लेखक परिचय

प्रभांशु ओझा

प्रभांशु ओझा

प्रभांशु ओझा ,योजना ,कुरुक्षेत्र ,जैसे विभिन्न पत्र पत्रिकाओं तथा भारत के विभिन्न समाचार पत्रों में विभिन्न पर्यावरणीय और अन्य प्रासंगिक मुद्दों पर लिखते रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न वाद विवाद प्रतियोगिताएं में 600 से अधिक पुरस्कार जीत चुके हैं .पर्यावरण पर मुंबई में आई डी एफ सी संस्था द्वरा आयोजित वाद विवाद प्रतियोगिता जिसमे की 2 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं

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पर्यावरण प्रदूषण वर्त्तमान समाज की सबसे ज्वलंत समस्या है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है की हमारे विश्वविद्यालय और वहां के छात्र पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करें और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के नवीन नवीन उपायों से अवगत काराएं. इसी के मद्देनजर ग्रीन केमेस्ट्री नेटवर्क दिल्ली यूनिवर्सिटी और ग्रीन केमेस्ट्री सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस ,यॉर्क विश्वविद्यालय ,अमेरिका के बैनर तले एक अन्तराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी का प्रमुख विषय कचरा प्रबंधन और कचरे से ऊर्जा निर्माण में ग्रामीण जैवशोधक संयंत्रों के विकास से जुड़ा हुआ था .कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश से आये विद्वान वक्ताओं ने पर्यावरण प्रदूषण की चुनौती से निबटने के लिए ‘वेस्ट –मैनेजमेंट” को एक प्रमुख उपाय बताया कहा की इस पर अगर ठीक ढंग से कार्य किया जाये तो इससे कचरा –प्रबंधन में तो आसानी होगी ही साथ ही साथ कचरे से ऊर्जा निर्माण की दिशा में भी यह  क्रांतिकारी कदम होगा .ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे जैवशोधक संयंत्रों की स्थापना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कदम साबित होगी.ग्रीन केमेस्ट्री नेटवर्क के संयोजक और दिल्ली विश्वविद्यालय में रासायन विज्ञान विभाग के प्रोफ़ेसर आर. के . शर्मा ने बताया की वह व्यक्तिगत रूप से भी और अपने संस्था के माध्यम से भी अनवरत रूप से पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न अन्तराष्ट्रीय कार्यशालाओं का आयोजन करते रहते हैं जहाँ छात्रों और प्राध्यापकों को इस बात के लिए प्रशिक्षित किया जाता है की वह आम जन के बीच जाकर पर्यावरण संरक्षण के नवीन और व्यवहारिक उपायों के प्रति आम-जन को प्रेरित और जागरूक कर सकें .प्रोफ़ेसर शर्मा ने अपने व्याख्यान के माध्यम से उन विकसित देशों के उदाहरण भी प्रस्तुत किये जहाँ कचरा प्रबंधन ना सिर्फ बहुत बड़ी समस्या हुवा करती थी बल्कि धीरे-धीरे जानलेवा भी होती जा रही थी ,परन्तु आधुनिकतम तकनीकि का इस्तेमाल करके उन देशों ने ना सिर्फ कचरा –प्रबंधन की समस्या से मुक्ति पायी बल्कि यही कचरा उनके यहाँ ऊर्जा का प्रमुख श्रोत बनकर भी उभरा. प्रोफ़ेसर शर्मा ने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों जैवशोधक संयंत्रों के माध्यम से कचरा प्रबंधन और उसके द्वारा ऊर्जा निर्माण की तमाम संभावनाओं का जिक्र किया. कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और अपनी सक्रिय भूमिका निभायी.इससे पूर्व ग्रीन केमेस्ट्री संस्था जल –प्रबंधन पर भी एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन कर चुकी है.समय आगया की पर्यावरण संरक्षण के लिए परदे के पीछे रहकर कार्य करने वाले प्रोफ़ेसर आरके शर्मा और उनकी संस्था  के विचार जन-जन तक पहुंचाने में सरकार भी अपनी प्रमुख भूमिका निभाए.

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