कविता भय-निःशब्दता का स्वप्न-विस्फोट March 18, 2026 / March 18, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment भय मुट्ठी बाँध, उन्मेष जगाता यह काल; क्षोभ स्वयं को भूल, निःशब्द हुआ है संसार। प्रेम और विरक्ति मिलकर लय हो जाते, Read more » भय-निःशब्दता का स्वप्न-विस्फोट
कविता नन्हा मैकेनिक March 18, 2026 / March 18, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment नन्हे-नन्हे हाथों में, पकड़ी पानी की धार, गाड़ी धोने निकला देखो, मेरा छोटा होशियार। Read more » नन्हा मैकेनिक
कविता नारी : एक करुण पुकार March 8, 2026 / March 8, 2026 by मुनीष भाटिया | Leave a Comment सदियों से मानव की कमजोरीनारी को समझा गया हर बार,विजय चिन्ह समझ लूट लियाजैसे कोई युद्ध का उपहार। कभी अपनों की बेरुखी झेली,कभी दुश्मनों की तलवार,युद्धभूमि की आग में जलकरसहती रही अस्मिता पर प्रहार। आज बदल गया रूप समय का,पर चाल वही, व्यवहार वही,क्षद्म प्रेम का जाल बिछाकरभटकाया जाता बार-बार। अब जागे समाज, बढ़े चेतना,पहचाने […] Read more » Woman: A sad cry नारी दिवस
कविता बहिर-बधिर March 5, 2026 / March 5, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment “सूर्यअपने तपते आदर्शों कानिरंतर प्रवचन करता है—आकाश के ऊँचे मंच से। काले बादलअपनी गरम चुप्पियों मेंबिजली की भाषा लिखते हैं,और बारिशधरती की जड़ों तकधीरे-धीरे उतरती है। पर एक मनुष्य है—जो केवल इन्हीं को सुनने के लिएअपने कान खुले रखता है,मानो संसार की बाकी आवाज़ेंउसके लिएमूक हो चुकी हों। समयरेत-घड़ी की छाया मेंउँगलियों से फिसलतीक्षणिक रेत […] Read more » deaf and dumb बहिर-बधिर
कविता व्यर्थ नहीं बहती कविता February 19, 2026 / February 19, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment “कविताएँअब भी फूटती हैं भीतर से—जैसे चट्टानों के बीचअदृश्य जलस्रोत। पर जीवन,ओह जीवन!तुम क्यों सूखी नदी की तरहमेरे सामने पसरे पड़े हो? शब्दों में हरियाली है,दिनों में बंजरपन।स्वप्नों में उजाला है,जागती आँखों में धूल। मैंने चाहा थाएक साधारण प्रसन्नता—रोटी की गर्म भाप,कंधे पर रखा भरोसे का हाथ,और सांझ में लौटती थकान की शांति। पर मिला—अधूरे […] Read more » व्यर्थ नहीं बहती कविता
कविता गांधी पर संगोष्ठी January 14, 2026 / January 14, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment तीन दिन का भव्य सरकारी सेमिनार चल रहा था। देश के कोने-कोने से आए प्रखर विद्वान,रेशमी Read more » गांधी पर संगोष्ठी
कविता हिन्दू हृदय सम्राट कल्याण सिंह January 5, 2026 / January 5, 2026 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment माटी से उठकर शिखर बने, सेवा को सत्ता का अर्थ किया, जन-जन के मन में राज किया, ऐसे बाबूजी हमने देखे। Read more » हिन्दू हृदय सम्राट कल्याण सिंह
कविता शोक-सभा के कौए December 30, 2025 / December 30, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment काले पंख फैलाए Read more » शोक-सभा के कौए
कविता निष्फल मुस्कान December 27, 2025 / December 27, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment ——————— “सोच की अनुपस्थिति जब ओठों पर टिक जाती है, तो हँसी— हृदय की नहीं, खालीपन की भाषा बन जाती है। विचारहीन मुस्कान आईने में चमकती है, पर आत्मा के भीतर अंधेरे का विस्तार करती है। जो प्रश्न नहीं पूछता, जो पीड़ा पर ठहरकर मनन नहीं करता— वह जीते हुए भी जीवन से अनुपस्थित रहता […] Read more » निष्फल मुस्कान
कविता बेक़द्र December 22, 2025 / December 22, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment बेक़द्रों के हाथ अगर चाँद भी लग जाए, वो उसको भी ग्रहण लगाने का हुनर रखते हैं। Read more » बेक़द्र
कविता हम आदमी, तुम लोग हो गए December 19, 2025 / December 19, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment सबको बनाकर मैं बना कुछ कम बना तो क्या हुआ Read more » लोग हो गए
कविता श्रीमद भागवत जी की December 15, 2025 / December 15, 2025 by नन्द किशोर पौरुष | Leave a Comment श्रीमद भागवत जी की Read more » of Shrimad Bhagwat Ji