाल उपाध्याय एक विचारक, प्रचारक, विस्तारक, राष्ट्रषि, संपादक, पत्रकार अर्थशास्त्री, समाजसेवी, एक प्रखर वक्ता, शिक्षाविद तथा अपूर्व संगठनकर्ता थे। उन्होंने अहोरात्र भारत माता की सेवा करते-करते अपने जीवन को होम कर दिया। दीनदयाल जी ने लेखन तथा संपादन की शिक्षा, आज के महाविद्यालयों-विश्वविद्यालयों से नहीं ...

February 27th, 2011 | लेखक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 74 views | 2 Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा, राजनीति | Tags: Journalism, पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय

‘संगठन सर्वोपरि’ और नितिन गडकरी

'संगठन सर्वोपरि' और नितिन गडकरी पुस्‍तक समीक्षक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी भाजपा के कई राष्ट्रीय अध्यक्ष हुए जैसे श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री कुशाभाऊ ठाकरे, डॉ. मुरलीमनोहर जोशी, श्री वेंकया नायडू, श्री बंगारू लक्ष्मण, श्री के. जना. कृष्णूर्ति, श्री राजनाथ सिंह तथा श्री नितिन गडकरी।   मुझे जहां तक लगता है। कुछ एक को छोड़कर ...

February 27th, 2011 | लेखक : डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 78 views | 2 Comments »
Posted in Category: पुस्तक समीक्षा | Tags: Nitin Gadkari, नितिन गडकरी, संगठन सर्वोपरि

  • Page 1 of 2
  • 1
  • 2
  • >


  • हिंदी में टाइप करें

    यहाँ क्लिक करें

  • हिंदी फॉण्ट कन्वर्टर

    हिंदी फॉण्ट से यूनिकोड

  • सबस्क्राइब

    प्रवक्‍ता डॉट कॉम के लेखों को अपने ईमेल पर प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए बॉक्‍स में अपना ईमेल पता भरें:

  • प्रवक्ता पर लेख भेजे

    प्रवक्ता पर लेख भेजने के लिए यहां क्लिक करें या फिर सीधे prawakta@gmail.com पर हमें लिख भेजें।
  • आपका मत

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक सीटें किस पार्टी को मिलेंगी?

    View Results

    Loading ... Loading ...
    • Polls Archive
  • परिचर्चा

    स्वस्थ बहस ही लोकतंत्र का प्राण होती है। यहां आप समसामयिक प्रश्‍नों पर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।
  • विषय सूची

  • लेखक के अनुसार पढ़ें

  • अब तक

  • आपने कहा…

    • mahendra gupta on वजूद खोती राजनीति
    • Rajya Vardhan on सचिन से महान हैं सहवाग
    • LAIQ CHODRY on पुस्तक समीक्षा ; ‘ये तय हुआ था’
    • ravi on तसलीमा नसरीन का कसूर
    • ravi on किसका वोट-बैंक / शंकर शरण
    • ravi on किसका वोट-बैंक / शंकर शरण
    • OM on किसका वोट-बैंक / शंकर शरण
    • OM on किसका वोट-बैंक / शंकर शरण
    • singh on किसका वोट-बैंक / शंकर शरण
    • dr. madhusudan on देश संविधान की धज्जियां उड़ाते यह स्वयंभू सांस्कृतिक राष्ट्रवादी
    • leena on एम के गॉंधी के-निष्ठुर, हृदयहीन तथा धोखेभरे निर्णयों को सहना ही होगा!
    • डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ on भ्रष्टाचार क्यूँ नहीं बन रहा मुख्य चुनावी मुद्दा ?
    • iqbal hindustani on भ्रष्टाचार क्यूँ नहीं बन रहा मुख्य चुनावी मुद्दा ?
    • iqbal hindustani on भ्रष्टाचार के मामले में यू.पी.ए. का रिकार्ड नं.1 है
    • R.Singh on कबीर को समझने को दिमाग नहीं दिल चाहिएः भारती बंधु
    • dr. madhusudan on जारवा नहीं, हम हैं असभ्य
    • dr. madhusudan on व्हॅलंटाइन डे विकृति
    • R.Singh on जारवा नहीं, हम हैं असभ्य
    • Anil Gupta,Meerut,India on चुनावी मौसम में निखरता कांग्रेसी त्रियाचरित्तर
    • sangeet shrivastava on कविता: बिल्ली का संदेश – प्रभुदयाल श्रीवास्तव
    • Mohan Gupta on व्हॅलंटाइन डे विकृति
  • FOLLOW US ON

  • संपादक की कलम से…

  • विधानसभा चुनाव पर विशेष

    • अब तो विधानसभा चुनाव के बाद ही तस्वीर होगी साफ़
    • कांग्रेस, सपा और बसपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे : राजनाथ सिंह
    • युवराज अभी कागज फाड़ रहे हैं कुछ समय बाद कपड़े फाड़ेंगे : गडकरी
    • दलितों के विकास का धन हाथी के निर्माण में खर्च किया : कटियार
    • चुनाव परिणामों पर टिकी दिग्गजों की निगाह
    • भाजपा के पक्ष में चल रही है लहर : सुषमा स्‍वराज
    • बसपा शासन में सर्वजन दुखाय, सर्वजन सताय का बोलबाला रहा : उमा भारती
    • उत्तर प्रदेश की बदहाली के लिए बसपा, सपा और कांग्रेस की तिकड़ी जिम्मेदार : राजनाथ
    • अछूत बने ब्राह्मणों की चुप्पी
    • चुनावी नतीजों से पहले उत्तराखंड की राजनीति में चल रही है बर्फीली हवाएं
    • एम के गॉंधी के-निष्ठुर, हृदयहीन तथा धोखेभरे निर्णयों को सहना ही होगा!
    • राहुल गांधी ने अवसर गंवा दिया
    • जनता बसपा, सपा, कांग्रेस की सरकारों से बहुत प्रताड़ित हो चुकी है- कलराज मिश्र
    • उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव २०१२ की चकल्लस और मतदाता
    • भाजपा ने 2.जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया
    • सूबे का विकास करना सपा-बसपा और कांग्रेस के बूते की बात नहीं : कलराज मिश्र
    • कांग्रेस का भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन की बात जनता के लिए धोखा : कलराज मिश्र
    • पिछड़ों के कोटे से आरक्षण को कतर्इ नहीं बर्दाश्त करेगी भाजपा- नितिन गडकरी
    • केन्द्र और प्रदेश सरकार ने जनता का शोषण किया है : राजनाथ सिंह
    • ‘मुलायम सिंह यादव का बलात्कार पीड़ित महिलाओं को नौकरी देना समूची नारी जाति का अपमान’
  • पाठकों से निवेदन

    सुधी लेखकों से निवदेन है अपनी रचनाएं यूनिकोड (मंगल) फोंट में भेजें और साथ ही संबंधित तस्‍वीर भी हमें भेजेंगे तो उसे प्रकाशित करने में सुविधा होगी।

    लेखों के त्‍वरित प्रकाशन के लिए हमें आप SMS के जरिए तत्‍काल सूचना दे सकते हैं : 09868964804 (sanjeev.sinha78@gmail.com)

  • लोकतांत्रिक विमर्शों का मंच

    प्रवक्‍ता डॉट कॉम भारतीय परंपरा की जान 'शास्त्रार्थ' का आधुनिक स्‍वरूप है, जहां विभिन्‍न विचारधाराओं के लोग एक ही मंच पर बेहतर लोकतांत्रिक समाज के लिए विचार-विमर्श करते हैं।

  • जरूर पढ़ें

    • तसलीमा नसरीन का कसूर
    • हिन्दी समाचार पत्रों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की प्रस्तुति का अध्ययन
    • ॥अमृत भाषा संस्कृत॥- डॉ. मधुसूदन उवाच
    • किसका वोट-बैंक / शंकर शरण
    • आरक्षण समानता और सुरक्षा के मन्त्र नहीं.
    • क्यों और कैसे लिखा मैंने – कहो कौन्तेय
    • वे जो हर सांस में भारत को ही जीते हैं
    • सभी धर्मों में एक ही बात नहीं
    • हिंदी लेखन, विचारधारा और इतिहास बोध
    • बाबा माधवदास की वेदना : शंकर शरण
    • द्वितीय प्रवक्‍ता लेख प्रतियोगिता के परिणाम घोषित
    • प्रवक्‍ता डॉट कॉम द्वारा आयोजित द्वितीय लेख प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा 5 दिसम्‍बर को
    • प्रवक्ता डॉट कॉम द्वारा लेख प्रतियोगिता का आयोजन
    • तीन साल का हो गया ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’
    • ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ बना वैकल्पिक वेबसाइटों का सिरमौर
  • Alexa Rank



  • मुख पृष्ठ
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
  • प्रवक्‍ता मण्डली
  • लेख भेजें
  • संपादक
  • ई-मेल
  • चर्चा में प्रवक्‍ता
  • प्रवक्ता पर विज्ञापन
  • Log In
  • पोल Archive
  • Pravakta Ads
    • Chhatisgarh-Ads
    • प्रवक्‍ता के सम्‍मानित पाठक
  • User Online
  • Hindi Font Converter
  • आर्थिकी
  • कला-संस्कृति
  • चुनाव
    • घोषणा-पत्र
    • जन-जागरण
    • लोकसभा चुनाव
      • आंकडे
      • चुनाव विश्‍लेषण
    • विधानसभा चुनाव
  • जरूर पढ़ें
  • ज्योतिष
    • राशिफल
    • वर्त-त्यौहार
  • टॉप स्टोरी
  • धर्म-अध्यात्म
  • पत्रिका पर नजर
  • परिचर्चा
  • पर्व – त्यौहार
  • प्रवक्ता न्यूज़
  • मनोरंजन
    • कार्टून
    • खेल जगत
    • चुटकुले
    • टेलिविज़न
    • रेडियो
    • संगीत
    • सिनेमा
  • महत्वपूर्ण लेख
  • मीडिया
  • राजनीति
  • विधि-कानून
  • विविधा
    • उत्‍पाद समीक्षा
    • खान-पान
    • खेत-खलिहान
    • टेक्नोलॉजी
    • पर्यावरण
    • बच्चों का पन्ना
    • महिला-जगत
    • विज्ञान
    • शख्सियत
    • साक्षात्‍कार
    • सार्थक पहल
    • सैर-सपाटा
    • हिंद स्‍वराज
  • विश्ववार्ता
  • वीडियो
  • समाज
  • साहित्‍य
    • आलोचना
    • कविता
    • कहानी
    • गजल
    • पुस्तक समीक्षा
    • लेख
    • व्यंग्य
  • स्‍वास्‍थ्‍य-योग

Copyright © 2010 PRAVAKTA.COM
Designed & Developed by Manu Info Solutions (MiS) New Server