लेखक परिचय

संजीव कुमार सिन्‍हा

संजीव कुमार सिन्‍हा

2 जनवरी, 1978 को पुपरी, बिहार में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कला और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्रियां हासिल कीं। दर्जन भर पुस्तकों का संपादन। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर नियमित लेखन। पेंटिंग का शौक। छात्र आंदोलन में एक दशक तक सक्रिय। जनांदोलनों में बराबर भागीदारी। मोबाइल न. 9868964804 संप्रति: संपादक, प्रवक्‍ता डॉट कॉम

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स्वस्थ बहस ही लोकतंत्र का प्राण होती है। ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम‘ पर हुए विचार-विमर्शों में हमने हमेशा आम आदमी की आवाजों को प्रमुख स्‍थान दिया है। हमने कहा है, ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ का मतलब ‘आवाज आपकी’। ‘प्रवक्‍ता’ पर हम एक नया स्‍तंभ ‘परिचर्चा प्रारंभ कर रहे हैं। यहां आप समसामयिक प्रश्‍नों पर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। आपसे निवेदन है कि अश्लील, असंसदीय, अपमानजनक संदेश लिखने से बचें और विचारशील बहस को आगे बढाएं।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मराठी मानुष के नाम पर महाराष्ट्र में रह रहे ग़ैर-मराठियों के ख़िलाफ़ पिछले कुछ समय से अभियान चला रखा है।

हम यहां मनसे प्रमुख राज ठाकरे का बयान प्रकाशित कर रहे हैं-

नए अकादमिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है और हम इन शिक्षण संस्थानों पर ऩजर रखेंगे। हम जानते हैं कि उत्तर-प्रदेश और बिहार के ये प्रभावी छात्र अहंकारी व्यवहार करते हैं और छेड़छाड़ आदि में लिप्त रहते हैं। अगर उनका रवैया नहीं बदला तो उन्हें सबक सिखाया जाएगा। (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों को कई इलाकों में घेर-घेर कर मारा। परीक्षा केंद्रों में घुसकर भी छात्रों की पिटाई और उन्हें वहां से भगा दिया।) छात्रों की पिटाई जायज है और पार्टी का यह अभियान जारी रहेगा।

उत्तर भारतीयों को महाराष्ट्र की संस्कृति से खिलवाड़ नहीं करने देंगे। बिहार से आए लोग ‘छठ का ड्रामा’ करके मुंबई में वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। महाराष्ट्र में सिर्फ महाराष्ट्र दिवस मनाया जाएगा।

महाराष्ट्र के निवासी होने के बावजूद फिल्‍म अभिनेता अमिताभ बच्‍चन ने राज्य के लिए ख़ास कुछ नहीं किया। जब उन्हें (अमिताभ को) चुनाव लड़ना था तो वह इलाहाबाद चले गए। उन्होंने मुंबई से चुनाव क्यों नहीं लड़ा? यहाँ तक कि ब्रांड अंबेसडर बनने के लिए भी उन्होंने उत्तर प्रदेश को ही चुना। (सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के घर पर राज ठाकरे के गुंडों ने हुड़दंग मचाया।)

भाषा बोलना, लिखना और पढ़ना आने से ही केवल काम नहीं चलेगा। मुंबई में उसे ही नौकरी दी जानी चाहिए जो इस राज्य में जन्मे हैं।

हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है। उसे केवल आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। संविधान में ये कहीं नहीं लिखा है कि हिन्दी राष्ट्रभाषा है फिर इसे लेकर इतना बवाल क्यों मचाया जा रहा है।  किसी की हिम्मत कैसे हो जाती है कि वो महाराष्ट्र में हिंदी में शपथ ले। (राज ठाकरे की धमकी के बावजूद विधानसभा में हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के एक विधायक राम कदम ने थप्पड़ मार दिया। उनके साथ हाथापाई की गई और उनपर लात-घूंसे भी बरसाए गए। राज ने विधानसभा में हिन्दी में शपथ लेने पर सपा विधायक अबू आजमी से हाथापाई करने वाले अपने विधायकों की पीठ थपथपाई।)

अगर महाराष्‍ट्र अलग राष्‍ट्र बन जाए तो इसके लिए हम जिम्‍मेदार नहीं होगे।

भाजपा का कहना है कि महाराष्ट्र में जो कुछ हो रहा है, वह कांग्रेस की घृणित विभाजनकारी राजनीति का खेल है। वह महाराष्ट्र का सामाजिक तानाबाना छिन्न-भिन्न कर प्रदेश को अराजकता के माहौल में झोंकना चाहती है। भाजपा का मानना है कि दरअसल कांग्रेस राज ठाकरे को मोहरा बनाकर मराठी वोटों को बांटने के साथ गैर मराठी वोटों को आंतकित कर हड़पना चाहती है।

कांग्रेस राज ठाकरे को हीरो बनाकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रही है। गौरतलब है कि 70 के दशक में बाल ठाकरे ने जब दक्षिण भारतीयों के खिलाफ अभियान चलाया था तब भी कांग्रेस का हाथ उनकी पीठ पर था और अब राज ठाकरे तथा उनके समर्थकों ने समूचे महाराष्ट्र में जो हिंसात्मक अभियान चलाया है उसे भी वहां की कांग्रेस सरकार के रवैये ने बल प्रदान किया है।

शिव सेना का कहना है कि राज ठाकरे का अंजाम जिन्ना जैसा ही होगा। जिन्ना ने देश तोड़ा और राज ठाकरे मराठी समाज को तोड़ रहे हैं। राज मराठियों को कांग्रेस की सुपारी लेकर तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। राज ठाकरे और उनके कार्यकर्ता “चूहा” हैं।

‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ का मानना है कि राष्ट्र का निर्माण एक भूमि, एक जन और एक संस्कृति पर टिका होता है। समस्त भारत एक राष्ट्र है। राज ठाकरे अलगाववादी भावना भड़का रहे हैं। क्षेत्रवाद, राष्‍ट्रवाद के लिए चुनौती है। संकीर्ण स्‍वार्थों के लिए राष्‍ट्रीय अस्मिता को चुनौती देना खतरनाक है। राष्ट्रभाषा का अपमान खुली गद्दारी है और ऐसी गद्दारी के लिए कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

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31 Comments on "परिचर्चा : राज ठाकरे की राजनीति के बारे में आप क्‍या कहते हैं?"

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Dr. Ashok Kumar Tiwari
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Dr. Ashok Kumar Tiwari
मैंने इन देशद्रोहियों को इनके घर में ललकारा है ठाकरे जैसे लोगों को उनके बिल में ही बर्बाद कर देंगे अगर आप सब साथ हैं तो :- …………………………………मैं भारत के गुजरात राज्य के अहमदाबाद से लिख रहा हूँ यहाँ जामनगर जिले में रिलायंस की आइल रिफायनरी है जहाँ इम्प्लाई के साथ बहुत बुरा सलूक होता है , देश औरराष्ट्र भाषा हिंदी के खिलाफ खुलेआम बोला जाता है, समझाने पर मुझे नौकरी से भी हटा दिया गया है , आशा है आप इसे न्यूज़ में छापकर दिखायेंगे डिटेल इस प्रकारहै :- Please see on this news sight :-http://www.newsvision.biz/index.php?id=213&page=national&nws=1657 ” हिन्दीदिवस की… Read more »
Jeet Bhargava
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दो बाते:
एक तो राज ठाकरे की कई बातो में दम होता है.

दूसरा वह तब ही भड़कता है, जब उसे भड़काने के लिए संजय निरुपम, कृपाशंकर सिंग, अबू आजमी, लालू, राहुल गेंदी, जैसे घोल हिन्दू विरोधी बयानबाजी करते हैं.

महाराष्ट्र में मराठी-उत्तर भारतीय हिन्दू वोटो में विभाजन की नीयत के साथ ये सेकुलर नेता बार-बार बेवजह राज ठाकरे को भड़काते हैं. और अपना उल्लू सीधा करते हैं. जबकि राजठाकरे की पार्टी में कई उत्तरभारतीय लोग बड़े पदों पर हैं.

rajesh soni numerologist
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राज इस रेअल्ली अ पोवेरफुल्ल हिन्दू यूथ, इ अग्री विथ हिस रियल hindutva

पप्पू मिश्र
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पप्पू मिश्र
दरअसल राज ठाकरे की राजनीति उस मुद्दे पर टिकी है, जिसे हमारे निठल्ले राजनेताओं ने कभी सोचा ही नहीं। यदि बिहार और उत्तरप्रदेश का अपेक्षित विकास होता, तो भला यहां के लोग मुंबई क्यों जाते। एक शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर किस तरह किस तरह बढ़ती भीड़ के चलते डांवाडोल हो जाता है। आप मुंबई जा कर देख सकते हैं। बिल्कुल सच है कि मुंबई भारतीयों की है। लेकिन सबसे पहले पटना पटनावासियों का है, दरभंगा के संसाधनों पर दरभंगा के लोगों का अधिकार है। गाजीपुर के संसाधनों पर गाजीपुर के लोगों का अधिकार है। इलाहाबाद के संसाधनों पर सर्वप्रथम इलाहाबादियों का… Read more »
shishir chandra
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kuch had tak raj thakre sahi kar raha hai.

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