लेखक परिचय

आदर्श तिवारी

आदर्श तिवारी

लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार व ब्लॉगर हैं।

Posted On by &filed under राजनीति.


dinesh-mohaniya-sent-to-jail_आदर्श तिवारी
दिल्ली में एक ऐसा मुख्यमंत्री बैठा है जो केवल अपने नाटकीय कार्यों के लिए चर्चा में रहता है,एक नाटक खत्म नही हुआ कि दूसरा नाटक तैयार हो जाता है. जबसे दिल्ली के मुख्यमंत्री का पदभार केजरीवाल संभाले है, हर रोज कुछ न कुछ बवाल केंद्र सरकार पर बेजा आरोप लगा कर खड़ा कर देते हैं. दिल्ली की जनता ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि हम जिस व्यक्ति को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंप रहे हैं, वो व्यक्ति अपना समय दिल्ली के विकास में न देकर व्यर्थ के मुद्दों पर देगा. दरअसल, शनिवार को दिल्ली के विधायक दिनेश मोहनिया को पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही गिरफ्तार कर लिया. उनके ऊपर एक महिला से बदसलूकी का आरोप है,पुलिस द्वारा दो बार नोटिस देने के बावजूद मोहनिया इस नोटिस का कोई जवाब नही दिया. उसके बाद पुलिस ने मोहनिया पर उक्त कार्यवाही की. गिरफ्तारी की जैसे ही खबर आई केजरीवाल बौखला गये और एक के बाद एक ट्विट कर इस गिरफ्तारी की तुलना आपातकाल से कर दिया. सवाल खड़ा होता है कि महिला से बदसलूकी के मामले में गिरफ्तारी आपातकाल है ? सवाल की तह में जाने से पहले हमें थोड़ा उस कालखंड में जाना होगा जब केजरीवाल चुनाव प्रचार में लगे थे, तब महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर लंबी–लंबी बातें किया करते थे.परंतु आज केजरीवाल महिला के साथ बदसलूकी करने वाले विधायक से समर्थन में खड़ें हैं .ये पहला ऐसा मुद्दा नही हैं जहाँ केजरीवाल ने हंगामा किया हो उनके हंगामे की एक लंबी फेहरिस्त है.खैर, इससे पहले जब सोमनाथ भारती पर महिला उत्पीड़न का केस दर्ज हुआ था, तब भी केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी अंत तक सोमनाथ के समर्थन में आवाज़ बुलंद करती रही.बाद में हक़ीकत सामने आने के बाद औंधे मुंह गिरे, अब मोहनिया पर जब एक महिला से बदसलूकी जैसे गंभीर आरोप लगें है, ऐसे में आपातकाल का जिक्र कर अपने विधायक का बचाव करना न केवल केजरीवाल के महिला सुरक्षा के वादों और दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है बल्कि उनकी अलग तरह की राजनीति के पाखंड को भी सामने लाता है. अभी ये मामला शांत भी नहीं हुआ था कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ऊपर भी एक व्यापारी को धमकाने का आरोप लगा है लेकिन अभी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है फिर भी उतावलेपन में मनीष सिसोदिया अपने विधायकों को इकट्टा कर प्रधानमंत्री आवास की तरफ गिरफ्तारी देने के लिए जाने लगे,कितनी हास्यास्पद स्थिति हैं जिसके ऊपर केस दर्ज हुआ है उस विधायक को समूची पार्टी बचा रही है और जिसपर कोई केस दर्ज नहीं वो थाने की बजाय प्रधानमंत्री आवास गिरफ्तारी देने जा रहा.इस प्रकार से ढोंग के जरिये केजरीवाल जनता को मुख्य मुद्दे से भटकाने का प्रयास कर रहें हैं.एक अलग तरह की राजनीति का दावा कर राजनीति में आने वाली इस पार्टी को लेकर कभी कल्पना भी नही की गई होगी कि ये पार्टी इस तरह की विचित्र राजनीति करेगी जिसमें खुद को सही साबित किया जाए बाकि जो उनके खिलाफ में आए उनकी विश्वसनीयता को भंग करने का प्रयास किया जाए.देश में और भी मुख्यमंत्री हैं जिनका राजनीतिक विरोध अपनी जगह है किंतु संघीय ढाचें का सम्मान करते हैं उसकी मर्यादाओं मे रहते हैं पंरतु केजरीवाल ने इनसब मर्यादाओं को ताक पर छोड़ दिया है.राजनीतिक लोभ और ईर्ष्या से ग्रस्त केजरीवाल को अपने मुख्य मुद्दों पर भी ध्यान देने चाहिए उन सपनों को भी याद रखना चाहिए जो उन्होंने दिल्ली की जनता को दिखाए हैं.कब तक ये रोना रोते रहेंगे कि मोदी जी काम नहीं करने दे रहे सवाल यह भी कि आप कर क्या रहे ?

Leave a Reply

7 Comments on "अलग तरह की राजनीति का पाखंड"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
बीनू भटनागर
Guest
बीनू भटनागर

स्कूलों मे और अस्पतालों मे ज़रूर सुधार हुआ होगा भ्ष्टाचार ख़त्म तो नहीं हुआ होगा कुछ कमी हुई होगी, मेरे पास कोई आँकड़े नहीं हैं इसिलये मै इस पर बहस नहीं करूँगी। मै यह भी मानती हूँ कि दिल्ली सरकार के विधायकों की गिरफ्तारी मे पुलिस ने हमेशा तत्परता दिखाई है।
 चुनाव से पहले अरविद चीख चीख़ कर कहते थे कि वो दाग़ी लोगों को टिकट नहीं देंगे, महिलाओं की 
सुरक्षा पर ध्यान देंगें और न जाने क्या क्या….. अब उन्हे अपनी भाषा की मर्यादा पर ही नियंत्रण नहीं है मै ये नहीं कहती दूसरे लोग दूध के धुले हैं पर ये पार्टी तो औरों से अलग होने की बात करती थी।आपने योगेन्द्र यादव और प्रशाँत भूषण को इसलिये पार्टी से निकलवाया क्योंकि आपको रोकटोक पसन्द नहीं थी सिर्फ जी हजूर कहने वाले चहिये थे…… आपके घँमड और इन्ही बातों  ने मुझे ही नहीं बहुतों को निराश किया है। 

आर. सिंह
Guest
बीनू जी,आपतो दिल्ली में रहती हैं.आपकी बगल में दिल्ली सरकार का स्कूल है.एक किलोमीटर पर सरकारी अस्पताल है. आप स्वयं अवलोकन क्यों नहीं कर लेती हैं? इस तरह संदिग्ध भूतकाल में क्यों बात कर रही हैं?रही कार्यालयों में भ्रष्टाचार ख़त्म होने की बात, तो आप वह भी जांच कर सकती हैं.योगेन्द्र यादव ,प्रशांत भूषण के मामलों को दिल्ली सरकार की शासन से कोई सम्बन्ध नहीं होना चाहिए.रही बात दागी एम.एल.ए की,तो हमलोग कोर्ट के फैसलों का इंतजार करें ,तो अच्छा रहे,क्योंकि पुलिस और आआप की सरकार में जो उठा पटक चल रही है,उसमे कुछ भी कहना जायज नहीं होगा.
बीनू भटनागर
Guest
बीनू भटनागर

सिंह सहब न मै बीजेपी मे हूँ न आप मे, अब स्कूल के काम का या अस्पताल के कामकाज का आकलन करने मै किस हैसियत से वहाँ जाऊँ इसलिये आपकी बात स्वीकार कर लेती हूँ।दूसरे लोग सही नहीं हैं कहने मे मै विश्वास नहीं रखती।दिल्ली सरकार के कामकाज पर योगेन्द्र और प्रशाँत के जाने से फर्क न पड़ा हो,पर मुझ पर पड़ा है।यहाँ से हमारे रास्ते अलग हो चुके हैं।यद्यपि मै स्वराज अभियान औपचारिक रूप से नहीं जुड़ी हूँ फिर भी उनके साथ हूँ मेरे लिये सही से जुड़ना
 ज़रूरी है सत्ता से नहीं। अरविंद की भाषा तौर तरीके हमे जरा नहीं पसन्द, उनके सलाहकार भी नहीं पसन्द।

आर. सिंह
Guest

एक आम नागरिक के नाते तो आप वहां जा हीं सकती हैं.अस्पताल में तो किसी रोगी की तरह या किसी रोगी के साथ जाना और आसान है.व्यक्तिगत रुचि या लगाव अपने पसंद या नापसंद की बात है,पर अच्छे काम अगर हो रहे हैं,तो उसको स्वीकारना ही पड़ेगा

Binu Bhatnagar
Guest

मैने जब आपकी बात स्वीकार कर ही ली है तो वहाँ जाने का क्या औचित्य है नमेरा कोई वहाँ पढ़ रहा है न किसी मरीज़ को ले जाना है। राजनीति से मन उचट गया है। केवल लेखन मे व्यस्त हूँ जल्द ही मेरा कविता संग्रह आने वाला है।

आर. सिंह
Guest

बधाई.एक नेक सलाह .विवादात्मक विषयों से अपने को दूर रखिये.

आर. सिंह
Guest
आदर्श तिवारी जी,क्या आप सचमुच में स्वतन्त्र टिप्पणीकार और ब्लॉगर हैं?मुझे तो आप चारण लग रहे हैं.अरविन्द केजरीवाल आपको बुरे इसलिए लग रहे हैं,क्योंकि वे आपके पूजनीय के विरुद्ध हैं.अरविन्द केजरीवाल की सरकार जो दिल्ली में कर रही है,वह आप लोगों को दिखाई क्यों नहीं देता?क्या दिल्ली के सरकारी स्कूलों और सरकारी अस्प्तालों में जो सुधार हुआ है,वह सचमुच आपलोगों को नहीं दिखाई देता ?दिल्ली सरकार के दफ्तरों में भ्रष्टाचार का खत्म हो गया है,इसपर आपलोगों की नजर क्यों नहीं पड़ रही है? एक अफसर को दिल्ली सरकार ने सोलह महीने पहले माँगा था.सोलह महीने बाद जो जबाब आता है… Read more »
wpDiscuz