लेखक परिचय

श्याम नारायण रंगा

श्याम नारायण रंगा

नाथूसर गेट पुष्करना स्टेडियम के नजदीक बीकानेर (राजस्थान) - 334004 MOB. 09950050079

Posted On by &filed under वर्त-त्यौहार.


दुनियाभर में होली का त्यौंहार जहाँ उत्साह, उमंग व मस्ती के साथ मनाया जाता है वहीं पुकरणा ब्राह्मण समाज की चोवटिया जोशी जाति के लिए होली खुशी का नहीं वरन ाोक का त्यौंहार है। ये लोग होली का त्यौंहार हँसी खुशी न मनाकर ाोक के साथ मनाते हैं। इन दिनों में होलकाटक से लेकर धुलण्डी के दिन तक चोवटिया जोशी जाति के घरों में लगभग खाना नहीं बनता है। इस दौरान वे ऐसी सब्जी नहीं बनाते जिसमें छौंक लगाई जाए या कोई भी ऐसा व्यंजन नहीं बनाते जो तला जाए। फलस्वरूप इन चोवटिया जोशी जाति के रिश्तेदार व लड़के के ससुराल के संबंधी इन लोगों के लिए आठ दिनों तक लगातार सुबह शाम  दोनों वक्त भोजन का प्रबंध करते हैं।

इसके पीछे कहानी यह है कि एक समय की बात है कि हालिका दहन के समय इसी चोवटिया जोशी जाति की एक औरत दहन हो रही होली के फेरे निकाल रही थी। उस औरत के गोद में उसका छोटा बच्चा {लड़का} भी था। बच्चा माँ की गोद में उछल कूद कर रहा था और माँ होलिका के फेरे लगा रही थी। इस दौरान हाथ से छिटक कर वह बच्चा माँ की गोद से धूं धूं कर जल रही होलिका में गिर गया। बच्चे को जलती हुई आग में देखकर माँ चीखने चिल्लाने लगी और बच्चे को बचाने के लिए गुहार करने लगी पर कोई और उपाय न दिखा तो अपने बच्चे को बचाने के लिए वह माँ भी जलती हुई होलिका में कूद पड़ी। इस दुर्घटना में वह माँ और बच्चा दोनों न बच सके और माँ अपने बच्चे के पीछे सती हो गई। कहते हैं बाद में इसी सती माता ने श्राप दे दिया कि कोई भी चोवटिया जोशी जाति का परिवार होलिका दहन में हिस्सा नहीं लेगा और न होली को उत्साह से मनाएगा और तब से पुकरणा ब्राह्मण समाज की इस चोवटिया जाति के लिए होली मातम का त्यौंहार हो गया।

अब अगर किसी भी चोवटिया जोशी परिवार में होलिका दहन के दिन लड़के का जन्म हो और वह लड़का पूरे एक साल तक जिंदा रहे और अपनी माँ के साथ जलती हुई होलिका की परिक्रमा कर होलिका की पूजा करे तो ही इस जाति के लिए होली का त्यौंहार हँसी खुशी के साथ मनाना संभव होगा। इसे चमत्कार कहेंगे या संयोग कि इस दुर्घटना को हुए आज सैंकड़ों साल हो गए हैं लेकिन आज तक चोवटिया जोशीयों के किसी भी परिवार में होलिका दहन के दिन किसी लड़के का जन्म नहीं हुआ है।

पुकरणा ब्राह्मण समाज का बाहुल्य बीकानेर, जोधपुर, पोकरण, फलौदी, जैसलमेर में है और इसके साथ ही साथ भारत भर में इस जाति के लोग रहते हैं और यह परम्परा पूरे भारतवार में निभाई जाति है। जोधपुर, पोकरण, बीकानेर में तो यह परम्परा भी किसी समय रही है कि होलिका दहन से पूर्व जोर का उद्घोा कर आवाज लगाई जाति थी कि अगर कोई चोवटिया जोशी है तो वह अपने अपने घर मंें चला जाए क्योंकि होलिका दहन होने वाला है।

इसी के साथ यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि धुलंडी वाले दिन इन चोवटिया जोशी परिवार के लोगों को रंग लगाने के लिए व होली खेलने के लिए अपने घरों से बाहर निकालने के लिए इनके मित्र, रिश्तेदार, सगे, संबंधी इनके घर जाते हैं और इनके चेहरों पर रंग लगाकर होली की मस्ती में इनको ामिल करते हैं। बीकानेर में तो एक तणी जोड़ने का आायेजन भी इन्हीं जोशी परिवार के लोगों द्वारा किया जाता है।

तो यह है परम्परा आस्था और विश्वास जो हर त्यौंहार में होता है चाहे होली हो दिपावली, ईद हो या बैसाखी। विचित्र व समृद्ध परम्पराओं से भरा हमारा भारत। होली की भमकामनाऍं।

याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’

 

 

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz