लेखक परिचय

पवन कुमार अरविन्द

पवन कुमार अरविन्द

देवरिया, उत्तर प्रदेश में जन्म। बी.एस-सी.(गणित), पी.जी.जे.एम.सी., एम.जे. की शिक्षा हासिल की। सन् १९९३ से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में। पाँच वर्षों तक संघ का प्रचारक। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्तीय मीडिया सेण्टर "विश्व संवाद केंद्र" गोरखपुर का प्रमुख रहते हुए "पूर्वा-संवाद" मासिक पत्रिका का संपादन। सम्प्रतिः संवाददाता, ‘एक्सप्रेस मीडिया सर्विस’ न्यूज एजेंसी, ऩई दिल्ली।

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पवन कुमार अरविंद

 

सचिव वैद्य, गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस।

राजधर्म तनु तीनि कर होईं बेगहिं नास॥


अर्थात-‘जिस राजा के सचिव, वैद्य और गुरू राजा के भयवश या उसे खुश रखने के लिए उसके सम्मुख उसके मन की और चिकनी-चुपड़ी बातें बोलते हों, उस राजा के राज्य, शरीर और धर्म का सर्वनाश हो जाता है।’ (रामचरितमानस)

ठीक इसी प्रकार, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी राहुल गांधी के एक ऐसे सचिव प्रतीत हो रहे हैं; जो केवल अपने नेता को प्रसन्न रखने के लिए ही बोलता है। दिग्विजय जैसे अपने सचिव सदृश व्यक्ति के बचनों में राहुल को सत्य दिखता है। यदि ऐसा नहीं होता तो राहुल दिग्विजय के तर्कों के आधार पर ग्रेटर नोएडा के भट्टा व पारसौल गांव के संदर्भ में 74 लोगों को मारे जाने का दावा क्यों करते ? भट्टा व पारसौल गांव में जो कुछ भी दिग्विजय ने पत्रकारों से कहा था, वही बातें राहुल ने प्रधानमंत्री के समक्ष दुहरायी।

दरअसल, इस मामले को लेकर राहुल सोमवार को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दिग्विजय की बातों को ही दुहराया। उन्होंने डॉ. सिंह से कहा कि भट्टा व पारसौल में कम से कम 74 शवों की राख बिखरी पड़ी है। उन्होंने दावा किया कि इसके बारे में गांव के सभी लोगों को जानकारी है। राहुल ने पुलिस कार्रवाई में कथित रूप से जले हुए शव और किसानों एवं उनके परिवार के लोगों के खिलाफ हिंसा की तस्वीरें भी दिखाई थी। उन्होंने कई स्थानीय महिलाओं के साथ बलात्कार होने की बात भी दुहरायी और यह भी कहा था कि स्थानीय लोगों की निर्ममता से पिटाई की गयी है।

लेकिन राहुल के इन दावों की हवा निकलती दिख रही है। दोनों गांवों में से एक भी व्यक्ति राहुल के दावों की पुष्टि करने को तैयार नहीं है। भट्टा व पारसौल गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने महिलाओं से बलात्कार संबंधी खबरें सुनी है लेकिन वे इसका दावा नहीं कर सकते। इस संदर्भ में ग्रामीण सिर्फ इतना ही बता रहे हैं कि पुलिस ने उनकी पिटाई की थी।

विदित हो कि 11 मई को राहुल गांधी प्रशासन को धता बताते हुए बाइक पर सवार होकर भट्टा व पारसौल पहुंचे थे। इस दौरान काफी राजनीतिक ड्रामा हुआ था। उनका साथ देने दिग्विजय सिंह भी उपस्थित थे। कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी भी हुई थी। वहां से लौटने के बाद सोमवार को राहुल ने 8 स्थानीय लोगों के साथ प्रधानमंत्री डॉ. सिंह से मुलाकात की। इन 8 स्थानीय लोगों में वीरेन्द्री देवी भी शामिल थी। वीरेन्द्री का कहना है कि उसे ऐसी किसी महिला के बारे में जानकारी नहीं है जिसके साथ दुष्कर्म हुआ हो। वीरेन्द्री ने बताया कि पुलिस ने कुछ महिलाओं की पिटाई जरूर की थी। पुलिस ने उसकी बेटी खुशबू की भी पिटाई की थी। वीरेन्द्री ने बताया कि उसने प्रधानमंत्री को यह नहीं बताया था कि भट्टा व पारसौल गांव से मिली राख में हडि्डयां मिली थी। वीरेन्द्री ने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री के साथ अंग्रेजी में हो रही बातचीत को समझ नहीं पाई। आश्चर्य की बात यह है कि राहुल के साथ प्रधानमंत्री से मिलने वाले 8 किसानों में से 7 भूमिगत हो गये हैं।

राहुल के इन दावों के बाद गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया और भट्टा व परसौल गांवों से मंगलवार को राख के कुछ सैंपल एकत्रित कर जांच के लिए आगरा भेजे गये। मेरठ के कमिश्नर भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि गांव के पांच स्थानों से राख का सैंपल केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला इसलिए भेजा गया है; ताकि उसमें विस्फोटकों की जांच हो सके। हालांकि, उन्होंने इस जांच के पहले ही कह दिया कि राख में मानव कंकाल मिलने से संबंधित आरोप बेबुनियाद हैं। हालांकि सत्यता क्या है, जांच रिपोर्ट आने के बाद स्वतः स्पष्ट हो जाएगा। मेरठ के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि गांव का कोई भी सदस्य गायब नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, 17 घायल हैं और दो की मौत हो गई है। इसके अलावा सभी लोग गांव में ही हैं।

वहीं, कांग्रेस राहुल के समर्थन में खड़ी हो गई है। पार्टी का कहना है कि किसानों पर पुलिस फायरिंग मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। किसानों को जब तक न्याय नहीं मिलेगा, कांग्रेस अपना आंदोलन बंद नहीं करेगी। विदित हो कि ग्रेटर नोएडा के किसान अपनी जमीनों की मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले करीब 4 महीने से गांव में धरने पर बैठे थे। धरनारत किसानों ने रोडवेज के कुछ कर्मचारियों को बंधक बना लिया था। प्रशासन बंधकों को मुक्त कराने के लिए 7 मई को भट्टा पारसौल गांव पहुंचा था, इसी दौरान किसानों व सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें पीएसी के 2 जवानों सहित चार लोगों की मौत हो गयी थी।

अब प्रश्न उठता है कि “कांग्रेस का भविष्य” और देश के भावी प्रधानमंत्री कहे जाने वाले राहुल गांधी क्या अपनी पार्टी के विनाश तक दिग्विजय जैसे लोगों के कर्णप्रिय लगने वाले वचनों को सुनते रहेंगे; या फिर कुछ अपनी भी बुद्धि लगायेंगे। क्योंकि निराधार और “तोतारटंत” बातें व्यक्ति की छवि तो बिगाड़ती ही हैं, विनाश की ओर भी उन्मुख करती हैं।

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1 Comment on "राहुल गांधी का हवा-हवाई ‘दिग्विजयी दावा’"

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एल. आर गान्धी
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अमूल बेबी में इतनी अक्ल कहाँ जो दिग्गी जैसे घाघ ‘भांड’ की ओछी हरकतों को समझ पाए.. जब से मद्य प्रदेश की सत्ता छिनी ..दिग्गी मियां अपना मानसिक संतुलन ही खो बैठे हैं…..उतिष्ठ कौन्तेय

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