लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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मयंक चतुर्वेदी

asht laxmi

सांसारिक जीवन में आज धन के महत्व को कोई नकार नहीं सकता। भारतीय परम्परा में वैदिक काल में ही इसके महत्व को स्वीकार करते हुए ऐसे मंत्रों और प्रार्थनाओं का श्रृजन किया गया था जिससे मनुष्य जीविनभर अधि‍क से अधि‍क धन कमाने के प्रयास कर सके। आज यह सिद्ध भी हो गया है कि विचार ही मनुष्य के जीवन में उसके अच्छे और बुरे वक्त का निर्माण करते हैं। जिसका कि चिंतन बार-बार किया जाता है। विचारों की ताकत यह है कि कुछ समय बाद वह हमारे सामने फलीभूत हो जाता है। संभवत: यही सोचकर भारतीय मनीषि‍यों ने कर्मकाण्ड के पूजन विधान का श्रृजन किया हो। भारतीयता के प्रचलन में देखें तो संपूर्ण पूजा पद्धति में जो  समानता  है वह है सूखमय जीवन की कामना, उसके लिए ईश्वर से प्रार्थना।

 

जीवन में सदैव आनंद बना रहे और कभी आर्थि‍क परेशानी न हो इसके लिए वर्षभर में एक बार आने वाला त्यौहार दीपावली है। जिसमें धन की देवी से कामना की जाती है कि वह अर्थ की कमी से कभी हमें दो-चार ना होने दे। इस दृि‍ष्ट से देखें तो कर्मकाण्ड में कई विधान हैं, उनमें से एक सरल और दीपावली के दिन सहजता से किया जाने वाला कार्य है वह है इस दिन महालक्ष्मी के बताए गए आठों स्वरूपों की विधि के साथ पूजन करना।
शास्त्रों में बताए गए महालक्ष्मी के ये सभी आठ स्वरूप प्रत्येक मनुष्य के जीवन में स्थाई सुख और शांति देते हैं। इन आठों स्वरूपों में लक्ष्मीजी जीवन के आठ अलग-अलग भागों से जुड़ी हैं। जिन लोगों ने अभी तक अपने जीवन मे इन सभी स्वरूपों की विधि के साथ पूजन किया है, वे सभी आज मानते हैं कि उनका जीवन जटिलताओं से मुक्त है।
आज बाजार में इसके पूजन को जानने के लिए पुस्तकें उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग किया जा सकता है, यदि यह कहीं नहीं मिले तो किसी विद्वान से जिसे कर्मकाण्ड की संपूर्ण जानकारी हो का इस संबंध में सहयोग लिया जा सकता है।

 

मां लक्ष्मी के अष्ट रूप

श्री का गज लक्ष्मी रूप – दीपावली के दिन लक्ष्मी जी के गज लक्ष्मी रूप की पूजा हमें स्वास्थ्य शरीर और बल की पुष्टी प्रदान करती है। गज लक्ष्मी की दीपावली के बाद भी यदि प्रार्थना के लगातार आगे भी निरंतर करना जारी रखा जाए तो बिमारियों से छुटकारा मिलता है, ऐसी मान्यता है।

 

श्री का धन-धान्य रूप- मां लक्ष्मी के इस स्वरूप की पूजा मनुष्य के जीवन में धन और धान्य की कमी नहीं होने देती है। लक्ष्मी सूक्त में इसीलिए विशेषकर इस रूप की विशेष प्रार्थना की गई है।

 

श्री का विद्या लक्ष्मी रूप – संस्कृत में एक श्लोक है कि विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम् । पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥ विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म, और धर्म से सुख प्राप्त होता है । वास्तव में लक्ष्मी के इस रूप की पूजा इसीलिए ही की जाती है कि जीवन में बुद्धि और ज्ञान मिले ताकि आगे के लिए संपूर्ण जीवन सुखमय हो सके।

 

श्री का धैर्य लक्ष्मी रूप – वास्तव में यदि जीवन मे धैय न आए तो आया हुआ धन क्या संपूर्ण जीवन ही अस्त-व्यस्त हो जाता है। परेशानियां नहीं होने पर भी हम उनका अपने आचरण से आमंत्रण कर बैठते हैं। वस्तुत: इस अव्यवस्थि‍त जीवन से मुक्ति दिलाने का काम श्री का धैर्य लक्ष्मी रूप करता है । यह पूजा मुख्यत: जीवन में आत्मबल और धैर्य की वृद्धि करती है।

 

श्री का आदि लक्ष्मी रूप – वह स्वरूप है मां लक्ष्मी का जो हमारे जीवन में प्रारब्ध को सुखमय बनाती हैं ये जीवन के प्रारंभ और आयु से संबोधित हैं। इसलिए इनसे स्वस्थ जीवन की कामना की जाती है।

 

श्री का संतान लक्ष्मी रूप – श्री सुक्त में कामना की जाती है कि वह मां लक्ष्मी उनके परिवार को सुखमय रखें। वास्तव में परिवार और संतान के निरंतर सुख की कामना से इस स्वरूप की आराधना का विशेष महत्व है। जिन दम्पत्ति‍यों को संतान सुख अभी तक किसी कारणवश नहीं मिल सका है वे इस पूजा से ईश्वर आराधना करें।
श्री का विजयलक्ष्मी रूप – जीवन में कभी ऐसा नहीं होता कि संघर्ष न करना पड़े, कभी अपने बास से तो कभी अपने परिवार जनों के साथ अथवा कभी शत्रुओं से वैचारिक या शारीरिक संघर्ष की सि्थति बनती ही है ऐसे में विजय और वर्चस्व की कामना से श्री के इस स्वरूप की पूजा की जाती है।
श्री का ऐश्वर्य लक्ष्मी रूप – लक्ष्मी सूक्त में श्री से इस श्लोक के माध्यम से यह कामना की गई है कि पुत्र पौत्र धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम्‌। प्रजानां भवसी माता आयुष्मंतं करोतु मे॥ – हे देवी! आप सृष्टि के समस्त जीवों की माता हैं। आप मुझे पुत्र-पौत्र, धन-धान्य, हाथी-घोड़े, गौ, बैल, रथ आदि प्रदान करें। आप मुझे दीर्घ-आयुष्य बनाएँ। वस्तुत: श्री का ऐश्वर्य लक्ष्मी रूप जीवन में प्रणय और भोग प्रदान करता है।

 

दीपावली पर वैसे भी इस बार जो योग बन रहा है वह गजकेसरी योग के साथ 95 सालों बाद आया गुरु पुष्य राजयोग है, इसके अलावा 60 साल बाद न्यायाधि‍पति शनि और देव गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि‍यों में हैं। यह संयोग दोबारा 616 सालों बाद आएगा, हमारे आकाश मंडल के यदि दो ग्रहों सुर्य और केतु को छोड़ दिया जाए तो अन्य सात ग्रह दीपावली को अनुकूल सि्थति में हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस बार की दीपावली ज्योषि‍य गणना के अनुसार महासंयोग लेकर आ रही है। इसलिए भी इस बार मां लक्ष्मी की पूजा में श्री के अष्ट लक्ष्मी स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व और योग है।

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