लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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floodजम्मू-कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ ने जो तबाही मचाई है, वैसी उसके इतिहास में शायद पहले कभी नहीं मची। इस मौके पर सारा देश जम्मू-कश्मीर के भाई-बहनों के साथ है। उमर अब्दुल्ला की राज्य सरकार तो राहत-कार्य में दिलो-जान से लगी ही हुई है, बड़ी बात यह है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने भी कमाल कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना देर लगाए घटना-स्थल का दौरा किया और एक हजार करोड़ रु. याने 10 अरब रु. की मदद की घोषणा की।

इस घोषणा का कश्मीर के लोगों पर जबर्दस्त भावनात्मक और राजनीतिक असर हुए बिना नहीं रहेगा। मोदी सरकार तो कहेगी कि उसने अपना कर्तव्य किया है लेकिन कश्मीर में सांप्रदायिक विभाजन फैलानेवाले लोगों को काफी धक्का लगेगा, क्योंकि घाटी में बसे मुसलमान यह पहली बार महसूस करेंगे कि वे जिस नेता को हिंदुत्ववादी समझकर उससे दुराव करते हैं, वह उनकी मदद पर कितनी तेजी से दौड़ा चला आया है। भावनाओं का वेग बाढ़ के वेग से भी ज्यादा तेज होता है। जो मुसीबत में काम आए, असली मित्र वही होता है। मोदी की साक्षात उपस्थिति कश्मीरियों के घावों पर मरहम लगाएगी ही, एक अरब रु. की सहायता भी उनके बड़े काम आएगी। सरकारी मदद के अलावा कई गैर-सरकारी संस्थाएं भी बाढ़-पीडि़तों की मदद में जुट गई हैं। यह सारी मदद सबके लिए हैं। इसमें मजहब, जाति, भाषा और क्षेत्र का भेदभाव सब भूल गए हैं।

इस मदद का एक अद्भुत मानवीय पहलू भी हमारे सामने आया है। नरेंद्र मोदी ने वह कर दिखाया है, जो मैंने डाॅन टीवी को कश्मीर के बारे में कहा था। मैंने कहा था कि दोनों देशों के बीच कश्मीर एक खाई बन गया है। उसे हमें पुल बनाना है। उसे हमें प्रेम और सहयोग का सेतु बनाना है। मोदी ने पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर के बारे में गजब की उदारता दिखाई। उन्होंने वहां के लोगों को भी हार्दिक सहानुभूति दी और उन्हें भी मदद की पेशकश की। लेकिन पाकिस्तान की तरफ से जो जवाब आया है, उससे मैं बिल्कुल नाखुश हूं। पाकिस्तान ने कहा कि आपके कश्मीर को यदि मदद चाहिए हो तो हम दे सकते हैं। मैं नही समझता हूं कि ऐसा लट्ठमार जवाब मियां नवाज़ शरीफ दे सकते हैं। यह किसी नौकरशाह की करतूत है। इस प्रतिक्रिया पर हमें भड़कने की जरुरत नहीं है। मोदी की इस पहल का असर पाकिस्तान की जनता पर तो अच्छा होगा ही, दोनों कश्मीरों की जनता पर भी गजब का होगा। यह पहल इतनी शुभ है कि यह दोनों देशों के बीच टूट गए संवाद को भी फिर से जोड़ने में मदद करेगी।

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