लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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यात्रा संस्‍मरण

शादाब जफर’’शादाब’’

SANSAD_BHAWAN_SHADAB18.10.2013 की सुबहा जब मैं देहली पहुंचा और शहजाद भाई को फोन किया तो वो खूबसूरत मुस्कुराहट के साथ मेरे स्वागत करने के लिये संसद भवन के स्वागत कक्ष में मौजूद थे। कडी सुरक्षा चैकिग के बाद हम संसद भवन के वेंटिग रूम में पहॅुचे यहा पहुंचने से पहले हमारे मोबाईल, कैमरा, टेबलेट, बेग आदि सब सुरक्षा अधिकारियो ने अपने पास जमा करा लिये थे। थोडी देर में हमारा संसद भ्रमण पास शहजाद भाई के सहयोग से बनकर आ गया इसी दौरान भाई शहजाद जी ने संसद भवन कैंटीन में ले जाकर चाय नाश्ता कराया थोडी देर में ही देष के कोने कोने से आये मुझ सहित 36 लोगो का ग्रुप संसद भवन घुमने को तैयार था। एक गाईड हम सब लोगो को लेकर संसद भवन के महत्वपूर्ण बिंदुओ के बारे में बताता और दिखाता हुआ महात्मा गांधी के मूर्ति के सामने वाले गेट से हमे संसद भवन में प्रवेश कराया गया लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन के लोकसभा, राज्यसभा, लोकसभा म्यूजियम और लोकसभा के केंद्रीय कक्ष को करीब और बहुत करीब से देखने का मौका पाकर में अपने अन्दर एक अजीब तरह की आत्मसंतुष्टि महसूस कर रहे था वही लोकसभा के केंद्रीय कक्ष में दाखिल होते ही ऐसा लगा मानो में भी आज भारत के इतिहास का एक हिस्सा बन गया हूं।

इसी क्रम में जो जानकारी मुझे संसद भवन के बारे में मिली वो कुछ यू है। संसद भवन का निर्माण व भवन का शिलान्यास 12 फरवरी 1921 को ड्यूक आफ कनाट ने किया था। इस महती काम को अंजाम देने में छह वर्षां का लंबा समय लगा। इसका उद्घाटन तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन ने 18 जनवरी 1927 को किया था। संपूर्ण भवन के निर्माण कार्य में कुल 83 लाख रुपये की लागत आई। आकाररू गोलाकार आवृत्ति में निर्मित संसद भवन का व्यास 170.69 मीटर का है तथा इसकी परिधि आधा किलोमीटर से अधिक (536.33 मीटर) है जो करीब छह एकड़ (24281.16 वर्ग मीटर)भू-भाग पर स्थित है। दो अर्धवृत्ताकार भवन केंद्रीय हाल को खूबसूरत गुंबदों से घेरे हुए हैं। भवन के पहले तल का गलियारा 144 मजबूत खंभों पर टिका है। प्रत्येक खंभे की लम्बाई 27 फीट (8.23 मीटर) है। बाहरी दीवार ज्यामितीय ढंग से बनी है तथा इसके बीच में मुगलकालीन जालियां लगी हैं। भवन करीब छह एकड़ में फैला है तथा इसमें 12 द्वार हैं जिसमें गेट नम्बर 1 मुख्य द्वार है।

संसद का स्थापत्य नमूना अद्भुत है। मशहूर वास्तुविद लुटियंस ने भवन का डिजाइन तैयार किया था। सर हर्बर्ट बेकर के निरीक्षण में निर्माण कार्य संपन्न हुआ था। खंबों तथा गोलाकार बरामदों से निर्मित यह पुर्तगाली स्थापत्यकला का अद्भुत नमूना पेश करता है। गोलाकार गलियारों के कारण इसको शुरू में सर्कलुर हाउस कहा जाता था। संसद भवन के निर्माण में भारतीय शैली के स्पष्ट दर्शन मिलते हैं। प्राचीन भारतीय स्मारकों की तरह दीवारों तथा खिड़कियों पर छज्जों का इस्तेमाल किया गया है। संसद भवन देश की सर्वोच्‍च विधि निर्मात्री संस्था है। इसके प्रमुख रूप से तीन भाग हैं- लोकसभा, राज्यसभा और केंद्रीय हाल।

लोकसभा कक्ष- लोकसभा कक्ष अर्धवृत्ताकार है। यह करीब 4800 वर्ग फीट में स्थित है। इसके व्यास के मध्य में ऊंचे स्थान पर स्पीकर की कुर्सी स्थित है। लोकसभा के अध्यक्ष को स्पीकर कहा जाता है। सर रिचर्ड बेकर ने वास्तुकला का सुन्दर नमूना पेश करते हुए काष्ठ से सदन की दीवारों तथा सीटों का डिजाइन तैयार किया। स्पीकर की कुर्सी के विपरीत दिशा में पहले भारतीय विधायी सभा के अध्यक्ष विट्ठल भाई पटेल का चित्र स्थित है। अध्यक्ष की कुर्सी के नीचे की ओर पीठासीन अधिकारी की कुर्सी होती है जिस पर सेक्रेटी-जनरल (महासचिव) बैठता है। इसके पटल पर सदन में होने वाली कार्यवाई का ब्यौरा लिखा जाता है। मंत्री और सदन के अधिकारी भी अपनी रिपोर्ट सदन के पटल पर रखते हैं। पटल के एक ओर सरकारी पत्रकार बैठते हैं। सदन में 550 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। सीटें 6 भागों में विभाजित हैं। प्रत्येक भाग में 11 पंक्तियां हैं। दाहिनी तरफ की 1 तथा बायीं तरफ की 6 भाग में 97 सीटें हैं। बाकी के चार भागों में से प्रत्येक में 89 सीटें हैं। स्पीकर की कुर्सी के दाहिनी ओर सत्ता पक्ष के लोग बैठते हैं और बायीं ओर विपक्ष के लोग बैठते हैं।

राज्य सभा- इसको उच्च सदन कहा जाता है। इसमें सदस्यों की संख्या 250 तक हो सकती है। उप राष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। राज्य सभा के सदस्यों का चुनाव मतदान द्वारा जनता नहीं करती है,बल्कि राज्यों की विधानसभाओं के द्वारा सदस्यों का निर्वाचन होता है। यह स्थायी सदन है। यह कभी भंग नहीं होती। 12 सदस्यों का चुनाव राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। ये सदस्य क ला, विज्ञान, साहित्य आदि क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां होती हैं। इस सदन की सारी कार्यप्रणाली का संचालन भी लोकसभा की तरह होता है।

लोकसभा, राज्यसभा में माननीयो के आसन और लोकसभा, राज्यसभा कार्यवाही से जुडी तमाम चीजो के साथ ही लोकसभा, राज्यसभा के सभापतियो के आसन का अवलोकन वास्तव में अद्वभुत और अनमोल पलो में से एक रहा। वास्तव में। लोकसभा म्यूजियम वास्तव में एक अद्वभुत और अनमोल लोकसभा की धरोहरो में से एक है। देष के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के भाशण के अंष और पंडित जी के आदमकद इलेक्टोनिक्स पुतले का बोलना, म्यूजियम में अद्वभुत कलाकारी से सजी पत्थर और मिटटी की मासूम पर जैसे अभी बोलने वाली मूर्तिया वास्तव में देखने योग्य और देखकर कभी न भूलने वाली अनमोल, बेशकीमती बेमिसाल कलाकारो की कलाओ से भरा एक बेमिसाल संग्रहालय है।

संसद भवन से लौटने पर यू तो हमारी जिंदगी के साथ उस से जुडी तमाम यादे जुड गई पर शहजाद भाई का प्यार उन का दिया तोहफा वो दीवार घडी दीवार पर टंगी बार बार उन की याद दिलाती रहेगी।

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