लेखक परिचय

तेजवानी गिरधर

तेजवानी गिरधर

अजमेर निवासी लेखक तेजवानी गिरधर दैनिक भास्कर में सिटी चीफ सहित अनेक दैनिक समाचार पत्रों में संपादकीय प्रभारी व संपादक रहे हैं। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अजमेर जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। हाल ही अजमेर के इतिहास पर उनका एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में अपना स्थानीय न्यूज वेब पोर्टल संचालित करने के अतिरिक्त नियमित ब्लॉग लेखन भी कर रहे हैं।

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तेजवानी गिरधर

समागम के नाम पर दरबार लगा कर अपने भक्तों की समस्याओं का चुटकी में कथित समाधान करने की वजह से लोकप्रिय हो रहे निर्मल बाबा स्वाभाविक रूप से संस्पैंस बढऩे के कारण यकायक इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के निशाने पर आ गए हैं। स्टार न्यूज ने अपने क्राइम के सीरियल सनसनी पर एक विशेष रिपोर्ट प्रसारित कर उनका पूरा पोस्टमार्टम ही कर दिया है। अब तक उनके बारे में कोई विशेष जानकारी किसी समाचार माध्यम पर उपलब्ध नहीं थी, उसे भी कोई एक माह की मशक्कत के बाद उजागर किया है कि आखिर उनकी विकास यात्रा की दास्तान क्या है। इतना ही नहीं उन पर एक साथ दस सवाल दाग दिए हैं। दिलचस्प मगर अफसोसनाक बात ये है कि ये वही स्टार न्यूज चैनल है, जो प्रतिदिन उनका विज्ञापन भी जारी करता रहा है और अब न्यूज चैनलों पर विज्ञापनों के जरिए चमत्कारों को बढ़ावा देने से की प्रवृत्ति से बचने की दुहाई देते हुए बड़ी चतुराई से बाबा के करोड़ों रुपए कमाने पर सवाल खड़े कर रहा है। इतना ही नहीं अपने आप को ईमानदार जताने के लिए विज्ञापन अनुबंध की तय समय सीमा समाप्त होने के बाद वह इसका प्रसारण बंद करने की भी घोषणा कर रहा है।

सवाल उठता है कि यदि वाकई स्टार न्यूज को चमत्कारी बाबाओं का महिमा मंडन किए जाने पर ऐतराज रहा है, तो यह उसे अब कैसे सूझा कि ऐसे विज्ञापन नहीं दिखाए जाने चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि या तो विज्ञापन की रेट को लेकर विवाद हुआ होगा या फिर ये लगा होगा कि जितनी कमाई बाबा के विज्ञापन से हो रही है, उससे कहीं अधिक का फायदा तो टीआरपी बढऩे से ही हो जाएगा। वजह स्पष्ट है कि जब सारे चैनल किसी के गुणगान में जुटे हों तो जो भी चैनल उसका नकारात्मक पहलु दिखाएगा, दुनिया उसी की ओर आकर्षित होगी। इसी मसले से जुड़ी एक तथ्यात्मक बात ये भी है कि स्टार न्यूज ने बाबा के बारे में जो जानकारी बटोरने का दावा किया है, वह सब कुछ तो सोशल मीडिया पर पहले से ही आने लग गई थी। उसे लगा होगा कि जब बाबा की खिलाफत शुरू हुई है तो कोई और चैनल भी दिखा सकता है, सो मुद्दे को तुरंत लपक लिया। मुद्दा उठाने को तर्कसंगत बनाने के लिए प्रस्तावना तक दी, जिसकी भाषा यह साबित करती प्रतीत होती है, मानो चैनलों की भीड़ में अकेला वही ईमानदार है।

असल में निर्मल बाबा चमत्कारी पुरुष हैं या नहीं या उनका इस प्रकार धन बटोरना जायज है या नाजायज, इस विवाद को एक तरफ भी रख दिया जाए, तो सच ये है कि उन्हें चमत्कारी पुरुष के रूप में स्थापित करने और नोट छापने योग्य बनाने का श्रेय इलैक्ट्रॉनिक मीडिया को जाता है। बताते हैं कि इस वक्त कोई चालीस चैनलों पर निर्मल बाबा के दरबार का विज्ञापन निरंतर आ रहा है। जब बाबा भक्तों से कमा रहे हैं तो भला इलैक्ट्रॉनिक मीडिया उनसे क्यों न कमाए? माना कि चैनल चलाने के लिए धन की जरूरत होती है, मगर इसके लिए आचार संहिता, सामाजिक सरोकार, नैतिकता व दायित्वों को तिलांजलि देना बेहद अफसोसनाक है। ऐसे में क्या यह सवाल सहज ही नहीं उठता कि निर्मल बाबा के विज्ञापन देने वाले चैनल थोड़ा सा तो ख्याल करते कि आखिर वे समाज को किस ओर ले जा रहे हैं? क्या जनता की पसंद, जनभावना और आस्था के नाम पर अंधविश्वास को स्थापित कर के वे अपने दायित्व से च्युत तो नहीं हो रहे? कैसी विडंबना है कि एक ओर जहां इस बात पर जोर दिया जाता है कि समाचार माध्यमों को कैसे अधिक तथ्यपरक व विश्वनीय बनाया जाए और उसी के चलते चमत्कार से जुड़े प्रसंगों पर हमले किए जाते हैं, वहीं हमारे मीडिया ने कमाने के लिए चमत्कारिक व्यक्तित्व निर्मल बाबा की कमाई से कुछ हिस्सा बांटना शुरू कर दिया। सच तो ये है कि इलैक्ट्रॉनिक मीडिया की ही बदौलत पिछले कुछ वर्षों में एकाधिक बाबा अवतरित हुए हैं। वे इसके जरिए लोकप्रियता हासिल करते हैं और धन बटोरने लग जाते हैं। दोनों का मकसद पूरा हो रहा है। सामाजिक सरोकार जाए भाड़ में। बाबा लोग पैसा खर्च करके लोकप्रियता और पैसा बटोर रहे हैं और चैनल पैसे की खातिर बिकने को तैयार बैठे हैं।

थोड़ा सा विषयांतर करके देखें तो बाबा रामदेव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनसे भी बेहतर योगी हमारे देश में मौजूद हैं और अपने छोटे आश्रमों में गुमनामी के अंधेरे में काम कर रहे हैं, मगर बाबा रामदेव ने योग सिखाने के नाम पर पैसा लेना शुरू किया और उस संचित धन को मीडिया प्रबंधन पर खर्च किया तो उन्हें भी इसी मीडिया ने रातों रात चमका दिया। यद्यपि उनके दावों पर भी वैज्ञानिक दृष्टि से सवाल उठाए जाते हैं, मगर यदि ये मान लिया जाए कि कम से कम चमत्कार के नाम तो नहीं कमा रहे, मीडिया की बदौलत ऐसे चमके हैं कि उसी लोकप्रियता को हथियार बना कर सीधे राजनीति में ही दखल देने लग गए हैं।

अन्ना हजारे का मामला कुछ अलग है, मगर यह सौ फीसदी सच है कि वे भी केवल और केवल मीडिया की ही पैदाइश हैं। उसी ने उन्हें मसीहा बनाया है। माना कि वे एक अच्छे मकसद से काम कर रहे हैं, इस कारण मीडिया का उनको चढ़ाना जायज है, मगर चमकने के बाद उनकी भी हालत ये है कि वे सीधे पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही चुनौती दे रहे हैं। आज अगर उनकी टीम अनियंत्रित हो कर दंभ से भर कर बोल रही है तो उसके लिए सीधे तौर यही मीडिया जिम्मेदार है। अन्ना और मीडिया के गठजोड़ का ही परिणाम था कि अन्ना के आंदोलन के दौरान एकबारगी मिश्र जैसी क्रांति की आशंका उत्पन्न हो गई थी।

लब्बोलुआब इलैक्ट्रॉनिक मीडिया जितना धारदार, व्यापक व प्रभावशाली है, उतना ही गैर जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहा है। सरकार व सेना के बीच कथित विवाद को उभारने का प्रसंग इसका ज्वलंत उदाहरण है। इसे वक्त रहते समझना होगा। कल सरकार यदि अंकुश की बात करे, जो कि प्रेस की आजादी पर प्रहार ही होगा, तो इससे बेहतर यही है कि वह बाजार की गला काट प्रतिस्पद्र्धा में कुछ संयम बरते और अपने लिए एक आचार संहिता बनाए।

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13 Comments on "निर्मल बाबा : पहले महिमा मंडन, अब पोस्टमार्टम?"

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Vindhyeshwari prasad tripathi
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Vindhyeshwari prasad tripathi

संसार इतना भ्रष्ट हो गया है कि कुछ समझ में ही नहीं आता?किसे सही माने किसे गलत?किसे अच्छा माने किसे बुरा?नेताओं का दोगलापन;अफसरों कर्मचारियों की लापरवाही, घूसखोरी; पुलिस का अपराधियों से साठगांठ; आतंकवाद; भ्रष्टाचार,दलाली……………..
आखिर कहां जायें हम,किसे सही माने?हर विषम परिस्थितियों में हर व्यक्ति धर्म का दामन पकड़ता और अब उसका भी दामन कलियुग के प्रभाव से अछूता नहीं रहा।धत तेरी के!!!!!!!!!!
अब मन में एक ही बात आती है- ‘जियें तो जिये कैसे?अब इस संसार में।’

तेजवानी गिरधर
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अति सुंदर शब्द चित्र

vedvibhu
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आज जो पंथ के नाम पर अंतर्राष्ट्रीय हो गए हैं तथा निर्मल बाबा से पहले इसी तरह के शगूफे से धर्म तंत्र का आर्थिकीकरण व फिर राजनीतिकरण व सत्ता प्राप्ति साधन बन रहा है उसे किस श्रेणी में रखा जाए। जो हाथ से क्रॉस से पवित्र जल से सही करने के दावे चैनलों पर वर्षों से प्रसारित हो रहे हैं व क्या हैं। यदि निर्मल बाबा के प्रति श्रद्धा गलत है तो उस अललाह के प्रति श्रद्धा कैसे उचित होगी जो अपने अतिरिक्त किसी विचार सत्ता उपासना प्रणाली को मानता ही नहीं बल्कि कुफ्र को समाप्त करने के लिए १४००… Read more »
तेजवानी गिरधर
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आपने वाकई सही और सटीक सवाल उठाए हैं

tapas
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बिलकुल सही मुद्दा उठाया है … ये चैनल वाले सिर्फ पैसो के ही सगे है …. मगर बाबा रामदेव के बारे में की गयी प्रतिक्रिया समझ से परे है … ‘ मीडिया की बदौलत ऐसे चमके हैं कि उसी लोकप्रियता को हथियार बना कर सीधे राजनीति में ही दखल देने लग गए हैं।’ ऐसा उन्होंने क्या मुद्दा उठाया की आपको वो दखल लगने लगा ?? ये दखल राजनीती में तो नही इन राजनेताओ की लूटनिति में जरूर था … देश हित के लिए कोई भी मुद्दा उठाने के लिए किसी विशेष पद की जरूरत नही होती … बच्चे से लेकर… Read more »
तेजवानी गिरधर
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मान्यवर, बाबा योग सिखाते सिखाते कितने विवादित हो गए हैं, यह सब जानते हैं, इस पर बहस बेमानी सी लगती है, और सबसे बडी बात ये है कि अगर किसी की किसी में आस्था है तो उसका कुछ नहीं किया जा सकता

tapas
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गिरधारी जी , विवादित होने का ये मतलब नही है की बाबा गलत हो गए …. दूसरी बात रही आस्था की तो लोग योग/ प्राणायाम में आस्था रखते है न की बाबा में बाबा जो योग सिखाते है वो उनकी उपज नही है बल्कि पुराना ज्ञान है जिसे वे पुनह विश्व के सामने लाये और इस बात का श्रेय उन्हें देना ही चाहिए ( जब देश के किसी भी पुल या सड़क का नाम राजनेताओ के नाम पर कर दिया जा सकता है ) तो योग को प्रसिध करने का श्रेय उन्हें दिया जा सकता है अब बात करते है… Read more »
तेजवानी गिरधर
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असल में यह बहस तो अंतहीन ही होनी है, हर बिंदु को दो पक्ष होते हैं, बात अंडरस्टेंडिंग की है, यूं तो निर्मल बाबा को भी सही मानने वाले भी बैठे हैं

sureshchandra karmarkar
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sureshchandra karmarkar

हमारे देश की जनता भोली है.अनेक इशवरों,अवतारों ,विशवासों, के चलते वह अपने कष्टों को दूर करने के लिए अनेकानक उपाय करती है. उन उपायों के तहत वह बाबा.साधू,संत,महात्माओं के पास जाती है. अब कौन व्यक्ति कैसा निकलता है ,यह लम्बे अन्तराल के बाद पता चलताहै. है. आजकल मीडिया ऐसे लोगों का बड़ा प्रचार करा है जिनसे उसे आय होती है. आजकल ,बाबाओं ने मीडिया पर कब्ज़ा किया h

तेजवानी गिरधर
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बाबा पहले भी होते थे, मगर अब मीडिया के जरिए प्रचार करके वे ज्यादा लूटने लग गए हैं

bablu kumar
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बाबाजी तो इस देश को हजारो-लाखो वर्षो से, राम और कृष्ण के समय से सँभालते आ रहे है, तो मुझे लगता है कि बाबाओ को अब भी अपने परम कर्त्तव्य को ही निभाना चाहिए,

mahendra gupta
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सब कुछ इनका ही किया धरा है .अब सरे चैनल निर्मल बाबा के पीछे पद गएँ है.अब उनके shakshatkar ले कर ईमानदार भी यही साबित कर देंगे. आय कर विभाग की भी आँख अब खुल जायेंगी.जरा से भी संदेह पर आम आदमी से आय के श्रोत पूछने वाला यह विभाग अब तक सो रहा था,यह भी देखने योग्य बात है. इन सभी बाबाओं ने जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है,अलग अलग पदनाम से ऐसे स्वनाम धन्य लोग सभी धर्म में मिल जायेंगे.यह बात भिन्न है की कुछ छोटे स्तर पर यही कम कर रहे हैं .कहावत है रोगी… Read more »
तेजवानी गिरधर
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जी बिलमुल हमें तो जागना ही होगा, उसके बिना हम ठगे जाने से बच नहीं सकते

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