Archive for the Category ‘कविता’
कांग्रेस- मनमोहन-सोनिया और अब राहुल-कुशल सचेती
कुशल सचेती
कांग्रेस- मनमोहन-सोनिया और अब राहुल
देख तेरे भारत की हालत क्या कर दी हे राम....!
कांग्रेसासुरों की करतूतों का है ये परिणाम
देख तेरे भारत.......
गांधी बाबा के ये बंदे, रचते रहे नित नए फंदे,
कितने ये मक्कार औ अंधे, इन धूर्तो के जाली धंधे,
गांधी-नेहरू-गांधियों की मुग़ल सल्तनत देखी है ?
वंशवाद का अज़ब तमाशा, ...कविता: बिल्ली का संदेश – प्रभुदयाल श्रीवास्तव
एक दिवस बिल्ली रानी ने
सब चूहों को बुलवाया
ढीले ढाले उन चूहों को
बड़े प्रेम से समझाया|
अपने संबोधन में बोली
मरे मरे क्यों रहते हो
इंसानों के जुर्म इस तरह
क्यों सहते हो डरते हो।
गेहूं चावल दाल सरीखे
टानिक घर में भरे पड़े
क्यों जूठन चाटा करते हो
खाते खाने गले सड़े।
प्रजातंत्र में नेता देखो
कैसे लप लप खाते ...कविता:छिंदवाड़ा की बात बड़ी है-प्रभुदयाल श्रीवास्तव
छिंदवाड़ा की बात बड़ी है
टिक टिक चलती तेज घड़ी है
छिंदवाड़ा की बात बड़ी है |
साफ और सुथरी सड़कें हैं
गलियों में भी नहीं गंदगी
यातायात व्यवस्थित नियमित
नदियों जैसी बहे जिंदगी
लोग यहां के निर्मल कोमल
नहीं लड़ाई झगड़े होते
हिंदु मुस्लिम सिख ईसाई
आपस में मिलजुलकर रहते
रातें होती ठंडी ठंडी
दिन में होती धूप कड़ी है
छिंदवाड़ा की ...कविता:मायाबी रावण बने सब आका-सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मायाबी रावण बने सब आका
वोटों पर डालने को डाका
जमूड़े
सबको पहचान लो ?
पहचान लिया
चारो तरफ घूम जा
घूम लिया
जो पूछँ वह बतलाऐगा
हाँ बतलाऊँगा
राजनीति का खेल निराला
काले को सफेद कर डाला
बन न पाया मुद्दा महँगाई
आरपार की शुरू हुई लड़ाई
लोकपाल को भूल रहे है लोग
जनता को लग गया यह रोग
गुटबंदी का खेल चल रहा
अपना ...कविता:यूपी में चुनावी जंग देखिये-विभोर गुप्ता
विभोर गुप्ता
उत्तर प्रेदश में सियासी योद्धाओं की चुनावी जंग देखिये
ऐसे-ऐसे दांव-पेंच कि अपनी-अपनी आँखें दंग देखिये
"शाम की दवा" पूछने को "छोटे यादवजी" का ढंग देखिये
गिरगिटों की तरह बदलते बागियों के बागी रंग देखिये
घर-घर खाना खाने को "युवराज" के मन की उमंग देखिये
निर्बलों से वोट मांगने को हाथ जोड़ते दबंग देखिये
पापियों ...कविता:योग्य उम्मीदवार की तलाश-प्रभुदयाल श्रीवास्तव
योग्य उम्मीदवार की तलाश
पार्टी के सदस्य पदाधिकारी
पशोपेश में थे
कुछ पद के नशे में थे
कुछ होश में थे
संसदीय क्षेत्र के लिये
जीतने वाले उम्मीदवार का
चुनाव होना था
कौन कितना ताकत्वर है
कितना खर्च करेगा
इस बात का भाव ताव
तै होना था
"घसीटालालजी ठुनठुना क्षेत्र के लिये
सर्व श्रेष्ठ उम्मीदवार होंगें"
पार्टी के महामंट्री ने
जब दी सलाह
तो पार्टी के ...कविता ; हट धर्मिता – लक्ष्मी दत्त शर्मा
हट धर्मिता,
दब्बूपन व कायरता
अहिंसा व सत्य
सभी शस्त्र हैं
गांधी के
जिससे सुन्दर लगता हैं
गुलाब के फूल की तरह
कांटों में सजा गांधी
गांधी का महात्मा वाला स्वरूप
किसे पता है कि
इसमें छिपी है
पीड़ा, वेदना, सहनशीलता
अहिंसा व सत्य
की गहरी नींव
मां ने की शुरू करवायी थी
गांधी को महात्मा बनने की पहली
पाठशाला
पर मां तो मां है
मां बनने पर ...कविता ; लेन देन – दीपक खेतरपाल
लगती थी साथ साथ
सीमा
गांव और शहर की
पर दोनों थे अलग अलग
हवा शहर की
एक दिन
कर सीमा पार
पंहुच गई गांव में
और छोड़ आई वहां
आलस्य
फरेब
मक्कारी
आंकाक्षाएं
महत्वआंकाक्षाएं
बदले में ले आई
निश्छलता
निष्कपटता
निस्वार्थ व्यव्हार
पर इस लेन देन के बाद
गांव गांव न रहा
और ठुकरा दिया
शहर ने वो सब
लाई थी जो
शहर की हवा
गांव से
व्यंग्य कविता ; काम वालियां – प्रभुदयाल श्रीवास्तव
काम वालियां
नहीं कामपर बर्तन वाली
दो दिन से आई
इसी बात पर पति देव पर
पत्नि चिल्लाई
काम वालियां कभी समय
पर अब न आ पातीं
न ही ना आने का कारण
खुलकर बतलातीं
बिना बाइयों के घर तो
कूड़ाघर हो जाता
बड़ी देर से कठिनाई से
सूर्य निकल पाता
छोटी बच्ची गिरी फिसल कर
सभटल नहीं पाई
बिना बाई के कौन पतीली
चाय भरी ...











