लेखक परिचय

डॉ0 आशीष वशिष्ठ

डॉ0 आशीष वशिष्ठ

लेखक स्‍वतंत्र पत्रकार हैं।

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डॉ. आशीष वशिष्ठ 

देश की लीडिंग मोबाइल कंपनी एयरटेल के लेटस्ट एड की पंच लाइन ‘हर एक फ्रेण्ड जरूरी होता है’ से आप परिचित हो गये होंगे। मौज-मस्ती और जोश से लबरेज ये लाइन देश के युवाओं की नयी पहचान को सामने लाती है। चाइल्डहुड फ्रेण्डस से लेकर स्कूल, कॉलेज, युनिवर्सिटी और वर्किंग प्लेस तक फ्रेण्डस का एक बड़ा सर्कल और नेटवर्क हमारे पास होता है। ये रियलिटी है कि फ्रेण्डस के बिना जिंदगी फीकी और बेरौनक होती है। फ्रेण्डस के बीच कोई भेदभाव, फार्मलेटी और छिपाव नहीं होता है। बचपन से लेकर आजतक जितने भी फ्रेण्डस हैं, वो हमारी लाइफ में खास भूमिका निभाते हैं। दुनियाभर के अगर प्यारे रिश्‍तों की बात की जाए तो फ्रेण्डशिप को टॉप पोजीशन हासिल होगी।

याद करिए स्कूल, कॉलेज और युनिवर्सिटी के फ्रेण्डस। कॉलेज की कैन्टीन में कटिंग टी और समोसे का मजा लेने से लेकर क्लास बंक करने तक हर स्टेप पर फ्रेण्डस साथ होते हैं। फ्रेण्डशिप में हर चीज और बात शेयर होती है। हॉस्टल की लाइफ तो चलती ही फ्रेण्डस के सहारे है। हॉस्टल में तो बहुत कुछ शेयर करना पड़ता है। बुक्स, नोटस, लैपटॉप, मोबाइल, जींस, टीशर्ट, शूज़स, गॉग्लस, बाइक और न जाने क्या-क्या। लड़ाई-झगड़ा, गर्मागर्म बहस और तीखी नोंक-झोंक के बावजूद भी दिल फ्रेण्डस में रमता-जमता है। असलियत में ब्लड रिलेशन से अधिक जुड़ाव और प्यार फ्रेण्डस में होता है, क्योंकि फ्रेण्डस हम अपनी मर्जी और तबीयत के अनुसार बनाते हैं, किसी मजबूरी में नहीं।

जो बातें फ्रेण्डस एक-दूजे से सांझा करते हैं, वो बातें तो पेरेन्टस और सगे भाई-बहन से भी छिपाई जाती हैं। सूचना क्रांति के युग में मोबाइल से फेसबुक तक फ्रेण्डस से कान्टेक्ट में बने रहने के सैंकड़ों साधन मौजूद हैं। मार्निंग से इवनिंग तक किसी न किसी बहाने फ्रेण्डस से मिलने और बात करने के मौके ढूंढे और खोजे जाते हैं। जीवन के हर स्टेप पर नये फ्रेण्डस हमारी फ्रेण्ड लिस्ट में जुड़ते चले जाते हैं। गौरतलब है कि हमारी फ्रेण्डस की लिस्ट चाहे जितनी लंबी हो जाए, लेकिन हर फ्रेण्ड लाइफ में खास रोल अदा करता है। थोड़ा लाइफ के फ्लैश बैक में झांकिए, आपको एक नहीं कई ऐसे वाकये याद आएंगे जब आपके फ्रेण्डस ने आपकी हैल्प की होगी। फ्रेण्डस के बीच कोई फार्मेल्टी नहीं होती, इसलिए हम दोस्तों के एहसानों और हैल्प को याद नहीं रखते हैं। मेरी तरह आपके फ्रेण्डस ने भी आपकी कभी न कभी हैल्प जरूर की होगी।

फ्रेण्डस के साथ हमारा कॉम्फर्ट लेवल सबसे अधिक होता है। नो सॉरी, नो थैंक्यू के पिलर पर खड़ा फ्रेण्डशिप का रिलेशन दुनिया का सबसे खूबसूरत और स्वीट रिलेशन होता है। हां कभी-कभार फ्रेण्डस के बीच लड़ाई-झगड़ा और नाराजगी हो जाती है। लेकिन लाख नाराजगी और लड़ाई के बावजूद फ्रेण्डस एक-दूजे का नुकसान नहीं चाहते हैं। ऐक्चुलि लड़ाई और तकरार के बाद फ्रेण्डशिप का बांड और मजबूत हो जाता है। ये सच है कि बदलते दौर में फ्रेण्डशिप की सोच में भी चेंज आया है। किसी जमाने में सारी जिंदगी एक या दो फ्रेण्डस के सहारे कट जाती थी। लेकिन एक्स जेन की फ्रेण्ड लिस्ट और नेटवर्क का दायरा ग्लोबल हो चुका हैं। ऐसे में फ्रेण्डस की लंबी-चौड़ी लिस्टे और दो-चार सौ मोबाइल नम्बर होना आम बात हो चली है। बावजूद इसके फ्रेण्डशिप की इर्म्पोटेंस और वेल्यु कम नहीं हुई है।

लाइफ के लंबे सफर में फ्रेण्डस मिलते और जुड़ते चले जाते हैं। बदलते दौर में एक ही दोस्त से सारी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता है। हर दोस्त का लाइफ में एक खास स्पेस होता है और उसे वही तक रहने दो। बदलती सोच का कांसेप्ट ये है कि लाइफ में हर फ्रेण्ड जरूरी होता है। पुराने दौर की यह सोच और समझ की हर दोस्त से हर जरूरत पूरी होगी, नयी सोच और कांसेप्ट से डिलिट हो चुकी है। यही उभरते इण्डिया के यूथ की सोच है जो सबके लिए जगह बनाते हुए लाइफ जीना और एंज्वाय करना चाहती है। इस यूथफुल सोच में दुष्मनी के लिए स्पेस बहुत कम है क्योंकि उम्मीदों का पिटारा न के बराबर है। तेजी से बदलती और सिमटती दुनिया फ्रेण्डस के दम और बूते पर ही उड़ान भर रही है। जो जैसा है, उसको वैसे ही एक्सेप्ट करते हुए लाइफ जियो। कोई फ्रेण्ड काम आता है, कोई नहीं आता है। लेकिन साथ दोनों का बना रहता है।

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