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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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निहाल सिंह

नई दिल्ली, 06 अप्रैल । विश्व स्वास्थ्य संगठन पूरे विश्व भर में बढ़ रहे हाईपरटेंशन की समस्या से परेशान है। इसलिए इस बार विश्व स्वास्थ्य दिवस का थीम रखा गया है हाईपरटेंशन। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लोगों से अपने भोजन में नमक की मात्रा कम करने की अपील की है। नमक और पोटाशियम की मात्रा हमारे भोजन की थाली में बढऩे से हम धीरे-धीरे हाईपरटेंशन की ओर बढ़ते जाते हैं और हमें इस बात का पता भी नहीं चलता है। हाल के अध्ययन में  इस बात का खुलासा हुआ है कि भोजन में नमक की मात्रा कम होने से रक्त चाप कम यानी संतुलित रहता है। इससे दो खतरनाक बीमारी स्ट्रोक एवं दिल की बीमारी का भी खतरा कम होता है।

बदलती कार्यशैली, कार्यस्थल पर तनाव, जीवन की महात्वाकांक्षाएं मुख्य वजह

बदलती जीवन शैली और जीवन में आपाधापी का असर दिल्ली के युवाओं के दिल पर भी पड़ रहा है। अचरज इस बात को लेकर है कि हाईपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप की बीमारी अब युवाओं को ज्यादा चपेट में ले रही है। इस बात का खुलासा नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के एक सर्वे में हुआ है। जब सर्वे हुआ तो उसमें पाया गया कि 30 फीसदी युवा खतरनाक रुप से हाईपरटेंशन की चपेट में हैं। जबकि राजधानी सरकारी आंकड़ा 11.20 फीसदी का है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवन शैली एवं तनाव भरे माहौल के चलते पिछले एक दशक में हाइपरटेंशन के मामले दोगूना हो गया है। जंक फूड कल्चर के चलते राजधानी के 35 फीसदी बच्चे मोटापे के शिकार हैं और इनमें से 13 फीसदी बच्चों में हाइपरटेंशन के मामले देखे गए हैं। इसका एक मुख्य कारण जंक फूड कल्चर भी है।

हाईपरटेंशन के लिए क्या है जिम्मेवार

मैक्स हैल्थ केयर कैथलैब के निदेशक डॉ. विवेका कुमार कहते हैं कि जंक फूड कल्चर काम का तनाव और जेनेटिक फैक्टर धूम्रपान लोगों को उच्च रक्त चाप के साथ-साथ दिल की परेशानी भी दे रहा है। फिजिकल एक्टीविटी भी कम होती जा रही है। इस वजह से युवाओं की दिल की धमनियां सिकुड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर धमनियां संकरी होंगी तो रक्त चाप बढ़ेगा जिससे रक्त प्रवाह भी सही ढंग से नहीं हो पाएगा और हार्ट अटैक होने की संभावना भी बढ़ जाएगी। मूलचंद हॉस्पिटल के  फिजिशयन डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि सड़क पर बिकने वाले समोसे या अन्य खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए और घर पर तेल को बार-बार नहीं उबालना चाहिए। क्योकि तेल को उबालने से वह विषाक्त हो जाता है और हार्ट को नुकसान पहुंचाता है। वहीं कालरा अस्पताल के वरिष्ठï हृद्य रोग विशेषज्ञ डॉ. आर एन कालरा ने कहा कि  भारतीयों को पश्चिमी देशों से तुलना नहीं करनी चाहिए क्योंकि भारतीयों की दिल की धमनियां पश्चिमी देशों की तुलना में संकरी होती हैं। वहीं एल्कोहल भी परेशानी की एक बड़ी वजह है। क्योंकि इससे हार्ट के ब्लड पंपिंग में रुकावट आती है और जब दिल आवश्यक रक्त को शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने के लिए पंप करता है तो इससे दिल पर दबाव काफी बढ़ जाता है और हार्ट अटैक होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।

क्या करें हाइपरटेंशन से बचने के लिए

हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं कि हाइपरटेंशन से बचना है तो फार्यूला 80 का करें पालन। 80 मिनट रोजाना टहलें। साल में 80 दिन अनाज का सेवन न करें। 80 दिन धूप में बैठे। दिन में 80 बार प्रणायाम करें। दिन में 80 कदम तेज चलें। एक मिनट में 80 कदम चलने का अयास करें। इसके अलावा अपने दिल की धड़कन, कोलेस्ट्राल, पेट की चौड़ाई 80, बल्ड प्रेशर 80 तक सीमित रखें।

नमक सेवन 2025 तक एक चमच तक करने का लक्ष्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2025 तक लोगों की थाली से नमक की मात्रा घटाकर एक दिन में एक चमच यानी 5.6 ग्राम करने का लक्ष्य रखा है। कुछ अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि भोजन में सोडियम लवण की कमी एवं पोटेशियम की वृद्धि होने से रक्त चाप नियंत्रित रहता है। इसका रक्त में मौजूद वसा पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। साथ ही शरीर में हार्मोन का स्तर संतुलित रहता है और किडनी भी सही काम करती है। आहार में पोटेशियम की मात्रा अधिक होने से स्ट्रोक के मामले में 24 फीसदी कमी दर्ज की गई। बच्चों के रक्तचाप के संतुलित होने के लिए  भी यह जरुरी है। नमक की मात्रा कम होने से युवाओं में होने वाले खतरनाक कोरोनरी हार्ट डिजीज में भी कमी देखी गई है। उच्च रक्तचाप एवं दिल की बीमारी से बचना है तो आहार में नमक की मात्रा को कम करना पड़ेगा।

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