लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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gulam nabiमृत्युंजय दीक्षित

विगत लोकसभा चुनावों में अतिमुस्लिम प्रेम के कारण मात खा चुकी कांग्रेस सुधरने का नाम नहीं ले रही है। जब राहुल गांधी ने अपनी वापसी के बाद केदारनाथ धाम की १५ किमी यात्रा की थी तब टी vi चैनलों और मीडिया में पुराने कांग्रसियों ने ऐसा प्रदर्शन किया था कि मानो राहुल गांधी के नेतृत्व में अब कांग्रेस पार्टी अपनी पुरानी भूलों को सुधार करते हुए उदार हिंदुत्व का चेहरा जनता के सामने पेश करने जा रही है। राहुल की केदारनाथ यात्रा एक पूरी तरह से ड्रामेबाजी थी जिसका खुलासा पार्टी के हाल मे उठाये गये कदमों और बयानों से साफ परिलक्षित हो गया है। आज कांग्रेस पार्टी बौद्धिक दिवालियेपन की ओर अग्रसर हो रही है। कांग्रसे को यह नहीं समझ में आ रहा है कि वह किधर जाये या फिर कौन सा आसान रास्ता चुनकर अपनी खोयी जमीन को पुनः प्राप्त कर सके। कांग्रसे ने रणनीति कार उसे रसातल की ओर ले जा रहे हंै। जब तक अजय माकन और कपिल सिब्बल जैसे सलाहकार राहुल गांधी की टीम में रहेंगे और दिग्विजय सिंह जैस गुरू बयानबहादुर रहेंगें तब तक कांग्रेस रसातल में ही चलती चली जायेगी।

विगत दिनें कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिमों के प्रति अपनी वफादारी दिखाते हुए योग दिवस से सम्बंधित आयोजनों से अपने आप को दूर कर लिया।फिर योग दिवस को लेकर दिग्विजय सिंह समेत तमाम कांग्रेसी नेताओं के ऐसे बयान आये जिससे पार्टी की छवि को आमजनता के बीच गहरा आघात लगा है। सोनिया और राहुल गांधी योग दिवस के आयोजनों से अपने आप को दूर करते हुए बहानेबाजी करके विदेश की सैर करने निकल गये। गांधी परिवार ने योग के प्रति जिस प्रकार का रवैया अपनाया उससे इस परिवार के चर्च प्रेरित व्यवहार का पता चलता है जो लोग भारतीय सस्कृति व परम्पराओं का मजाक बनाते हैं उनका मजाक स्वतः ही बन जाता है और जगहसांई के पात्र बन जाते हैं। गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी योग का विरोध करके अपने आप को जहां मुस्लिमों के साथ खड़ा बताया वहीं देश के बहुसंख्यक समाज में एक बहुत ही गलत संदेश कांग्रेस पार्टी के प्रति गया है।

दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने एक और भारी गलती कर दी है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी २८ जून २०१५ को नोवी बार रेडियो पर मन की बात कर रहे थे और उसमें उन्होनंे सुरक्षा बीमा योजनाओं की लोकप्रियता और उनकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, “अगस्त महीने में रक्षाबंधन का त्यौहार है। क्यों न हम सभी देशवासी रक्षाबंधन के पहले एक जबदस्त अभियान छेंड़े। हमारे देश की माताओें और बहनों को जनसुरक्षा योजनाओं का लाभ दें।” उन्होनें अपील की है कि इस दिन लोग अपने परिवार की महिलाओं से लेकर घरेलु आया तक को यह बीमा पालिसी भेंट करें। सुरक्षा बीमा योजना के अलावा उन्होनें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का विकल्प भी बताया है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की अपील के बाद भाजपा के विधायक, सांसद और पार्टी कार्यकर्ता पूरें जोर शोर से यह अभियान चलायेंगे। एक प्रकार से पीएम मोदी की नजर महिला मतदाताओं पर टिक गयी हे। लेकिन दिवालिया कांग्रेस व मीडिया के एक बहुत बड़े वर्ग को पीएम मोदी की मन की बाते रास नहीं आ रही । मोदी की मन की बात समाप्त होते ही कांग्रेसियों व टी वी चैनलों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया कि पीएम मोदी ने वसुंधरा- ललित- सुषमा- स्मृति पर अपना मौन नहीं तोड़ा और कालाधन कब वापस आ रहा व किसानों की समस्या पर कुछ नहीं बोला आदि- आदि।

लेकिन दूसरे बड़े कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने एक बिलकुल नया रूवरूप ही प्रदान कर दिया और मीडिया में सारी सुर्खियां बटोरकर ले गये। आजाद यहकर सबको चांैकाने का प्रयास किया कि पीएम मोदी मन की बात में रमजान के पवित्र माह का उल्लेख क्यों नहीं किया । उनका मत का था कि पीएम मोदी ने रक्षाबंधन के माध्यम से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास किया है। जबकि वास्तविकता यह है कि कांग्रेस पार्टी ने रमजान के माध्यम से मुसिलमों को बहकाने व भड़काने का असफल प्रयास कर दिया है। आजाद ने अपनी धर्मनिरपेक्षता का बखान करते हुए अन्य धर्मो के त्यौहारों का भी उल्लेख कर डालाकि पीएम ने उनका नाम क्या नहीं लिया। यह कांग्रेस की ऐतिहासिक भूल है।यहां पर गुलाम नवी आजाद यह भूल गये कि पीएम मोदी ने रमजान की शुरूआत में ही उर्दू भाषा में टिवटर के माध्यम से मुस्लिम जनमानस को पवित्र रमजान की बधाई दी थी और पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांगलादेश के शासनाध्यक्षों को विशेषरूप से बधाई संदेश दिये थे। आजाद को तो इस बात का भी ज्ञान नहीं हैं कि पीएम मोदी की सरकार के एक साल पूरा होने पर एक पुस्तिका उर्दु में भी छपवायी गयी थी ।पीएम मोदी की सरकार मुस्लिमों के कल्याण के लिए एक से बढ़कर योजना ला रही है जिसका मुस्लिम जनमानस तहेदिल से स्वागत भी कर रहा है। पीएम मोदी मुस्लिमों के लिए उस्ताद,मानस योजना,नई मंजिल योजना सहित कई कल्याणकारी कार्यक्रमों का ऐलान कर चुके हैं। वहीं अल्पसंख्यक विभाग को वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक धन आवंटित करने की बात कर चुके हैं। वहीं पीएम मोदी की सभी कल्याणकरी योजनाओं से अल्पसंख्यको को भी लाभ हो रहा है। बैंकों में जाकर मुस्लिम महिलाओं में इन योजनाओं के प्रति उत्साह देखा जा सकता है। कुछदिनों पूर्व कई मुस्लिम संगठनों के नेताओं ने पीएम मोदी से मुलाकात की जिसमें उन्होने अल्पसंख्यकों को भरोसा दिलाया कि मुसलमानों के लिए उनके दरवाजे रात १२ बजे के बाद भी खुले हैं। आज तीस लाख से अधिक मुसलमान भाजपा के सक्रिय सदस्य बन चुके हैं। योग पर भी कई मुस्लिमों ने भाग लिया और अपनी सेल्फी भेजी। जब मुस्लिम समाज मोदी के खिलाफ अधिक सक्रिय नहीं हुआ तो अब कांग्रेस पार्टी रमजान के बहाने मुस्लिमों को भाजपा के खिलाफ भड़का रही है। मुस्लिम टोपी न पहनने से लेकर रमजान तक को लेकर कांग्रेस केवल अपने आप को हिंदू समाज से दूरकर रही है। इस प्रकार से उसका अपना बौद्धिक दिवालियापन उजागर हो रहा है । टी वी चैनलों पर बहस के दौरान मुस्लिम नेताओं ने अपना पक्ष रखते हुए कहाकि आज देशा के मुस्लिमों के वर्तमान हालातों के लिए कांग्रेस पार्टी ही जिम्मेदार है क्योंकि देश में आजादी के बाद से अब तक कांग्रेस का ही शासन रहा है या फिर अपने आप को मुसलमानों के हितैशी मानने वाले तथाकथित समाजवादियों का जिसे कांग्रेस का ही समर्थन मिलता था।

मृत्युंजय दीक्षित

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2 Comments on "बौद्धिक दिवालियेपन की ओर जाती कांग्रेस"

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mahendra gupta
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भा ज पा को साम्प्रदायिक करार देने वाली कांग्रेस खुद सब से बड़ी साम्प्रदायिक पार्टी है और इसी आधार पर इसने अब तक राज किया है मुसलमानो की नासमझी व अनावश्यक भय ने इसे यह आधार प्रदान कर दिया अब भी मुसलमान पूरी तरह नहीं संभला व समझा है अब वह अपनी पार्टी बना कर कुछ हासिल करने की सोच रहा है जब कि इसके झंडाबरदार भी अपनी रोटियां सेकने में लगे हैं

Sanjay
Guest

Very good analysis.

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