लेखक परिचय

प्रभांशु ओझा

प्रभांशु ओझा

प्रभांशु ओझा ,योजना ,कुरुक्षेत्र ,जैसे विभिन्न पत्र पत्रिकाओं तथा भारत के विभिन्न समाचार पत्रों में विभिन्न पर्यावरणीय और अन्य प्रासंगिक मुद्दों पर लिखते रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न वाद विवाद प्रतियोगिताएं में 600 से अधिक पुरस्कार जीत चुके हैं .पर्यावरण पर मुंबई में आई डी एफ सी संस्था द्वरा आयोजित वाद विवाद प्रतियोगिता जिसमे की 2 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं

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पिछले कुछ दिनों से नेट न्यूट्रलिटी से जुडा मुद्दा चर्चा में है। नेट न्यूट्रलिटी को हिन्दी में हम ‘इंटरनेट निरपेक्षता’ या तटस्थता भी कह सकते हैं। इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर टिम वू ने किया मोटे तौर पर यह इंटरनेट की आजादी या बिना किसी भेदभाव के इंटरनेट तक पहुंच की स्वततंत्रता का मामला है। इंटरनेट की आजादी के पक्ष में एक सुर में आवाजें उठने लगी हैं.सोशल मीडिया के इस दौर में हर व्यक्ति के लिए अभिव्यक्ति के साधन आसन होते गए हैं, उस दौर में हम तमाम सोशल नेट्वर्किंग एप्लिकेशंस जैसे- फेसबुक, स्काईप, वाईबर के इस्तेमाल के लिए इन्टरनेट की अलग से दरें वसूल करना अभिव्यक्ति की आज़ादी पर साजिशन हमला ही है। ऐसी आशंका है कि किसी इंटरनेट प्रदाता कंपनियों को वेब ट्रैफिक नियंत्रित करने की आजादी देने से इंटरनेट पर प्रतिस्पर्धा की भावना कम होगी और टेलीकॉम कम्पनियां कुछ चयनित सेवाओं को देकर अपना पल्ला झाड़ लेंगी। जो उपभोक्ता तेज इंटरनेट ट्रैफिक का भुगतान करने में समर्थ होंगे, वे इन सेवाओं का आनंद लेंगे, जबकि बाकी को सुस्त ट्रैफिक वाली सेवाओं से काम चलाना पड़ेगा। भारत में नेट न्यू्ट्रलिटी को लेकर अब तक कोई भी कानून नहीं है, भारत का सूचना प्रौद्योगिकी कानून भी इंटरनेट एक्सेस से सम्बंधित विनियामक प्रावधान तो करता है, लेकिन किसी भी इंटरनेट प्रदाता कंपनी के ऊपर अपने व्यवसायिक हितों के चलते इंटरनेट नियंत्रित करने की कोशिशों पर पाबंदी लगाने का प्रावधान नहीं करता। एयरटेल कंपनी के कुछ हालिया प्रावधानों ने और अधिक चिंतित कर दिया है, जहाँ इस कंपनी के जीरो प्लेटफ़ॉर्म पर यह सम्भावना है की सभी तरह के एप्लिकेशन के साथ एक सामान व्यव्हार नहीं किया जाएगा. पिछले साल दिसंबर महीने में मोबाइल सर्विस कंपनी, भारती एयरटेल ने वीओआईपी यानी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल सेवाओं के इस्तेमाल के लिये अतिरिक्त शुल्क लेने की घोषणा की थी। कहा गया कि उसकी इस घोषणा का कारण ग्राहकों द्वारा वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) सेवाओं का बढ़ता इस्तेमाल है। बड़ी ई कॉमर्स कंपनी फ्लिप्कार्ट ने पहले तो एयरटेल की इस योजना का समर्थन किया लेकिन बढ़ते विरोध के बाद खुद को इस योजना से अलग कर लिया और नेट न्यूट्रलिटी का समर्थन किया जिसे की इन्टरनेट उपभोक्ताओं की जीत के रूप में ही देखा जाना चाहिए. सरकार का रुख भी इस दिशा में स्वागत योग्य रहा केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इंटरनेट तक पहुंच को लेकर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। संचार मंत्री ने कहा कि इस मामले पर उन्होंने एक कमेटी बनाई है, वो नेट न्यूट्रलिटी और नेट सिक्योरिटी पर अपनी रिपोर्ट देगी। कमेटी को मई के दूसरे हफ्ते तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। ट्राई के चेयरमैन राहुल खुल्लर ने एयरटेल के इंटरनेट पर वॉयस कॉल के लिए अलग से टैरिफ लाने को नेट न्यूट्रलिटी के खिलाफ बताया लेकिन ये भी कहा कि इसे गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि देश में फिलहाल नेट न्यूट्रलिटी के खिलाफ कोई कानून नहीं है। खुल्लर ने कहा कि नेट न्यूट्रलिटी पर कानून बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एयरटेल का वीओआईपी के लिए १६ गुना ज्यादा चार्ज लेना टैरिफ में मनमानी का मामला है और इसके ऊपर जल्द कोई फैसला ले लिया जाएगा। ट्राई को इस बारे में अब तक उपभोक्ताओं द्वारा लाखों ईमेल भेजे जा चुके हैं। सोशल मीडिया पर नेट न्यूट्रलिटी, सेव द इंटरनेट टॉप ट्रेंड कर रहे हैं। आईटी एवं संचार के पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मिलिंद देवड़ा ने भी नेट आजादी की वकालत की है। उनका मानना है कि ग्राहकों के लिए नेट आजादी अहम है और ट्राई को देश में नेट न्यूट्रलिटी को अपनाना चाहिए। चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर्स देश है और ऐसे देश में किसी भी ऐसी पहल का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए जो की उपभोक्ताओं की इन्टरनेट के तमाम माध्यमों तक आसान पहुँच पर अंकुश लगाए.इस तरह से इन्टरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों के इन्टरनेट पर एकाधिकार पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। भारत से ज्यारदा यह मामला अमेरिका तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए चर्चा का‍ विषय रहा है। इंटरनेट के प्रचार-प्रसार व उपयोग बढ़ने के साथ ही इसकी आजादी का मुद्दा हाल ही के वर्षों में बड़ा हो गया है। कंपनियां इस पर तरह-तरह से रोक लगाना चाहती हैं। सरकारों का अपना एजेंडा है। यह कंपनियों की कमाई और मुनाफे से तथा सरकारों की नीतियों से जुड़ा मामला है। इन सबसे महत्वपूर्ण है कि यह लोगों की इंटरनेट पर पहुंच की स्वतंत्रता का मामला है और उनकी अभिव्यक्ति की आजादी से भी जुड़ा हुआ है। नेट न्यूसट्रलिटी या इंटरनेट निरपेक्षता का सिद्धांत यही है कि इंटरनेट सेवा प्रदाता या सरकार इंटरनेट पर उपलब्ध् सभी तरह के डेटा को समान रूप से ले। इसके लिए समान रूप से शुल्कध हो। एयरटेल के साथ खड़ी फ्लिपकार्ट सोशल मीडिया पर जबरदस्त विरोध के बाद नेट न्यूट्रलिटी के पक्ष में आ गई है। इसने एयरटेल जीरो प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़ने का फैसला किया है। सभी को इंटरनेट पर समान पहुंच उपलब्ध कराने के लिए छिड़ी बहस के बीच सरकार ने नेट न्यूट्रलिटी (नेट निरपेक्षता) के मुद्दे पर एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया है। कमिटी मई के दूसरे हफ्ते तक अपनी रिपोर्ट दे सकती है।इंटरनेट सेवाओं की बढ़ती हुयी विविधता और उसमें निरंतर हो रहे प्रयोगों ने नेट न्यूट्रलिटी के मुद्दे को आज बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। इन्टरनेट न्यूट्रलिटी के मूल में यही है की यूजर, कंटेंट, साइट, प्लैटफॉर्म, एप्लिकेशन और संचार के तरीकों के आधार पर न तो भेदभाव किया जाये और न ही अलग-अलग शुल्क लिया जाये। इस अवधारणा में यह निहित है कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और सरकारें इंटरनेट पर सभी डेटा को बराबर प्राथमिकता देंगे। किसी सेवा को च्स्लो लेनज् में इसलिए अटकाया नहीं जा सकता क्योंकि उसके अनुसार शुल्क नहीं दिया गया है।हल ही में अमेरिकी केबल और ब्राडबैंड सेवा प्रदान करने वाली अन्य कंपनियों का विनियमन करने वाली फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (एफसीसी) के अध्यक्ष टाम व्हीलर ने फरवरी में कहा कि कमीशन की योजना ब्राडबैंड सेवाओं को फिर से वर्गीकृत करने (रिक्लासिफाई) की है। कमीशन ने अपने इस फैसले का आधार १९३४ के संचार एक्ट को बनाया जिसके तहत इंटरनेट को दुबारा टेलीकम्युनिकेशन सेवा के रूप में श्रेणीबद्ध किया गया है। इसके अलावा कमीशन ने जोड़ा कि वह इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों और कंटेंट कंपनियों के बीच होने वाले आंतरिक समझौतों को भी अपने अधिकार क्षेत्र में लेगा। इन दोनों ही बातों का व्यवहारिक अर्थ यही था कि इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों को वेब ट्रैफिक की गति तेज या धीमी करने का अधिकार नहीं होगा। कहने की आवश्कयता नहीं कि फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन के ताजा फैसले को दुनिया भर में नेट न्यूट्रलिटी के समर्थकों ने अपनी जीत के रूप में देखा। यह फैसला इसलिये भी महत्वपूर्ण था क्योंकि बीते साल नवम्बर महीने में स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सार्वजनिक तौर पर नेट न्यूट्रलिटी का समर्थन किया था। वर्तमान में स्काइप, व्हाट्सएप और वाइबर जैसी सेवायें (जिन्हें ओटीटी यानि ओवर दि टाप सेवायें भी कहा जाता है) अपनी मुफ्त वोइस काल और अन्य सस्ती सेवायें देने के लिये एयरटेल जैसी टेलीकाम कंपनियों के डाटा नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं। इसके चलते टेलीकाम कंपनियों का अपनी सन्देश सेवाओं (एसएमएस) में किया जाने वाला निवेश बेकार जाता है और उनकी आय प्रभावित होती है। टेलीकाम और इंटरनेट प्रदाता कम्पनियां मानती हैं कि ब्राडबैंड सेवाओं को विस्तार देने में उन्हें भारी निवेश करना पड़ता है और अगर इसके लिये वे वीओआईपी सेवाओं पर शुल्क लेना चाहें तो यह अधिकार उन्हें दिया जाना चाहिये। एयरटेल ने कहा कि वह इंटरनेट कॉल के लिए थ्री-जी यूजर से १० केबी के चार पैसे या दो रुपये प्रति मिनट की दर से शुल्क वसूलेगा.जबकि सामान्य तौर पर इंटरनेट पर एक मिनट के कॉल में तकरीबन ५०० केबी डाटा खर्च होता है. खुद भारत में ३ जी सेवाओं के विस्तार के साथ इंटरनेट यूजर्स की बढ़ रही संख्या उल्लेखनीय स्तर पर पहुंच गयी है। इंटरनेट और मोबाइल एसोशियेशन आफ इंडिया (आईएएम एआई) के अनुसार साल २०१४ तक भारत में कुल इंटरनेट यूजर्स ३०० मिलियन के आस-पास पहुंच गये थे। निश्चित तौर पर इस तेज विस्तार ने टेलीकाम कंपनियों को अपनी पुरानी व्यवसायिक नीतियों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ट्राई वाइबर, वाट्स ऐप जैसी कंपनियों के विनियमन की व्यवस्था करता है, तो उसके पास प्रमुख रूप से दो विकल्प हैं। एक तो यह है कि ऐसी कंपनियों को सेवाओं के लिए लाइसेंस लेना पड़ेगा। इसके लिए उन्हें शुल्क देना होगा जिससे यह सेवाएं महंगी होंगी। इसी तरह दूसरा विकल्प टर्मिनेशन शुल्क का है। दोनों ही स्थितियों में वीओआईपी सेवायें महंगी होंगी। अगर ऐसा हुआ तो इंटरनेट के उपभोक्ताओं के लिये यह झटका होगा। हमारी सरकार को गंभीरतापूर्वक इसका समाधान ढूढना होगा और इस बात को ध्यान में रखना होगा की इन्टरनेट पर किया जाने वाला भेदभाव नागरिकों के साथ ही भेदभाव होगा और और किसी भी तरह का अंकुश निजी कंपनियों के हित में ही होगा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात होगा।

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1 Comment on "नेट न्यूट्रलिटी और अभिव्यक्ति की आजादी"

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Dr. Ashok Kumar Tiwari
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Dr. Ashok Kumar Tiwari
Airtel शुरू से ही विवादास्पद रही है अब तो सामान्य जन के अहित पर उतारू है :—- उदाहरण :— विषय :- १४-३-१५ की शाम फोन – ८१२८४६५०९२ से 6.28 के कॉल पर गलत कटे ३२ रूपए के वापसी हेतु निवेदन ! Inbox x Dr.Ashok Kumar Tiwari Mar 17 to nodal.guj सेवा में, श्रीमान नोडल अधिकारी Air tel ( गुजरात ) विषय :- १४-३-१५ की शाम फोन – ८१२८४६५०९२ से 6.28 के कॉल पर गलत कटे ३२ रूपए के वापसी हेतु निवेदन ! महाशय , मैं आनंद ( गुजरात ) में रहता हूँ , मेरा एयरटेल नंबर- ८१२८४६५०९२ है। शनिवार (… Read more »
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