लेखक परिचय

शिखा श्रीवास्‍तव

शिखा श्रीवास्‍तव

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लोगों के बीच में आंखे चुराते हुए
मुझे देखना और जब मैं मुस्कराऊं
तो तुम्हारी आंखों की चमक
गालों की लालिमा, कह जाती है
तुम्हें हमसे प्यार है
हमारी जरूरत है…
मुझे देखते हुए जब लोगों ने शुरू की तुम्हारी खिंचाई  ,
तो बड़ी बहादुरी से आपका यह कहना
हां, मैं देख रहा था और फिर सबके बीच
बात करते हुए निहारना और मुस्कराना
 छू लेता है मेरे अंर्तमन को
और शर्म से कर देता है मेरे चेहरे
को सुर्ख लाल
फिर दिल यही कहता है
तुम्हें हमसे प्यार है
हमारी जरूरत है…
प्यार का इजहार नहीं करते
लेकिन यह कहना कि जल्दी आना
और जाते हुए मुझे बेसब्री से देखना
यह कहना कि अपना ख्याल रखना
कह जाता है तुम्हें हमसे प्यार है
हमारी जरूरत है……
यूं ही अकेले मुस्कराना
और देखते हुए खुद के
 जज्बतों को छिपा लेना
पूछने पर कुछ नहीं के साथ
फिर तुम्हारा मुस्कराना कह जाता है
तुम्हें हमसे प्यार है
हमारी जरूरत है…
उनींदी आंखों के साथ मेरा
हाथ पकड़कर, खुद से कहना
तुम मेरी जरूरत हो
तुम्हारे बिना नहीं रह सकता
तब दिल कह  जाता है तुम्हें प्यार है
हमारी जरूरत है
तुम हो, तो ये दुनिया और हम हैं
तुम नहीं तो कुछ नहीं
बेजान सी लगती है दुनियाा
शायद दिल  और सांसों को हो गई है
तुम्हारी आदत है
लब्जो से न सही, लेकिन
तुम्हारे पास न होने पर
एहसास होता है
हमें तुमसे प्यार है
हमारी जरूरत है…
तुम हो पास,
तो कांटों में भी फूल नजर
आते हैं, पतझड़ में भी
बहार आ जाती है
बिन मौसम बरसात हो जाती है
दिल झूम-झूम कर कहता है
तुम्हें हमसे प्यार है
हमारी जरूरत है…
हंसी मजाक में ही मरने की बात सुन
लब्ज रूक  जाती है और सांसे थम जाती हैं
फिर थमें हुए लब्त्जों के साथ
यह कहना कि अब यह दुबारा न कहना
कह जाता कि तुम्हें मुझसे प्यार है….

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