लेखक परिचय

विजय कुमार

विजय कुमार

निदेशक, विश्व संवाद केन्द्र सुदर्शन कुंज, सुमन नगर, धर्मपुर देहरादून - २४८००१

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-विजय कुमार

दिल्ली में होने वाले गुलाममंडल खेलों के उद्धाटन, समापन आदि के लिए बना जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम भी अंतत: तैयार हो ही गया। इसका नाम नेहरू स्टेडियम बिल्कुल ठीक ही रखा गया है, क्योंकि अंग्रेजों के जाने के बाद भारत में गुलाम परम्पराओं को जीवित रखने के सबसे बड़े अपराधी नेहरू ही हैं।

वे स्वयं को गर्वपूर्वक भारत में अंतिम अंग्रेज कहते थे। इसी प्रकार वे स्वयं को जन्म से हिन्दू, कर्म से मुसलमान और विचारों से ईसाई मानते थे। जो लोग इस तमाशे के समर्थक हैं, वे सब नेहरूवादी गुलाम मानसिकता के शिकार हैं। मणिशंकर अय्यर ने जीवन में बस यही अच्छा काम किया है कि वे इस सर्कस के विरोधी हैं।

इस तमाशे पर कितना धन खर्च हो रहा है, यह ठीक-ठीक किसी को नहीं पता। 15 से लेकर 50 हजार करोड़ रुपए तक की बात लोग कह रहे हैं। इससे भारत के हर विकास खंड में एक चिकित्सालय और विद्यालय तथा हर जिले में एक खेल स्टेडियम बन सकता था; पर गांव और गरीब किसी की प्राथमिकता में तो हो…।

दुर्भाग्यवश भारत के सभी बड़े नेता, राजनीतिक दल, संस्थाएं तथा संगठन चुप हैं। उन्हें डर है कि इससे कहीं युवा शक्ति उनसे नाराज न हो जाए। वे भूलते हैं कि आधुनिक युवक भले ही कितना फैशन परस्त हो; क्रिकेट, सिनेमा या कैरियर के लिए भले ही वह कितना दीवाना हो; पर उसके मन में देशभक्ति की चिन्गारी विद्यमान है। यदि उसे ठीक से बात समझाएं, तो यह चिन्गारी बहुत शीघ्र ही दावानल बन सकती है।

हर्ष की बात है कि स्वामी रामदेव जी ने इसके विरुद्ध आवाज उठाई है। यदि वे आह्वान करें, तो इस मुद्दे पर करोड़ों भारतवासी उनके साथ आ सकते हैं। क्या ही अच्छा हो यदि स्वामी जी ने नेतृत्व में तीन अक्तूबर 2010 को दिल्ली के देशभक्त नागरिक सत्याग्रह करें। वे सुबह से ही सड़कें जाम कर किसी खिलाड़ी, नेता या दर्शक को उद्धाटन कार्यक्रम में न जानें दें। सारी दुनिया का मीडिया उस दिन यहां होगा। उनके माध्यम से दुनिया देखेगी कि ‘हम भारत के लोग’ इस गुलामी के चोगे को उतार फेंकना चाहते हैं।

यदि स्वामी रामदेव जी अभी से तीन अक्तूबर को दिल्ली में रहकर इस सत्याग्रह का नेतृत्व करने की घोषणा कर दें, तो गुलाममंडल खेलों के विरुद्ध वातावरण बनने लगेगा। दिल्ली के आसपास के लाखों लोग भी उस दिन यहां आ जाएंगे। दो अक्तूबर गांधी जी का जन्मदिवस भी है, जिन्होंने सत्याग्रह रूपी शस्त्र का अंग्रेजों के विरुद्ध प्रयोग किया था। अंग्रेज रानी के नेतृत्व वाले ‘गुलाममंडल सर्कस’ के विरुद्ध इस शस्त्र को एक बार फिर आजमाने की जरूरत है।

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9 Comments on "गुलाममंडल खेल और नेहरू स्टेडियम"

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आर. सिंह
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Main ek sawaal Mr.Aiyer se poochha hai ki ve us samay kahan the jab iske liye India ne bid kiyatha?Aam janataa se,jisme aap sab log shaamil hain yah sawaal main nahi poochunga,kyonki in sab baaton mein aam janataa ki rai lee hi kab jaati hai? Par Mr.Aiyer walaa sawaal main Baba Ramdeo se bhi karnaa chaahta hon ki ve us samay kya kar rahe the? Main is tarah ke aayojanon ka virodhi nahi hoon,par jis tarah isko aayojit kiya ja rahaa hai,uska main virodhi jaroor hoon.Sarkar aur uski agenciyon ke paas 7 saal ka samay tha,par lambe arse tak to… Read more »
sunil patel
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श्री विजय जी बिल्कुल सहि कह रहे है. धन्यवाद.
हमारे इतिहास से पर्दा उठना चाहिये.
लगता है सरकार ने पिछ्ला और अगले कई चुनाव खर्च कामनवेल्थ खेल मे पूरा कर लिया है.
लूटने की भी हद होती है. इनके आगे तो अन्गरेजो की लूट भी शरमा गई हॆ. क्या करे कामनवेल्थ खेल तो गोरी सरकार को सलामी देने के लिये ही है.
हर स्तर पर गुलामी की मानसिक्ता का विरोध होना चाहीये.
इतना धन अगर वाकई इमानदारी से खेलो पर खर्च होता तो हमारा देश कई खेलो मे ओलपिक मे स्वर्न पदक ले आने का सामार्थ्य रखता हे.

Anil Sehgal
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Author Shri Vijay Kumar presents Pandit Jawahar Lal Nehru’s own description of self as:
– Proud last Britisher in India
– Hindu by birth
– Muslim by deeds
– Christian by ideology

GOPAL K ARORA
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मंहगाई बढ़ती रहे बढ़ती है बढ़ जाय, खेल खेल में लुट गया आम आदमी हाय,….. यही है गुलाममंडल खेलों की आज की वास्तविकता … चमक दमक वाली पांच सितारा संस्कृति जब होटलों में नाचते हुए शराब के जाम छलकाती है तो उसे कहाँ दीखते हैं वे झुग्गियों के निवासी जो उसी होटल से कुछ दूरी पर पेट पर पट्टी बाँध कर सो रहे होते हैं.?…. प्रजातंत्र के बड़े बड़े दावों के बावजूद आज देश का शासन कुछ गिनती के “मेकाले के मानस पुत्रों” द्वारा संचालित किया जा रहा है ….. लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाने वाला मीडिया भी पांच… Read more »
डॉ. महेश सिन्‍हा
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अभी तो होड़ लगी है गुलामी की झंडे Queen’s baitan” को लेकर देश में दौड़ने की !! .
एक बड़े व्यावसायिक घराने ने तो बाकायदा बड़ा सा विज्ञापन छपवाया है की अभी झगडे को किनारे रखो . खेल हो जाने दो फिर हम खेलते रहेंगे , भरष्टाचार कौन सा बड़ा मुद्दा है ६६ सालों से खेल रहे हैं कुछ दिन चुप नहीं रह सकते.

thanthanpal
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भ्रष्ट्राचाराचा देशभावनेशी संबंध जोडणे योग्य आहे का? प्रेषक thanthanpal (रवि, 08/08/2010 – 16:29) राष्ट्रकुल खेळा च्या भ्रष्ट्राचारा ची धुणी धुवत देशाच्या इज्जतीची लक्तरे जगाच्या वेशीवर टांगली जात असताना, इतके दीवस ७ वर्ष खेळाची तय्यारी होत असताना आपला कांही संबंध नाही अश्या तोऱ्यात गप्प बसणाऱ्या सरकारला आता वाईट परीस्थीतिची जाणीव झाली. प्रकरण आपल्या अंगावर शेकणार आहे हे लक्षात आल्यावर तडकाफडकी संयोजन समितीच्या ४ पदाधिकाऱ्यांची हकालपट्टी करण्यात आली. आता मोठे शार्क मासे वाचवण्याची damage control An effort to minimize or curtail damage or loss. मोहीम जनतेच्या देशभावनेस आवाहन करत सुरु झाली आहे. याला म्हणतात चोराच्या उलट्या बोंबा आणि याकरता पहेली जाहिरात सहारा… Read more »
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
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Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

भाई आपको प्रणाम।
हिन्दी न्यूज पोर्टल पर विचार प्रकट करने के लिये भी आपका आभार। यह सत्य है कि आपने अपने अमूल्य विचारों को मराठी में लिखा है, लेकिन समस्या यह है कि आपने क्या लिखा है, मेरी समझ में नहीं आ रहा है? यदि आपने हिन्दी में लिखा होता तो मेरे जैसे अन्य पाठक भी समझकर अपने ज्ञान को विस्तार दे पाते। कृपया यदि सम्भव हो तो हिन्दी में अपने विचार प्रकट करें। धन्यवाद।

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