लेखक परिचय

डॉ नीलम महेन्द्रा

डॉ नीलम महेन्द्रा

समाज में घटित होने वाली घटनाएँ मुझे लिखने के लिए प्रेरित करती हैं।भारतीय समाज में उसकी संस्कृति के प्रति खोते आकर्षण को पुनः स्थापित करने में अपना योगदान देना चाहती हूँ।

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यमुना 

यमुना

डॅा नीलम महेंद्र

तारीख 11/3/2016 से 13/3/2016 आर्ट ऑफ लिविंग के अन्तर्गत श्री श्री रवि शंकर द्वारा वर्ल्ड कलचरल फेस्टिवल अर्थात विश्व सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया स्थान -दिल्ली में यमुना नदी के किनारे।यह भारत के लिए गर्व का पल था जिसमें सम्पूर्ण विश्व के 155देशों के 35 लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया जिनमें उन देशों के गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।इतने बड़े आयोजन से यमुना प्रदूषित न हो,इसको ध्यान में रखते हुए 650 बायो टायलेट (जैव शौचालय) बनाए गए।

तीन दिन तक सम्पूर्ण विश्व की निगाहें भारत पर टिकी थीं।विश्व की सभी संस्कृतियों का मिलन और भारतीय संस्कृति को उसके श्रेष्ठतम रूप में प्रस्तुत करने का गौरवपूर्ण अवसर!भौतिकता की अन्धी दौड़ में शामिल आज का मनुष्य शांति की तलाश में भारत के आध्यात्म और हमारे आध्यात्मिक गुरुओा की शरण में आते हैं।ऐप्पल के स्टीव जोब्स

और फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग सम्पूर्ण विश्व के सामने भारत के आध्यात्म की शक्ति को स्वीकार कर चुके हैं।

श्री श्रीरविशंकर के इस कार्यक्रम ने विश्व को शांति एवं प्रेम का उपदेश दे कर भारत को एक गरिमा प्रदान की है।

एक तरफ जहां विदेशों में इस कार्यक्रम के प्रति लोगों में उत्साह था और सबकी निगाहें भारत पर टिकी थीं, वहीं दूसरी तरफ भारत का मीडिया (कुछ खास चैनल)इस कार्यक्रम में बाधाएँ डालने का प्रयास करने में लगे थे।नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एवं पर्यावरणविद  यमुना के प्रदूषण की चिंता के प्रति  संवेदनशील होने लगे।मीडिया द्वारा बेहद गंभीरता से इस मुद्दे को उठाया जाने लगा लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो बातें नहीं बताई गई अब जरा उन पर रोशनी डाली जाए तो स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।

2010 से आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा पूरे देश की नदियों की सवच्छता के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है जिसका नाम है –“मेरी दिल्ली मेरी यमुना”लगभग पाँच हजार स्वयंसेवी देश की प्रमुख नदियों की सफाई में लगे हैं।इस पूरी प्रक्रिया में अकेली यमुना नदी से इन स्वयं सेवकों द्वारा 512 टन से अधिक कचरा निकाला जा चुका है।यमुना के अलावा केरल की पंपा समेत अनेक नदियों की सफाई इस अभियान के अंतर्गत की जा चुकी है।प्रश्न यह उठता है कि 2010 से 2015 तक जब इन स्वयं सेवकों द्वारा सफाई का अभियान चलाया जा रहा था किसी भी पर्यावरणविद अथवा एन जी टी के किसी कर्मचारी का ध्यान इस ओर आकर्षित क्यों नहीं हुआ?न तो इनकी तरफ से किसी मदद की पेशकश की गई और न ही अच्छे कार्य के लिए प्रशंसा!।लेकिन जैसे ही श्री श्री रवि शंकर ने अपने ही कार्यकर्ताओं द्वारा साफ की हुई जगह पर इस कार्यक्रम के आयोजन की घोषणा की गई सभी को अपने कर्तव्यों का बोध होने लगा।यहाँ यह तथ्य जानना रोचक होगा कि एन जी टी की शुरुआत 2010 में सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी द्वारा की गई थी इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा करना था लेकिन आज तक इसके द्वारा इस दिशा में अथवा यमुना की सफाई की दिशा में एक भी कदम उठाए जाने की कोई जानकारी प्राप्त नहीं है।यह एक कटु सत्य है कि इन सभी संस्थाओं के होने के बावजूद आज यमुना एक नदी से ज्यादा कचरा फेंकने वाली जगह में तब्दील हो चुकी है।

एक और तथ्य जो इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है वह यह कि केरल की तीसरी सबसे प्रमुख नदी -“पंपा” के किनारे ईसाइयों का भारत ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा सम्मेलन -“मेरामाँन दीक्षांत समारोह”हर साल जनवरी फरवरी में होता है। सात से दस दिन चलने वाले इस कार्यक्रम का स्थल नदी क्षेत्र ही होता है।केरल सरकार द्वारा इस कार्यक्रम के लिए अनेक अस्थायी बांधो का निर्माण कराया जाता है।एक ऐसी नदी जिस पर केरल की जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अपने जीवन यापन के लिए निर्भर हो,उसके प्रवाह को रोकने जैसे गम्भीर मुद्दों पर देश के पर्यावरणविद एवं एन जी टी खामोश रहते हैं लेकिन यमुना से सुरक्षित दूरी पर बिना पर्यावरण की क्षति पहुँचाए विश्व में शांति एवं सद्भावना का संदेश देने वाले वैश्विक कार्यक्रम को करने पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाया जाता है।

तो इस सब से यह समझा जाए कि जुर्माना भरकर आप पर्यावरण दूषित कर सकते हैं?और यदि आप किसी अल्पसंख्यक समुदाय से हैं तो आप यह कार्य बिना जुर्माना भरे भी कर सकते हैं।

 

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