लेखक परिचय

अन्नपूर्णा मित्तल

अन्नपूर्णा मित्तल

एक उभरती हुई पत्रकार. वेब मीडिया की ओर विशेष रुझान. नए - नए विषयों के लेखन में सक्रिय. वर्तमान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परस्नातक कर रही हैं. समाज के लिए कुछ नया करने को इच्छित.

Posted On by &filed under चुटकुले.


डैडी – बेटे, मैंने दूसरा सिम कार्ड लिया है, नंबर नोट कर लो 99…

बेटा – ओके डैड, सेव कर लिया.

डैडी – किस नाम से सेव किया ?

बेटा – डैडी नं. 2 …!!!


बेटी – मैं पड़ोसी से प्यार करती हूँ और उसके साथ भाग रही हूँ !

बाप – थैंक्स…. मेरे पैसे और समय दोनों बच गए.

बेटी – मैं लैटर पढ़ रही हूँ …. जो मम्मी रखकर गई हैं ….. !


जुड़वां बच्चे अपने कमरे में बैठे थे.

एक हंस-हंस के लोटपोट हो रहा था जबकि दूसरा उदास था.

बाप – इतना क्यों हंस रहे हो ?

बच्चा – मम्मी ने दोनों बार इसी को नहला दिया … !


पिता – एक ज़माना था जब मैं सिर्फ 10 रुपए में ही किराना, दूध, सब्जी और नाश्ता लेकर आता था.

पुत्र – अब संभव नहीं है पिताजी क्योंकि अब वहाँ सीसीटीवी कैमरा लगा होता है …. !


डैड – हू इज दिस गर्ल ?

बेटा – दिस इज माय गर्ल-फ्रेंड.

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अगले दिन …

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डैड – नाउ हू इज दिस “न्यू गर्ल” ?

बेटा – रिश्ता वही, आइटम नयी … !!!


क्या बात है पापा! आप हर नए साल बडे-बडे नेताओं को और अधिकारियो को ग्रिटिंग कार्ड भेजते है, जबकि वे लोग आप को जानते तक नही ?” दस साल के बेटे ने पूछा।

अरे तू नही समझेगा बिटवा ! मुझे जब इन कार्डो के जवाब मे उन लोगो के धन्यवाद पत्र आते है तो मै भी उस समय अपने आप को वी० आई० पी० समझने लगता हूं।”


बेटा- “क्या बताऊ पापा, सामने वाले मकान मे एक लडकी हर रोज़ खिडकी मे से रुमाल हिलाती है पर खिडकी का शिशा कभी नही खोलती।”

पिता- बहको मत बेटे, वह तुझे देख कर रुमाल नही हिलाती । दर असल वह इस मकान की नौकरानी है जो रोज़ खिडकी के शिशे साफ करती है।


पापा- बेटा, अमेरिका मे 15 साल के बच्चे भी अपने पैरों पे खडे हो जाते हैं।

बेटा- लेकिन पापा भारत मे तो एक साल का बच्चाा भागने भी लगता है ।


पापा- प्रियंका, तुम्हारे गणित मे इतने कम नम्बर क्यो आए?

प्रियंका, गैर हाजिरी के कारण!

पापा- क्या तुम गणित की परिक्षा के दिन गैर हाजिर थी?

प्रियंका – मै नही मेरे बगल मे बैठने वाली लडकी गैर हाजिर थी ।


बेटा अपने पिता से पूछ रहा था कि आप ने यह बेशुमार दौलत कैसे कमाई ।

पिता- शादी के बाद शुरुशुरु के दिनो की बात थी । मेरे पास सिर्फ 50 रु थे । मैने उन रुपयो से कुछ सेब खरीदे और बेच दिए। अगले दिन मैने दोबारा वही किया और ऐसा कई दिनो तक चलता रहा।

बेटा- अच्छा फिर ?

पिता- फिर ससुर की मृत्यू हो गई और बस, उन की सारी जायदाद हमे मिल गई।


पापा – मैने तुम्हे जो अठन्नी दी थी, मैने कहा था कि इसे खर्च मत करना, किसी को दान मे दे देना।

गोरव – मै इसे दान मे देना चाहता था फिर ख्याल आया कि यह पुण्य मै क्यो कमाऊ ? क्यो न आईस्क्रिम वाले को कमाने दूं? सो मैने उसे दे दी, अब उस का काम है कि वह उसे दान मे दे या न दे ।


एक पिता ने स्कूल से लौट रहे अपने बेटे को रास्ते में ही पकड़ा और दो थप्पड़ जमा दिए. फिर उस पर चिल्लाने लगा – “नालायक! बेवकूफ! तू किसी काम का नहीं है … !”

वहाँ से गुजर रहे एक राहगीर ने यह सब देखा तो पूछ लिया – “भाई, इस तरह बच्चे पर क्यों बिगड रहे हो ?”

पिता ने जवाब दिया – “कल इसका रिजल्ट आने वाला है और मैं आज ही एक हफ्ते के लिए शहर से बाहर जा रहा हूँ !”

पिता – बेटा, तुम अपनी नयी पैंट पहन कर कीचड़ में क्यों गिर गए!

पप्पू – क्योंकि मुझे उसे उतारने का समय ही नहीं मिला!


पप्पू को हाथ के नाख़ून खाने की आदत थी!

उसके माता-पिता ने उसको रामदेव के पास भेजा!

और अब पप्पू

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पैरों के नाख़ून भी खाता है!


पप्पू- आज मैडम ने एक सवाल पूछा जिसका जवाब सिर्फ मुझे ही पता था!

पिता – मेरा प्यारा बेटा, क्या सवाल था?

पप्पू- सवाल था! इस ब्लैकबोर्ड के पास सुसु किसने किया है?


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1 Comment on "पिता-पुत्र संबन्धित चुटकुले (father- child related jokes) – Part 1"

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ram naresh gupta
Guest

good u r paper is n ice ,job donbe by u is vgoodf ,pl keep it on

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