भारतीय मंगल अभियान की मंजिल तय

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प्रमोद भार्गव आखिरकार 66.60 करोड़ किलोमीटर की लंबी यात्रा के बीच आने वाली सभी बाधाओं को दरकिनार कर भारतीय मंगलयान का मंगल की धरती पर पहुंचना तय है। क्योंकि यान के सभी कल-पूर्जे वैज्ञानिकों द्वारा किए परीक्षण के बाद सही काम करते पाए गए हैं। इसके मुख्य इंजन को दस महीने बाद चालू करके देखा… Read more »

रैगिंग : प्रभुत्व स्थापित करने की विकृत मानसिकता

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प्रो. एस. के. सिंह सिंधिया स्कूल में घटित रैगिंग की घटना से देश में एक नई बहस प्रारंभ हो गई है, कि अब उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों की तरह स्कूलों में भी रैगिंग को लेकर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। सूचनाओं के तेज प्रवाह एवं समय से पहले युवा होने एवं दिखने वाले बच्चों पर… Read more »

तिब्बत मामले पर सन्नाटे को तोड़ता संघ

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तिब्बती जनता पर चीन के दमनचक्र के विरुद्ध राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने तिब्बतियों के संघर्ष को स्वर देने शुरु कर दिए है। इसकी एक झलक राष्ट्रीय जनक्रांति की 54 वर्षगांठ पर दिल्ली में चीन के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में देखने को मिली। हजारों की संख्या में उपसिथत तिब्बतियों और भारतीय नागरिकों को सम्बोधित… Read more »

“सेव पेपर कैम्पेन”-डीयू छात्रों की अनोखी पहल

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  दिल्ली विश्वविद्यालय में अमूमन फ़रवरी-मार्च के महीनों में काफी चहलपहल रहती है। यहाँ पढ़ने वालों के शब्दों में कहें तो दूसरी जगहों पर बसंत महसूस किया जाता है, यहाँ वह प्रत्यक्ष झूमते, गाते, गुनगुनाते छात्रों की मस्तानी भीड़ के रूप में दिखाई पड़ती है। यही वह महिना होता है जब डीयू के कॉलेजों में… Read more »

पुराने वर्ष को जरूर विदा करें ,मगर अपनी बुराइयों के साथ

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डॉ. दीपक आचार्य पूरी दुनिया साल भर बाद आज फिर पुराने वर्ष को विदा देने के लिए जबर्दस्त उतावली और आतुर है। इसी दौड़ में हम भारतीय भी पिछलग्गू बने हुए सन् 2012 को अलविदा कहने के लिए क्या-क्या नहीं कर गुजर रहे। कई दिनों से हमने जाने कितने जतन किये हैं अपने इस वर्ष… Read more »

एक आंदोलन में बदलता शौचालय अभियान

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प्रमोद भार्गव   घर घर में शौचालय निर्माण अभियान को केंद्र्र में लाने का श्रेय केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश को दिया जा सकता है। हालांकि उनके मंदिर से शौचालय की तुलना करने वाले बयान से सहमति नहीं जतार्इ जा सकती, लेकिन उन्होंने बेटियों से जिस घर में शौचालय न हो, उस परिवार की… Read more »

दारुल उलूम का फतवा स्थापित कर सकता है सौहाद्र का नया इतिहास

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प्रवीण गुगनानी भारतीय मुसलमानों को छोड़ना चाहिए अंग्रेजों की दी हुई गौमांस की कुटेव गौवंश वध हमारें विशाल लोकतान्त्रिक देश भारत के लिए अब एक चुनौती बन गया है. देश में प्रतिदिन शासन प्रशासन के सामनें गौ वध और अवैध गौ तस्करी के मामलें न केवल दैनंदिन के प्रशासनिक कार्यों के बोझ और चुनौती को… Read more »

अल्पसंख्यक, आरक्षण और शिक्षा

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कुमार प्रत्युष भारत की राजनीति में अल्पसंख्यक और धर्मनिरपेक्ष शब्द का जितना ज्यादा प्रयोग या दुरूपयोग हुआ है, संभवतः अन्य किसी शब्द का ना हुआ हो! हर स्वार्थ्य को साधने का एकमात्र, आसान सा तीर है की उसे अल्पसंख्यकों के भलाई से जोड़ दिया जाए! मेरे मन में ये प्रश्न हमेशा से रहा है की… Read more »

संवैधानिक-मान्यता भोजपुरी का अधिकार है

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 पियूष द्विवेदी ‘भारत’ पिछले संसदीय सत्र में तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम, जिन्हें कभी हिंदी बोलते हुवे भी नही देखा गया, ने जब संसद के अंदर भोजपुरिया लोगों के प्रति भोजपुरी में कहा कि – ‘हम रऊवा सब के भावना समझतानी’ तब उनकी इस बात से हर उस भोजपुरिया आदमी, जो बहुत काल से इस बात… Read more »

बाघों के इलाके में पर्यटन

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प्रमोद भार्गव संदर्भ- सुप्रीम कोर्ट का बाघों के कोर एरिया में पर्यटकों के प्रतिबंध संबंधी आदेश। सर्वोच्च न्यायालय की रोक के चलते अब सैलानी राष्ट्रीय उधोगों और अभयारण्यों में स्थित बाधों के प्राकृतिक आवास स्थलों के निकट नहीं धूम सकेंगे। न्यायालय ने सभी राज्यों को बाघ्यकारी आदेश देते हुए कहा है कि बाघों के भीतर… Read more »