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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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नई दिल्ली। 27 अप्रैल 2015 से शुरू होने वाले ‘डॉ. हेडगेवार शतरंज प्रतियोगिता’ की तैयारी एक तरफ जहां जोर-शोर से हो रही है, वहीं इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए कई धुरंधर ग्रैंडमास्टर्स, इंटरनेशनल मास्टर्स, वूमेन ग्रैंडमास्टर्स ने हामी भर दी है। ग्रैंडमास्टर्स में पीएम थिप्सय, वैभव सूरी, सहज ग्रोवर, श्रीराम झा शामिल हैं, वहीं वूमेन ग्रैंडमास्टर्स में तानिया सचदेव होंगी, इंटरनेशनल मास्टर्स अतानु लाहिरि ने भी प्रतियोगता में आने पर अपनी स्वीकृति दे दी है।

प्रतियोगिता में शामिल होने वाले इन ग्रैंडमास्टर्स की ख्याति किसी से छिपी नहीं है। ग्रैंडमास्टर वैभव सूरी ने 2012 में फ्रांस में ल्यूक ओपन जीतकर दुनिया को अपना लोहा मनवा दिया था। उस समय सूरी की उम्र महज़ 15 वर्ष ही थी, और वह इतिहास में पन्नों में 27वें सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर्स में शुमार हुए। सूरी का इस कार्यक्रम में आना उन नवयुवक शतरंज खिलाड़ियों के लिए उत्साहवर्धन का काम करेगा। वहीं ग्रैंडमास्टर सहज ग्रोवर ने 2005 में उस समय खासी सुर्खियां बटोरी थीं, जब फ्रांस के बेल्फोर्ट में वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप के अंडर-10 सेक्शन का खिताब अपने नाम किया। ग्रोवर शतरंज में एक मिसाल हैं तथा इस प्रतियोगिता में उनका शामिल होना फख्र की बात है। वहीं, बिहार राज्य से श्रीराम झा खुद ग्रैंडमास्टर तो हैं हीं, उनकी पत्नी विजयालक्ष्मी सुब्बारमण भारत की पहली वूमेन ग्रैंडमास्टर के लिए जानी जाती हैं। श्रीराम का इस प्रतियोगिता में शामिल होना तमाम शतरंजप्रेमियों व प्रतिभागियों के लिए गौरव की बात होगी। इतना ही नहीं, शामिल होने वाले ग्रैंडमास्टर पी.एम. थिप्सय पहले भारतीय हैं जो 1984 में ग्रैंडमास्टर का तमगा अपने से जोड़े थे। थिप्सय उन शतरंज-प्रेमियों के लिए निस्संदेह आज आदर्श हैं। इसके अलावा तानिया सचदेवा और अतानु लाहिरि ऐसे इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स हैं जो शतरंज की दुनिया में अपना अहम स्थान रखते हैं।

जाहिर है, शतरंज प्रतियोगिता में इन धुरंधरों के शामिल होने की खबर से प्रतिभागियों की संख्या में लगातार इजाफ़ा हो रहा है।

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